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SYL पर पंजाब-हरियाणा की बैठक: दोनों सीएम बोले-अच्छे माहाैल में बात हुई है, अब लगता है झगड़ा निपट जाना चाहिए

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 27 Jan 2026 01:15 PM IST
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सार

एसवाईएल मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पंजाब और हरियाणा के बीच बैठक हुई। बैठक में दोनों सीएम के अलावा पंजाब के मंत्री बरिंद्र गोयल और हरियाणा की सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी भी माैजूद रहे। 

meeting between Punjab and Haryana in Chandigarh regarding SYL issue bhagwant mann nayab saini
एसवाईएल मुद्दे पर बैठक के बाद प्रेसवार्ता करते नायब सैनी और भगवंत मान - फोटो : ANI
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विस्तार
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एसवाईएल मुद्दे पर अब पंजाब-हरियाणा के अफसर मौजूदा परिस्थितियों की समीक्षा करते हुए इस मुद्दे पर अपनी-अपनी बात रखेंगे। अफसर ही सिफारिश करेंगे कि इस मसले का क्या हो सकता है। अफसरों की रिपोर्ट के बाद दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्री यह तय करेंगे कि आगे क्या किया जाना है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों मुख्यमंत्रियों को आपस में बैठकर इस विवाद का हल निकालने को कहा था।
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एसवाईएल मुद्दे पर आज चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा की बैठक हुई। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बैठक में पहुंचे। बैठक के बाद नायब सैनी और भगवंत मान ने संयुक्त प्रेसवार्ता की। 
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दोनों राज्य के अधिकारी करेेंगे आगे की बातचीत

नायब सैनी ने बैठक के बारे में कहा कि बातचीत बहुत अच्छे माहौल में हुई है। जब अच्छे माहौल में बातचीत होती है तो सार्थक परिणाम भी आते हैं। सुप्रीम कोर्ट के जो दिशा निर्देश हैं उनके अनुसार हमने बैठक की है। इससे पहले भी केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में बातचीत हुई है। हमने तय किया है कि दोनों राज्यों के अधिकारी अब आगे बातचीत करेंगे। 

वहीं पंजाब के सीएम भगवंत मान ने कहा कि हम भाई कन्हैया जी के वारिस हैं, उन्होंने युद्ध में दुश्मनों को भी पानी पिलाया था, हरियाणा तो हमारा छोटा भाई है। मान ने कहा कि यह विवाद हमारे बुजुर्गों के समय से चलता आ रहा है। अब पंजाब और हरियाणा का नेतृत्व नई पीढ़ी के नेताओं के हाथ में है। उम्मीद है कि यह विवाद जल्द खत्म हो जाएगा। मान ने कहा कि अफसर महीने में तीन से चार बैठकें भी कर सकते हैं। एक बार पानी का मसाला हल हो जाए, उसके बाद एसवाईएल नहर के निर्माण के बारे में भी सोच लेंगे।

क्या है एसवाईएल विवाद

एसवाईएल विवाद की जड़ 31 दिसंबर, 1981 के उस समझौते में है, जिसके तहत एसवाईएल नहर की योजना बनी थी और 1982 में निर्माण शुरू हुआ था। हालांकि 1990 में काम बंद हो गया। हरियाणा ने 1996 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और कोर्ट ने 2002 में पंजाब को एक साल में नहर निर्माण पूरा करने का निर्देश दिया।

2004 में कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि यदि पंजाब निर्माण नहीं करता, तो केंद्र इसे अपने हाथों में ले। कैप्टन सरकार ने 2004 में जल समझौते रद्द कर दिए और 2016 में अकाली-भाजपा सरकार ने नहर के लिए अधिग्रहीत जमीन को डिनोटिफाई कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि पंजाब और हरियाणा केंद्र सरकार के साथ सहयोग करके इस विवाद का हल निकालें।  

एसवाईएल नहर की मौजूदा स्थिति

एसवाईएल नहर के निर्माण का जो खाका तैयार किया गया है, उसमें 214 किलोमीटर में से 92 किलोमीटर नहर हरियाणा में बन चुकी है। पंजाब में एसवाईएल नहर का निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है। कई जगह एसवाईएल नहर के लिए खुदाई को मिट्ठी से भरा जा चुका है। पंजाब में कुल 122 किलोमीटर नहर के हिस्से का निर्माण होना है। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2002 में हरियाणा के पक्ष में फैसला देते हुए पंजाब को समझौते के तहत नहर निर्माण के आदेश दिए थे, लेकिन 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा में कानून पारित कर 1981 के समझौते को रद्द कर दिया। सुप्रीमकोर्ट ने इस कानून को 2016 में रद्द कर दिया और 30 नवंबर, 2016 को पंजाब में एसवाईएल के हिस्से पर स्टेटस को बनाए रखा।
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