ट्राइसिटी से मानसून की विदाई: सीजन में 15.9% कम हुई बारिश, अब मशीन लर्निंग बताएगी कब और कितने बरसेंगे बादल
अक्तूबर की शुरुआत के साथ दिन और रात के तापमान में अंतर बढ़ने लगा है। सुबह और देर शाम हल्की ठंडक रहेगी जबकि दोपहर में तेज धूप के कारण गर्मी का अहसास होगा।
विस्तार
सितंबर के आखिरी दिन के साथ ही ट्राइसिटी से मानसून की विदाई हो गई है। मौसम विज्ञान केंद्र सेक्टर-39 की ओर से 30 सितंबर को जारी पूर्वानुमान के मुताबिक चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली में अगले सात दिन यानी 6 अक्तूबर तक बारिश के आसार नहीं हैं।
इस दौरान मौसम शुष्क रहेगा और मौसम विभाग ने किसी तरह का अलर्ट भी जारी नहीं किया है।
अगले कुछ दिनों में अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री और न्यूनतम 21 से 22 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है। 1 से 3 अक्तूबर के बीच आसमान साफ या आंशिक रूप से बादलों वाला रह सकता है। इस दौरान अधिकतम तापमान करीब 35 डिग्री और न्यूनतम 21 से 22 डिग्री रहेगा। 4 और 5 अक्तूबर को दिन के तापमान में मामूली गिरावट के साथ अधिकतम पारा 33 से 34 डिग्री तक रह सकता है। उत्तर-पश्चिमी हवाएं 4 से 7 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की संभावना है। इससे हवा में मौजूद उमस कम होगी और मौसम सुहावना रहेगा।
रात का पारा 21 डिग्री तक पहुंचा
पिछले 24 घंटे में चंडीगढ़ का अधिकतम तापमान 33.6 डिग्री दर्ज हुआ जो सामान्य से करीब एक डिग्री अधिक रहा। न्यूनतम तापमान 21 डिग्री दर्ज किया गया। सुबह हवा में नमी 88 प्रतिशत रही, जो शाम तक घटकर 55 प्रतिशत रह गई। तापमान में दिन-रात का अंतर बढ़ने से मौसम में बदलाव साफ महसूस होने लगा है।
सितंबर में बारिश सामान्य, मानसून में 15.9 प्रतिशत कमी
सितंबर में चंडीगढ़ में 132.2 मिमी बारिश दर्ज हुई जबकि सामान्य बारिश 131.4 मिमी है। यानी महीने में बारिश करीब एक प्रतिशत अधिक रही। हालांकि पूरे मानसून सीजन में बारिश सामान्य से कम रही। 1 जून से 30 सितंबर तक 710.8 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य सीजनल बारिश से करीब 15.9 प्रतिशत कम है।
2011 के बाद सितंबर की सबसे ठंडी रात
सितंबर में तापमान में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। 13 सितंबर को अधिकतम तापमान 36.8 डिग्री रहा, जो महीने का सबसे गर्म दिन था। इसके बाद 29 सितंबर को न्यूनतम तापमान 19 डिग्री दर्ज किया गया। यह 2011 के बाद सितंबर में दर्ज सबसे कम रात का तापमान रहा।
दिन-रात में 12 से 14 डिग्री का अंतर
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में दिन और रात के तापमान में करीब 12 से 14 डिग्री का अंतर रहने की संभावना है। ऐसे में सुबह-शाम हल्की ठंडक और दोपहर में गर्मी महसूस होगी। मौसम में बदलाव के बीच तापमान के अनुसार कपड़े पहनना बेहतर रहेगा। सुबह-शाम ठंडक और दोपहर की गर्मी के कारण दिनचर्या में भी बदलाव महसूस होगा।
चंडीगढ़ में बारिश कब होगी और कितनी होगी, इसका बेहतर अनुमान लगाने के लिए अब मशीन लर्निंग की मदद ली जा रही है। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) के शोधकर्ताओं ने करीब 50 साल के दैनिक बारिश के आंकड़ों का अध्ययन कर तीन मशीन लर्निंग मॉडल- एक्सजीबूस्ट, कैटबूस्ट और लाइटजीबीएम को आजमाया। तीनों मॉडलों ने बारिश के समय और मात्रा का अनुमान लगाने की कोशिश की। अध्ययन में लाइटजीबीएम का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा।
यह अध्ययन पेक के सिविल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ता सूरज शर्मा, शक्ति कुमार, मोहित कुमार और श्रेया शर्मा ने मिलकर किया है। अध्ययन 11वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन सिविल, स्ट्रक्चरल एंड ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियरिंग (आईसीसीएसटीई-2026) में जून 2026 में प्रकाशित हुआ। शोध में भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के चंडीगढ़ स्टेशन से मिले दैनिक बारिश के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। इसमें 1974 से मई 2024 तक का रिकॉर्ड शामिल रहा। मॉडल को पिछले दिनों हुई बारिश के आंकड़ों और मौसमी पैटर्न के आधार पर बारिश का अनुमान लगाने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
तीनों मॉडल में लाइटजीबीएम रहा सबसे आगे
एक्सजीबूस्ट ने भी बारिश के अनुमान में अच्छा प्रदर्शन किया। इसका आरएमएसई 3.7338 मिलीमीटर प्रतिदिन, एमएई 0.5657 मिलीमीटर प्रतिदिन और आर-स्क्वायर 0.7414 रहा। तीनों मॉडलों में इसका प्रशिक्षण समय सबसे कम रहा। कैटबूस्ट का आरएमएसई 4.8062, एमएई 0.6904 मिलीमीटर प्रतिदिन और आर-स्क्वायर 0.5716 रहा। शोध में पाया गया कि तेज बारिश के दौरान यह मॉडल वास्तविक मात्रा से कम अनुमान लगाने की ओर ज्यादा गया।
वहीं, लाइटजीबीएम का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। इसका आरएमएसई 2.9787 मिलीमीटर प्रतिदिन, एमएई 0.5527 मिलीमीटर प्रतिदिन और आर-स्क्वायर 0.8352 रहा। यानी इसके अनुमान वास्तविक बारिश के आंकड़ों के सबसे करीब रहे।
अध्ययन में सामने आया कि तीनों मॉडल बारिश होने के समय को काफी हद तक पहचान पाए, लेकिन बहुत तेज या अत्यधिक बारिश की स्थिति में सटीक अनुमान लगाना अब भी चुनौती है। लाइटजीबीएम ने भी सबसे अधिक बारिश वाले कुछ दिनों में वास्तविक मात्रा को थोड़ा कम आंका। जुलाई 2022 के आंकड़ों की तुलना में लाइटजीबीएम वास्तविक कुल बारिश और सबसे अधिक बारिश के स्तर के सबसे करीब रहा।
जल निकासी और बाढ़ प्रबंधन में मिल सकती है मदद
शोधकर्ताओं के मुताबिक, ऐसे मॉडल भविष्य में शहरी जल निकासी, जलभराव के जोखिम का आकलन, बारिश के पानी की निकासी और बाढ़ प्रबंधन की योजना बनाने में मददगार हो सकते हैं। चंडीगढ़ में बढ़ते निर्माण और पक्की सतहों के कारण बारिश का पानी जमीन में कम जाता है और नालियों पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में बारिश की संभावित मात्रा और पैटर्न का बेहतर अनुमान शहर की जल निकासी व्यवस्था की योजना में उपयोगी हो सकता है।