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पंजाब में एनालॉग पनीर पर एक साल की रोक: 43 फीसदी सैंपल फेल होने के बाद एक्शन, खरीद के रिकॉर्ड की होगी जांच
Fri, 28 Aug 2026 12:53 PM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Fri, 28 Aug 2026 12:53 PM IST
सार
सरकार के सामने कई ऐसे मामले आए हैं, जिनमें एनालॉग पनीर को असली पनीर बताकर बाजार में बेचे जाने की शिकायतें मिली थीं। आदेश के बाद इसे खुले में या पैक करके बेचना भी प्रतिबंध का उल्लंघन माना जाएगा।
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paneer
- फोटो : AI Generated
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विस्तार
पंजाब में पनीर के 43 फीसदी सैंपल फेल पाए जाने के बाद सरकार ने एनालॉग (नॉन-डेयरी) पनीर के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए पूरी तरह रोक लगा दी है।
यह पनीर असली दूध के बजाय वनस्पति तेल, मिल्क पाउडर, स्टार्च और केमिकल पदार्थों से तैयार किया जाता है। सरकार ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(ए) के तहत यह प्रतिबंध लगाया है।
सरकार के सामने कई ऐसे मामले आए हैं, जिनमें एनालॉग पनीर को असली पनीर बताकर बाजार में बेचे जाने की शिकायतें मिली थीं। आदेश के बाद इसे खुले में या पैक करके बेचना भी प्रतिबंध का उल्लंघन माना जाएगा। कारोबारी और दुकानदार किसी भी स्तर पर इसका उत्पादन या कारोबार नहीं कर सकेंगे। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत कार्रवाई होगी।
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खाद्य सुरक्षा विभाग रेस्टोरेंट, होटल, ढाबे और अन्य खान-पान संस्थानों में भी जांच करेगा। इनके रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे कि वे पनीर कहां से खरीद रहे हैं। पनीर के सैंपल भी लिए जाएंगे। इसके अलावा डेयरी यूनिट, पनीर बनाने वाली इकाइयों, थोक विक्रेताओं, वितरकों, खुदरा विक्रेताओं, कोल्ड स्टोरेज और गोदामों की भी जांच की जाएगी।
2340 सैंपल में 1027 फेल, 589 केस दर्ज
पिछले साल विभाग ने पनीर को लेकर विशेष अभियान चलाया था। इस दौरान 2340 सैंपल लिए गए, जिनमें 1027 फेल पाए गए। इन मामलों में कुल 589 केस दर्ज किए गए। जांच के दौरान पनीर में हानिकारक केमिकल के इस्तेमाल की बात भी सामने आई थी।
उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
विभाग के अनुसार, प्रतिबंध के बावजूद यदि कोई कारोबारी या दुकानदार एनालॉग पनीर का उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण या बिक्री करता पाया गया तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को प्रतिबंध प्रभावी ढंग से लागू कराने और समय-समय पर जांच अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई है।
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यह पनीर असली दूध के बजाय वनस्पति तेल, मिल्क पाउडर, स्टार्च और केमिकल पदार्थों से तैयार किया जाता है। सरकार ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(ए) के तहत यह प्रतिबंध लगाया है।
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सरकार के सामने कई ऐसे मामले आए हैं, जिनमें एनालॉग पनीर को असली पनीर बताकर बाजार में बेचे जाने की शिकायतें मिली थीं। आदेश के बाद इसे खुले में या पैक करके बेचना भी प्रतिबंध का उल्लंघन माना जाएगा। कारोबारी और दुकानदार किसी भी स्तर पर इसका उत्पादन या कारोबार नहीं कर सकेंगे। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत कार्रवाई होगी।
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खाद्य सुरक्षा विभाग रेस्टोरेंट, होटल, ढाबे और अन्य खान-पान संस्थानों में भी जांच करेगा। इनके रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे कि वे पनीर कहां से खरीद रहे हैं। पनीर के सैंपल भी लिए जाएंगे। इसके अलावा डेयरी यूनिट, पनीर बनाने वाली इकाइयों, थोक विक्रेताओं, वितरकों, खुदरा विक्रेताओं, कोल्ड स्टोरेज और गोदामों की भी जांच की जाएगी।
2340 सैंपल में 1027 फेल, 589 केस दर्ज
पिछले साल विभाग ने पनीर को लेकर विशेष अभियान चलाया था। इस दौरान 2340 सैंपल लिए गए, जिनमें 1027 फेल पाए गए। इन मामलों में कुल 589 केस दर्ज किए गए। जांच के दौरान पनीर में हानिकारक केमिकल के इस्तेमाल की बात भी सामने आई थी।
उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
विभाग के अनुसार, प्रतिबंध के बावजूद यदि कोई कारोबारी या दुकानदार एनालॉग पनीर का उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण या बिक्री करता पाया गया तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को प्रतिबंध प्रभावी ढंग से लागू कराने और समय-समय पर जांच अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई है।