चिंताजनक: प्रसवोत्तर रक्तस्राव मातृ मृत्यु का बड़ा कारण, पंजाब में 8.46% महिलाओं की जा रही जान
प्रसवोत्तर रक्तस्राव वह स्थिति है जब प्रसव के तुरंत बाद महिला के शरीर से अत्यधिक रक्त निकलता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह गोल्डन आवर होता है जिसमें विशेष एहतियात बरतने से महिला की जान बचाई जा सकती है।
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प्रसवोत्तर रक्तस्राव मातृ मृत्यु का बड़ा कारण बनता जा रहा है। वर्ष 2024-25 के दौरान पंजाब में 8.46% महिलाओं को प्रसवोत्तर रक्तस्राव के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी है। सूबे में प्रसवोत्तर रक्तस्राव के कारण मौतों का प्रतिशत राष्ट्रीय स्तर से कम है लेकिन फिर भी स्थिति चिंताजनक है।
अगर सूबे में पिछले तीन साल के दौरान प्रसवोत्तर रक्तस्राव से मातृ मृत्यु की स्थिति पर नजर डालें तो वर्ष 2022-23 के दौरान इस कारण 5.64% महिलाओं की मौत हुई थी लेकिन वर्ष 2023-24 में मौत का यह प्रतिशत बढ़कर 10.19% तक पहुंच गया। वर्ष 2024-25 में भी इसमें कोई खास सुधार नहीं हुआ है और 8.46% महिलाओं की मौत का कारण प्रसवोत्तर रक्तस्राव बना है।
वहीं वर्ष 2024-25 के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर प्रसवोत्तर रक्तस्राव के कारण मातृ मृत्यु का प्रतिशत 13.41 दर्ज किया गया है जो सूबे से काफी अधिक है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), अंतरराष्ट्रीय स्त्री रोग महासंघ (फिगो) और अंतरराष्ट्रीय मिडवाइव्स महासंघ (आईसीएम) ने इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए नई अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन और सिफारिशें जारी की हैं।
प्रसवोत्तर रक्तस्राव महिलाओं के लिए बेहद पीड़ादायक और घातक खतरा है। नई गाइडलाइन के अनुसार अब प्रसवोत्तर रक्तस्राव की पहचान 300 मिलीलीटर रक्तस्राव और असामान्य जीवन चिह्नों के साथ ही की जाएगी जबकि पहले यह सीमा 500 मिलीलीटर थी। प्रसव के बाद निगरानी के दौरान डॉक्टरों और मिडवाइव्स को कैलिब्रेटेड ड्रेप यानी रक्त की मात्रा मापने वाला विशेष कपड़ा इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
पड़ोसी राज्यों में यह है स्थिति
पड़ोसी राज्य की हरियाणा में स्थिति और भी गंभीर है। हरियाणा में वर्ष 2022-23 के दौरान प्रसवोत्तर रक्तस्राव के कारण मातृ मृत्यु का प्रतिशत 17.47% था जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 17.75% तक पहुंच गया। हालांकि वर्ष 2024-25 के दौरान मातृ मृत्यु का प्रतिशत मामूली कमी के साथ 12.46% दर्ज किया गया है।
ये कदम उठा रही केंद्र व सूबा सरकार
राज्य सरकार ने प्रसव एएनएम व स्टाफ नर्स के 1,568 खाली पदों पर भर्ती करने का फैसला लिया है। वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने इसे हाल ही में मंजूरी दी है। फिलहाल प्रसव एएनएम के 2,000 स्वीकृत पदों में से 729 और स्टाफ नर्सों के 1896 स्वीकृत पदों में से 839 पद भरे जाएंगे। इसी तरह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत केंद्र सरकार भी प्रसवोत्तर रक्तस्राव से मातृ मृत्यु को रोकने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है जिसमें प्रसवोत्तर रक्तस्राव की रोकथाम के लिए स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। सभी अस्पतालों पर जरूरी दवाएं और प्रसवोत्तर रक्तस्राव से निपटने के लिए जरूरी उपकरण मुहैया करवाए जा रहे हैं।
प्रसवोत्तर रक्तस्राव से निपटने के लिए तय प्रोटोकॉल की सभी डॉक्टरों को पालना करनी चाहिए। गोल्डन आवर अहम होता है जिसमें मृत्यु के जोखिम को कम किया जा सकता है। रक्तस्राव को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाना जरूरी होता है। - मनीषा मैनी, स्त्री रोग विशेषज्ञ