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पंजाब के कपड़ा उद्योग पर दबाव: निर्यात में पांच फीसदी की गिरावट, देश में आठवें स्थान पर पहुंचा सूबा

राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Fri, 10 Apr 2026 02:30 PM IST
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सार

वर्ल्ड एमएसएमई फोरम के प्रधान बदिश जिंदल ने कहा कि अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा बाजार है लेकिन अभी तक कोई ठोस व्यापार समझौता नहीं हो पाया है। बांग्लादेश को जीरो ड्यूटी का लाभ मिलने से प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और कई कंपनियां वहां शिफ्ट हो रही हैं।

Pressure on Punjab Textile Industry 5% Decline in Exports State Slips to Eighth Position Nationally
Cloth market - फोटो : AdobeStock
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विस्तार

पंजाब के कपड़ा उद्योग पर संकट गहराता जा रहा है। वर्ष 2024-25 में राज्य के कपड़ा निर्यात में करीब 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। कपड़ा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 2023-24 में जहां 12,421 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था, वहीं 2024-25 में यह घटकर 11,820 करोड़ रह गया। राजस्थान ने निर्यात के मामले में पंजाब को पीछे छोड़ दिया है।

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रिपोर्ट बताती है कि 2021-22 में निर्यात 15,739 करोड़ तक पहुंच गया था जो 2020-21 के 9,718 करोड़ के मुकाबले बड़ी छलांग थी। इसके बाद निर्यात लगातार गिरता गया और 2022-23 में 12,043 करोड़ पर आ गया। मौजूदा स्थिति में पंजाब देश में कपड़ा निर्यात के मामले में आठवें स्थान पर पहुंच गया है।

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तमिलनाडु पहले स्थान पर

राजस्थान ने निर्यात के मामले में पंजाब को पीछे छोड़ दिया है। 2022-23 में 12,701 करोड़ के साथ राजस्थान आगे निकला और 2024-25 में 14,560 करोड़ का निर्यात दर्ज किया। देश में तमिलनाडु 67,863 करोड़ के साथ पहले स्थान पर है जबकि गुजरात 50,150 करोड़ के साथ दूसरे और हरियाणा 34,843 करोड़ के साथ आगे बना हुआ है। केंद्र सरकार पीएम मित्र पार्क, पीएलआई योजना और राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन जैसी योजनाओं के जरिए उद्योग को बढ़ावा दे रही है।

अमेरिका बाजार में अनिश्चितता, इंसेंटिव बढ़ाने की मांग

वर्ल्ड एमएसएमई फोरम के प्रधान बदिश जिंदल ने कहा कि अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा बाजार है लेकिन अभी तक कोई ठोस व्यापार समझौता नहीं हो पाया है। बांग्लादेश को जीरो ड्यूटी का लाभ मिलने से प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और कई कंपनियां वहां शिफ्ट हो रही हैं।

निटवेयर क्लब के चेयरमैन विनोद थापर ने कहा कि निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार को इंसेंटिव बढ़ाने होंगे। अन्य देशों की तुलना में यहां कम सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने प्रदेश में नए टेक्सटाइल पार्क बनाने की भी मांग की। उद्योग जगत का मानना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो निर्यात पर असर और गहरा सकता है।

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