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एसआईआर के घेरे में एक और पूर्व राजदूत: अब 75 साल के रमेश चंदर से मांगा सबूत, बेलारूस में रह चुके हैं राजदूत
Tue, 25 Aug 2026 10:21 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
Published by: Nivedita
Updated Tue, 25 Aug 2026 10:21 AM IST
सार
रमेश चंदर ने विदेश सेवा में रहते हुए भारत का प्रतिनिधित्व कई महत्वपूर्ण देशों में किया। वह बेलारूस में भारत के राजदूत रहे। इसके अलावा जापान में भारत के काउंसलर, ब्रिटेन के एडिनबर्ग में भारत के महावाणिज्यदूत और प्राग स्थित भारतीय दूतावास में मंत्री के पद पर भी रहे।
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पूर्व राजदूत से मांगे नागरिकता के प्रमाण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब में एसआईआर के घेरे में एक और पूर्व राजदूत आ गए हैं। 75 साल के पूर्व राजनयिक रमेश चंदर को जालंधर में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान अपनी पात्रता और नागरिकता से जुड़े अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। चंदर बेलारूस में भारत के राजदूत रह चुके हैं और जापान, ब्रिटेन तथा चेक गणराज्य में भी भारत के महत्वपूर्ण राजनयिक पदों पर सेवाएं दे चुके हैं।
देओल नगर निवासी चंदर को 27 अगस्त को लाडोवाली रोड स्थित निर्वाचन कार्यालय में अतिरिक्त दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा गया है। उनका कहना है कि वह अपना आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज पहले ही बूथ स्तरीय अधिकारी को दे चुके हैं। इसके बावजूद उनसे नागरिकता साबित करने के लिए और प्रमाण मांगे गए हैं। चंदर ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने जालंधर में लगातार चुनावों में मतदान किया है। उन्होंने 2007, 2012, 2014, 2017, 2022 और 2024 के चुनावों में मतदान किया। इसके बावजूद अब उनसे मतदाता सूची में बने रहने के लिए नागरिकता और निवास से जुड़े अतिरिक्त प्रमाण मांगे जा रहे हैं।
जालंधर में ही पैदा हुए चंदर
चंदर के लिए यह स्थिति इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि उनका जन्म और पालन-पोषण जालंधर में हुआ। उच्च शिक्षा भी उन्होंने जालंधर से हासिल की और दिसंबर 2010 में सेवानिवृत्ति के बाद पिछले करीब 15 वर्षों से जालंधर में ही रह रहे हैं।
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बेलारूस स्थित भारतीय दूतावास के अभिलेखों के अनुसार चंदर ने 16 फरवरी 2009 से 31 दिसंबर 2010 तक वहां भारत के राजदूत के रूप में सेवाएं दीं। लेकिन अब वही पूर्व राजदूत अपनी मतदाता पहचान बनाए रखने के लिए नागरिकता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में हैं।
चंदर के मुताबिक पंजाब में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण में वर्ष 2003 की मतदाता सूची को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। लेकिन वर्ष 2003 में वह जापान में भारत की राजनयिक जिम्मेदारी निभा रहे थे। ऐसे में उनका नाम और विवरण उस समय की स्थानीय मतदाता सूची में नहीं होना स्वाभाविक है।
उनका कहना है कि इसी वजह से उनके वर्तमान दस्तावेजों और पुराने अभिलेखों के बीच मेल नहीं बैठ रहा है। चंदर ने कहा कि उन्होंने पूर्व राजदूत नवदीप सूरी के मामले के बारे में पढ़ा था। लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि कुछ ही समय बाद वह खुद ऐसी ही स्थिति में खड़े होंगे।
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देओल नगर निवासी चंदर को 27 अगस्त को लाडोवाली रोड स्थित निर्वाचन कार्यालय में अतिरिक्त दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा गया है। उनका कहना है कि वह अपना आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज पहले ही बूथ स्तरीय अधिकारी को दे चुके हैं। इसके बावजूद उनसे नागरिकता साबित करने के लिए और प्रमाण मांगे गए हैं। चंदर ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने जालंधर में लगातार चुनावों में मतदान किया है। उन्होंने 2007, 2012, 2014, 2017, 2022 और 2024 के चुनावों में मतदान किया। इसके बावजूद अब उनसे मतदाता सूची में बने रहने के लिए नागरिकता और निवास से जुड़े अतिरिक्त प्रमाण मांगे जा रहे हैं।
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जालंधर में ही पैदा हुए चंदर
चंदर के लिए यह स्थिति इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि उनका जन्म और पालन-पोषण जालंधर में हुआ। उच्च शिक्षा भी उन्होंने जालंधर से हासिल की और दिसंबर 2010 में सेवानिवृत्ति के बाद पिछले करीब 15 वर्षों से जालंधर में ही रह रहे हैं।
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बेलारूस स्थित भारतीय दूतावास के अभिलेखों के अनुसार चंदर ने 16 फरवरी 2009 से 31 दिसंबर 2010 तक वहां भारत के राजदूत के रूप में सेवाएं दीं। लेकिन अब वही पूर्व राजदूत अपनी मतदाता पहचान बनाए रखने के लिए नागरिकता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में हैं।
चंदर के मुताबिक पंजाब में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण में वर्ष 2003 की मतदाता सूची को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। लेकिन वर्ष 2003 में वह जापान में भारत की राजनयिक जिम्मेदारी निभा रहे थे। ऐसे में उनका नाम और विवरण उस समय की स्थानीय मतदाता सूची में नहीं होना स्वाभाविक है।
उनका कहना है कि इसी वजह से उनके वर्तमान दस्तावेजों और पुराने अभिलेखों के बीच मेल नहीं बैठ रहा है। चंदर ने कहा कि उन्होंने पूर्व राजदूत नवदीप सूरी के मामले के बारे में पढ़ा था। लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि कुछ ही समय बाद वह खुद ऐसी ही स्थिति में खड़े होंगे।
पूर्व राजदूत नवदीप सूरी से भी मांगा गया है प्रमाण
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रमेश चंदर ऐसे दूसरे पूर्व भारतीय राजदूत हैं, जिन्हें विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान नागरिकता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देने को कहा गया है। इससे पहले पूर्व भारतीय राजदूत नवदीप सूरी को भी इसी तरह का नोटिस मिला था। सूरी अमृतसर में रहते हैं और पंजाबी के प्रसिद्ध उपन्यासकार नानक सिंह के पोते हैं।
सूरी ने अपने अनुभव को सार्वजनिक करते हुए सवाल उठाया था कि जब विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व राजदूत को अपनी नागरिकता साबित करने की प्रक्रिया कठिन लग सकती है, तो सामान्य नागरिकों की स्थिति क्या होगी। सूरी के मुताबिक 2003 के अभिलेखों में उनके विवरण से संबंधित विसंगतियां मिलने के बाद उनसे दस्तावेज मांगे गए। उनका कहना था कि वह वर्ष 2003 में भारत में मौजूद ही नहीं थे, बल्कि लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में तैनात थे।
जालंधर के उपायुक्त वरजीत वालिया ने पूरे मामले को नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं का पंजीकरण नहीं हुआ है या जिनके कानूनी विवरण में कोई विसंगति है, उनके दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालय बुलाने के बजाय बूथ स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यक दस्तावेज घर से ही एकत्र किए जाएं।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रमेश चंदर ऐसे दूसरे पूर्व भारतीय राजदूत हैं, जिन्हें विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान नागरिकता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देने को कहा गया है। इससे पहले पूर्व भारतीय राजदूत नवदीप सूरी को भी इसी तरह का नोटिस मिला था। सूरी अमृतसर में रहते हैं और पंजाबी के प्रसिद्ध उपन्यासकार नानक सिंह के पोते हैं।
सूरी ने अपने अनुभव को सार्वजनिक करते हुए सवाल उठाया था कि जब विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व राजदूत को अपनी नागरिकता साबित करने की प्रक्रिया कठिन लग सकती है, तो सामान्य नागरिकों की स्थिति क्या होगी। सूरी के मुताबिक 2003 के अभिलेखों में उनके विवरण से संबंधित विसंगतियां मिलने के बाद उनसे दस्तावेज मांगे गए। उनका कहना था कि वह वर्ष 2003 में भारत में मौजूद ही नहीं थे, बल्कि लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में तैनात थे।
जालंधर के उपायुक्त वरजीत वालिया ने पूरे मामले को नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं का पंजीकरण नहीं हुआ है या जिनके कानूनी विवरण में कोई विसंगति है, उनके दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालय बुलाने के बजाय बूथ स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यक दस्तावेज घर से ही एकत्र किए जाएं।