{"_id":"6aa8f0930736805a29055cd8","slug":"punjab-politics-2026-shiromani-akali-dal-bjp-alliance-amid-punjab-assembly-election-2026-09-15","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"राजनीति: अकाली दल ने दिए नजदीक आने के तीन इशारे, भाजपा का अकेले लड़ने का संदेश; पर्दे के पीछे बातचीत की चर्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजनीति: अकाली दल ने दिए नजदीक आने के तीन इशारे, भाजपा का अकेले लड़ने का संदेश; पर्दे के पीछे बातचीत की चर्चा
Tue, 15 Sep 2026 01:05 PM IST
Sharukh Khan
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 15 Sep 2026 01:05 PM IST
सार
पंजाब की राजनीति में शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के रिश्तों को लेकर इन दिनों एक दिलचस्प तस्वीर उभर रही है। करीब छह साल पहले कृषि कानूनों के मुद्दे पर भाजपा से गठबंधन तोड़ने वाला अकाली दल पिछले चार वर्षों में तीन अलग-अलग मौकों पर भाजपा के साथ खड़े होने के संकेत दे चुका है, लेकिन भाजपा की ओर से सार्वजनिक रूप से अभी तक ऐसा कोई बराबर का राजनीतिक कदम सामने नहीं आया है।
विज्ञापन
Punjab Politics 2026
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब की राजनीति में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के रिश्तों को लेकर एक बार फिर नए संकेत दिखाई दे रहे हैं। करीब छह साल पहले कृषि कानूनों के मुद्दे पर भाजपा से गठबंधन तोड़ने वाला अकाली दल पिछले चार वर्षों में तीन अलग-अलग मौकों पर भाजपा के साथ खड़े होने के संकेत दे चुका है।
इसके बावजूद भाजपा की ओर से अब तक ऐसा कोई समान राजनीतिक कदम सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आया है। भाजपा लगातार पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने और अपने दम पर सरकार बनाने की तैयारी का संदेश दे रही है।
दोनों दलों के बीच पर्दे के पीछे बातचीत की चर्चाएं
अकाली दल के तीन सकारात्मक संकेतों के बावजूद भाजपा का सार्वजनिक रुख नहीं बदला है। भाजपा सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी का संदेश दे रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इसके बावजूद भाजपा की ओर से अब तक ऐसा कोई समान राजनीतिक कदम सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आया है। भाजपा लगातार पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने और अपने दम पर सरकार बनाने की तैयारी का संदेश दे रही है।
विज्ञापन
दोनों दलों के बीच पर्दे के पीछे बातचीत की चर्चाएं
अकाली दल के तीन सकारात्मक संकेतों के बावजूद भाजपा का सार्वजनिक रुख नहीं बदला है। भाजपा सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी का संदेश दे रही है।
विज्ञापन
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव संगठन बीएल संतोष ने अगस्त में पंजाब दौरे के दौरान सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ने और अपने दम पर सरकार बनाने की तैयारी का संकेत दिया था। 31 अगस्त को भाजपा के पंजाब संगठन प्रभारी सतीश पूनिया ने भी इसी रुख को दोहराया।
हालांकि राजनीतिक गलियारों में दोनों दलों के बीच पर्दे के पीछे बातचीत की चर्चाएं हैं। इसलिए गठबंधन की सभी संभावनाएं खत्म होने की बात कहना जल्दबाजी होगी। फिलहाल तस्वीर यही है कि अकाली दल संबंध सुधारने की दिशा में लगातार संकेत दे रहा है, जबकि भाजपा संगठन विस्तार और 117 सीटें, अकेले चुनाव की रणनीति पर कायम है।
पहला सकारात्मक संकेत
अकाली दल की ओर से पहला बड़ा सकारात्मक संकेत जुलाई 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में सामने आया। सितंबर 2020 में कृषि कानूनों के विरोध के बीच भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन से अलग होने के करीब दो वर्ष बाद अकाली दल ने एनडीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन किया।
अकाली दल की ओर से पहला बड़ा सकारात्मक संकेत जुलाई 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में सामने आया। सितंबर 2020 में कृषि कानूनों के विरोध के बीच भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन से अलग होने के करीब दो वर्ष बाद अकाली दल ने एनडीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन किया।
केंद्र सरकार के रुख का समर्थन
महिला आरक्षण पर भी केंद्र के साथ अगस्त 2026 में अकाली दल ने महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने की मांग करते हुए केंद्र सरकार के रुख का समर्थन किया।
महिला आरक्षण पर भी केंद्र के साथ अगस्त 2026 में अकाली दल ने महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने की मांग करते हुए केंद्र सरकार के रुख का समर्थन किया।
पार्टी ने परिप्रेक्ष्य के प्रस्ताव पर भी सहमति जताई, जिसमें सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ाने की बात कही गई है। खास बात यह रही कि यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात के बाद सामने आया।
छात्र राजनीति में बिना शर्त समर्थन
31 अगस्त 2026, को पंजाब विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में अकाली दल के छात्र संगठन स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसओआई) ने भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अंकित बिढान को बिना शर्त समर्थन देकर तीसरा संकेत दिया। एसओआई का उम्मीदवार मैदान से बाहर होने के बाद संगठन ने अंतिम समय में एबीवीपी उम्मीदवार के समर्थन का एलान किया। अंकित बिढान ने 512 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।
31 अगस्त 2026, को पंजाब विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में अकाली दल के छात्र संगठन स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसओआई) ने भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अंकित बिढान को बिना शर्त समर्थन देकर तीसरा संकेत दिया। एसओआई का उम्मीदवार मैदान से बाहर होने के बाद संगठन ने अंतिम समय में एबीवीपी उम्मीदवार के समर्थन का एलान किया। अंकित बिढान ने 512 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।