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Patiala News: सीबीआई के दोहरे रवैये पर हाईकोर्ट सख्त, जांच से बचने की प्रवृत्ति पर उठाए सवाल

Fri, 19 Dec 2025 07:38 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Dec 2025 07:38 PM IST
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The High Court was critical of the CBI's double standards and questioned its tendency to avoid conducting investigations.
-फाजिल्का के जलालाबाद थाने में दर्ज एनडीपीएस मामले की जांच अब एसआईटी को सौंपी गई
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अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई के दोहरे रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी का रुख अक्सर उलटफेर और निराशाजनक रहता है। कोर्ट ने कहा कि एक ओर तो सीबीआई राज्यों की ओर से अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति किए जाने के बावजूद जांच का अधिकार जताती है जबकि जब अदालतें मामले की जांच सौंपने की बात करती हैं तो एजेंसी उदासीन और गैर-प्रतिबद्ध दिखाई देती है।
जस्टिस विनोद एस भारद्वाज ने सीबीआई के व्यवहार को विशिष्ट अंदाज करार देते हुए कहा कि एजेंसी ने जांच की जिम्मेदारी लेने में पूरी तरह से अरुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि सीबीआई की तरफ से जांच में संसाधनों की कमी और आगे कोई जांच न करने की अनिच्छा जताना हैरान करने वाला था। अदालत ने इस स्थिति को लेकर एजेंसी के अधिकारियों के आत्ममंथन की आवश्यकता पर बल दिया।
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फाजिल्का जिले के जलालाबाद सदर थाने में एनडीपीएस मामले की जांच में पंजाब पुलिस की कार्यशैली और निगरानी पर हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस केस की जांच अब विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपने का आदेश दिया। एसआईटी को नीलाभ किशोर, आईपीएस, एडीजीपी, एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स, पंजाब की निगरानी में जांच करनी होगी। कोर्ट ने यह भी बताया कि जांच के दौरान कई खामियां पाई गईं, और राज्य के वकील इन पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। अदालत ने कहा कि जब आरोपियों के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है, तो यह कहना कि महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच अभी बाकी है, विश्वास योग्य नहीं है।
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झूठे आरोपों में फंसाया गया
इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्होंने एक पुराने मामले में नाबालिग की अवैध हिरासत और पुलिस ज्यादतियों का विरोध किया जिसके बाद उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया। साथ ही सीसीटीवी फुटेज की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एसआईटी से जांच कराए जाने का आदेश दिया है।
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