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“दर्द, गम, डर जो भी है बस तेरे अंदर है..
खुद के बनाए पिंजरे से निकलकर देख,
तू भी एक सिकंदर है।”
शुभ प्रभात
मोहब्बत के भी कुछ अंदाज होते है,
जागती आँखो के भी कुछ ख्वाब होते है,
ज़रूरी नही के गम मे ही आँसू निकले,
मुस्कुराती आँखो मे भी सैलाब होते है।
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