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जो रिश्ता हमको रूला दें,
उससे गहरा रिश्ता कोई नहीं,
जो रिश्ता रोते हुए छोड़ दें,
उससे कमजोर रिश्ता कोई नहीं,
बूरे वक्त में भी जो रिश्ता निभाए,
उससे बड़ कर रिश्ता कोई नहीं।
मोहब्बत के भी कुछ अंदाज होते है,
जागती आँखो के भी कुछ ख्वाब होते है,
ज़रूरी नही के गम मे ही आँसू निकले,
मुस्कुराती आँखो मे भी सैलाब होते है।
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