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खामोश रहना ही बेहतर है,
लफ्जों के अक्सर लोग गलत मतलब निकाल लेते है।
मोहब्बत के भी कुछ अंदाज होते है,
जागती आँखो के भी कुछ ख्वाब होते है,
ज़रूरी नही के गम मे ही आँसू निकले,
मुस्कुराती आँखो मे भी सैलाब होते है।
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