राजस्थान: अरुणाचल में लापता अग्निवीर का 80 दिन बाद मिला पार्थिव शरीर, रक्षाबंधन पर घर आने का किया था वादा
अरुणाचल प्रदेश के दिबांग घाटी जिले के अनिनी स्थित पशुपानी क्षेत्र में 14 अगस्त को बादल फटने के बाद लापता हुए अलवर के 20 वर्षीय अग्निवीर समुद्र सिंह गुर्जर का पार्थिव शरीर 80 दिन बाद बरामद हुआ है। भारतीय सेना और आईटीबीपी ने दुर्गम इलाके में संयुक्त रूप से खोज अभियान चलाया था।
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अरुणाचल प्रदेश के दिबांग घाटी जिले के अनिनी स्थित पशुपानी क्षेत्र में बादल फटने के बाद लापता हुए अलवर के 20 वर्षीय अग्निवीर समुद्र सिंह गुर्जर का पार्थिव शरीर 80 दिन बाद बरामद हुआ है। 14 अगस्त को आई भीषण बाढ़ में वह सेना के चार अन्य जवानों के साथ लापता हो गए थे। भारतीय सेना और आईटीबीपी के संयुक्त खोज अभियान के बाद उनका पार्थिव शरीर मिला। डीएनए जांच से पहचान की पुष्टि होने के बाद 2 नवंबर को असम के डिब्रूगढ़ में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अब उनकी अस्थियां परिजनों को सौंप दी गई हैं। 5 नवंबर को अलवर स्थित उनके पैतृक गांव केसरपुर में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ अस्थियों का विसर्जन किया जाएगा।
80 दिन तक दुर्गम इलाके में चला खोज अभियान
14 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश के दिबांग घाटी क्षेत्र में अचानक आई भीषण बाढ़ की चपेट में भारतीय सेना के सात जवान आ गए थे। सेना ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया और दो जवानों को सुरक्षित निकाल लिया, लेकिन अग्निवीर समुद्र सिंह सहित पांच जवान बाढ़ के पानी में बहकर लापता हो गए थे। इसके बाद भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने संयुक्त रूप से दुर्गम इलाके में व्यापक खोज अभियान चलाया। करीब 80 दिन तक चले इस कठिन अभियान के बाद समुद्र सिंह का पार्थिव शरीर बरामद किया जा सका। डीएनए जांच के जरिए उनकी पहचान की पुष्टि हुई।
2 नवंबर को डिब्रूगढ़ में सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद उनकी अस्थियां परिजनों को सौंप दी गईं। अब उनकी अस्थियां अलवर लाई जा रही हैं। बुधवार रात तक अस्थियां ईटाराणा सैन्य छावनी पहुंचेंगी। यहां से उन्हें पैतृक गांव केसरपुर ले जाया जाएगा, जहां 5 नवंबर को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अस्थियों का विसर्जन किया जाएगा।
दादा से प्रेरणा लेकर सेना में हुए थे भर्ती
अलवर के केसरपुर गांव निवासी 20 वर्षीय समुद्र सिंह गुर्जर का परिवार पीढ़ियों से देशसेवा से जुड़ा रहा है। उनके दादा पलटूराम भारतीय सेना में हवलदार के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। दादा को सेना में सेवा करते देखकर समुद्र सिंह ने भी देश की रक्षा करने का संकल्प लिया था। वर्ष 2024 में अग्निवीर योजना के तहत उनका चयन भारतीय सेना में हुआ। जबलपुर में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें अरुणाचल प्रदेश के दिबांग जिले में पहली तैनाती मिली थी। समुद्र सिंह परिवार के इकलौते बेटे थे और अविवाहित थे। उनकी दो बड़ी बहनें हैं, जिनका विवाह हो चुका है। उनके पिता गांव में खेती करते हैं। वहीं, उनके ताऊ के बेटे प्रहलाद गुर्जर भी प्रयागराज में सेना में सेवाएं दे रहे हैं।
रक्षाबंधन पर घर आने और पिता का इलाज कराने का किया था वादा
समुद्र सिंह के लापता होने से ठीक पहले उनकी अपने पिता से फोन पर बात हुई थी। इस बातचीत में उन्होंने भावुक होकर बताया था कि उन्होंने छुट्टी के लिए आवेदन कर दिया है और रक्षाबंधन पर घर आएंगे। उन्होंने घर लौटकर पिता का इलाज कराने की बात भी कही थी। रक्षाबंधन पर बेटे के घर लौटने की राह देख रहे परिवार के लिए यह बातचीत अब जीवनभर की याद बन गई है। मई में आखिरी बार छुट्टी बिताकर समुद्र सिंह ड्यूटी पर लौटे थे। इसके बाद 14 अगस्त को बाढ़ की चपेट में आने से वह लापता हो गए। देशसेवा के प्रति उनका समर्पण और अदम्य साहस पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गया है।