गहलोत के इशारे से ब्यूरोक्रेसी में क्यों मची खलबली?: बोले-सीएमओ के अफसर बना रहे दबाव
निकाय चुनाव के बाद बोर्ड गठन पर गहलोत के आरोपों से सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अफसरों का भाजपा के लिए काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि CMO से एक अफसर नगरीय निकायों में भाजपा का बोर्ड बनाने के लिए दबाव बना रहा है।
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राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों के बाद बोर्ड गठन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि भाजपा बोर्ड बनाने के लिए पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल कर रही है। गहलोत ने मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से कलेक्टरों और एसडीएम पर दबाव बनाए जाने का भी दावा किया है।
गहलोत के मुताबिक, CMO से एक IAS अधिकारी कलेक्टरों और एसडीएम को यह निर्देश दे रहा है कि किसी भी तरह भाजपा का बोर्ड बनाया जाए। हालांकि, अपने बयान में गहलोत ने उस अधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया। इससे सवाल उठ रहा है कि आखिर उनका इशारा CMO में तैनात किस IAS अधिकारी की ओर है।
इससे पहले भी गहलोत निकाय चुनाव के दौरान सरकार पर कलेक्टरों और एसपी पर दबाव बनाने का आरोप लगा चुके हैं। अगस्त में उन्होंने दावा किया था कि अलग-अलग जिलों के कलेक्टरों और एसपी को जयपुर बुलाकर भाजपा के पक्ष में काम करने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि उनके पास इस संबंध में महत्वपूर्ण इनपुट हैं।
मेयर-चेयरमैन के लिए जोड़तोड़ पर गहलोत का निशाना
निकाय चुनाव के नतीजों के बाद कई नगर निगमों, नगर परिषदों और नगरपालिकाओं में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में निर्दलीय और दूसरे दलों के पार्षद बोर्ड गठन के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं।
गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा मेयर और चेयरमैन बनाने के लिए निर्दलीय और दूसरे दलों के पार्षदों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने करोड़ों रुपये की रिश्वत दिए जाने का भी आरोप लगाया।
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पुलिस के इस्तेमाल का भी लगाया आरोप
गहलोत ने आरोप लगाया कि जो पार्षद भाजपा के पक्ष में जाने को तैयार नहीं हैं, उन्हें पुलिस के जरिए डराया-धमकाया जा रहा है। कल बुधवार को भी गहलोत ने मंडावा, केपरेन और नीमराना समेत कुछ मामलों का जिक्र करते हुए पुलिस और प्रशासनिक हस्तक्षेप के गंभीर आरोप लगाए थे। इससे पहले गहलोत यह भी कह चुके हैं कि चुनावों में गड़ब
इससे पहले 14 सितंबर को भी गहलोत ने आरोप लगाया था कि भाजपा मेयर बनाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है और जोधपुर तथा अलवर में निर्दलीय व कांग्रेस पार्षदों को डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है।
गहलोत ने उठाया 'वसूली' का सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि अगर कोई व्यक्ति करोड़ों रुपये खर्च करके मेयर या चेयरमैन बनता है तो उसके सामने अपनी लगाई रकम वापस हासिल करने का सवाल खड़ा होगा। गहलोत ने इसी तर्क के आधार पर आरोप लगाया कि इसका असर आगे शहर के विकास कार्यों पर पड़ेगा और जनता को सड़क, नाली, पट्टे तथा दूसरे कामों के लिए भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ सकता है। गहलोत ने इसे केवल सत्ता की राजनीति का मामला नहीं बताते हुए जनता से सतर्क रहने की अपील की।
21 सितंबर को तय होगा मेयर का खेल
राजस्थान के 10 नगर निगमों में मेयर और अन्य निकायों में चेयरमैन के चुनाव 21 सितंबर को होने हैं। 22 सितंबर को उप महापौर और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव होंगे। कई निकायों में बहुमत का आंकड़ा स्पष्ट नहीं होने के कारण निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि गहलोत जिस CMO अधिकारी का जिक्र कर रहे हैं, वह कौन है और उनके आरोपों के पीछे क्या आधार है? फिलहाल गहलोत ने अधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।