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खेजड़ी समेत पेड़ों की कटाई पर लगेगी रोक? विधानसभा में आएगा ट्री प्रोटेक्शन एक्ट, चर्चा में आई भाटी की पहल

Fri, 14 Aug 2026 11:23 AM IST
बाड़मेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर Published by: बाड़मेर ब्यूरो Updated Fri, 14 Aug 2026 11:23 AM IST
सार

राजस्थान सरकार आगामी विधानसभा सत्र में ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून में खेजड़ी समेत महत्वपूर्ण पेड़ों की कटाई पर रोक, अनुमति प्रक्रिया और दंड का प्रावधान हो सकता है। खेजड़ी संरक्षण के मुद्दे पर विधायक रविंद्र सिंह भाटी पहले भी प्राइवेट मेंबर बिल ला चुके हैं।

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Rajasthan Big Green Move Tree Protection Act Set for Assembly Ravindra Singh Bhati Push in Focus
बाड़मेर विधायक रविंद्र सिंह भाटी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राजस्थान में खेजड़ी समेत प्रदेश के महत्वपूर्ण पेड़-पौधों के संरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रहे संघर्ष को अब एक बड़ी कानूनी पहल का रूप मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने आगामी विधानसभा सत्र में ‘ट्री प्रोटेक्शन एक्ट’ लाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। सरकार की ओर से प्रस्तावित कानून के प्रारूप को मंजूरी दिए जाने के बाद अब राजस्थान में पेड़ों के संरक्षण को लेकर एक व्यापक कानूनी व्यवस्था बनने की उम्मीद मजबूत हुई है।
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इस पूरे घटनाक्रम में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी पिछले लंबे समय से खेजड़ी और राजस्थान के पारंपरिक पेड़-पौधों के संरक्षण का मुद्दा लगातार उठाते रहे हैं। उन्होंने केवल सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया तक अपनी आवाज सीमित नहीं रखी, बल्कि पिछले विधानसभा सत्र में खेजड़ी के संरक्षण को लेकर सदन में प्राइवेट मेंबर बिल भी प्रस्तुत किया था।
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भाटी की ओर से विधानसभा में रखे गए इस मुद्दे का केंद्र केवल खेजड़ी के पेड़ को बचाना नहीं, बल्कि राजस्थान की विशिष्ट पारिस्थितिकी, मरुस्थलीय जीवनशैली और सदियों पुरानी पर्यावरणीय परंपराओं को संरक्षित करना रहा है। उन्होंने सदन में खेजड़ी, ओरान और गौचर भूमि के संरक्षण सहित पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर रोक लगाने की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया।
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सदन से सड़क तक लगातार उठती रही आवाज
खेजड़ी संरक्षण का मुद्दा राजस्थान में लंबे समय से बिश्नोई समाज, साधु-संतों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों के आंदोलनों का हिस्सा रहा है। खेजड़ी को बचाने के लिए चल रहे इन प्रयासों के बीच रविंद्र सिंह भाटी भी लगातार इस मांग के समर्थन में सक्रिय रहे। विधानसभा में आवाज उठाने के साथ-साथ उन्होंने सोशल मीडिया अभियानों और विभिन्न आंदोलनों के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया। विधानसभा के पिछले सत्र में खेजड़ी संरक्षण के लिए प्राइवेट मेंबर बिल प्रस्तुत करना इसी निरंतर प्रयास की महत्वपूर्ण कड़ी रहा।

खेजड़ी संरक्षण को लेकर हाल के महीनों में राजस्थान में आंदोलन भी तेज हुए। बीकानेर सहित कई क्षेत्रों में साधु-संतों, बिश्नोई समाज और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने व्यापक आंदोलन चलाकर पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने के लिए मजबूत कानून की मांग की।

अब व्यापक कानून के रूप में सामने आएगी मांग
राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित ट्री प्रोटेक्शन एक्ट में खेजड़ी के साथ राजस्थान के अन्य महत्वपूर्ण पेड़-पौधों को भी संरक्षण के दायरे में लाने की बात सामने आई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अधिसूचित पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध, पेड़ काटने या गिराने की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई, सक्षम अधिकारी से अनुमति लेने की व्यवस्था तथा अधिक संख्या में पौधे लगाने और उन्हें विकसित करने जैसे प्रावधान प्रस्तावित हैं। प्रस्तावित कानून में नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए जुर्माने और सजा का प्रावधान किए जाने की बात भी सामने आई है। वहीं, जहां किसी कारणवश पेड़ काटना आवश्यक हो, वहां सक्षम अधिकारी से अनुमति लेना और निर्धारित शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था राजस्थान में पेड़ों के संरक्षण को महज प्रशासनिक आदेशों तक सीमित रखने के बजाय उसे कानूनी संरक्षण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

हाईकोर्ट की सख्ती और सरकार की पहल ने बढ़ाई उम्मीद
खेजड़ी संरक्षण को लेकर राजस्थान में न्यायिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने खेजड़ी के पेड़ों को बिना पूर्व अनुमति काटे जाने पर रोक लगाते हुए संरक्षण के लिए कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता को रेखांकित किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने पेड़ों के संरक्षण के लिए कानून तैयार करने की दिशा में समिति गठित की थी। ऐसे में सरकार द्वारा आगामी विधानसभा सत्र में ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लाने की तैयारी को खेजड़ी संरक्षण की लंबे समय से चली आ रही मांग की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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भाटी के प्राइवेट मेंबर बिल से सरकार के प्रस्ताव तक
खेजड़ी संरक्षण के मुद्दे पर भाटी की पहल को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सरकार के स्तर पर व्यापक कानून लाने से पहले विधानसभा के भीतर उन्होंने स्वयं प्राइवेट मेंबर बिल के माध्यम से इस विषय को विधायी एजेंडे का हिस्सा बनाया था। एक विधायक के रूप में किसी मुद्दे को सदन में उठाना और उसे कानून के रूप में सामने लाने का प्रयास करना राजनीतिक विमर्श के साथ-साथ विधायी प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण हस्तक्षेप माना जाता है। भाटी के मामले में खेजड़ी संरक्षण का मुद्दा विधानसभा से लेकर जनआंदोलन तक लगातार चर्चा में बना रहा। अब सरकार के प्रस्तावित कानून से उम्मीद है कि राजस्थान के खेजड़ी समेत अन्य अमूल्य वृक्षों को कटाई से बचाने के लिए स्पष्ट नियम, अनुमति प्रक्रिया और दंडात्मक प्रावधानों वाली एक प्रभावी व्यवस्था अस्तित्व में आएगी।

खेजड़ी केवल राजस्थान का राज्य वृक्ष नहीं, बल्कि थार के पर्यावरण, पशुपालन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा पेड़ है। ऐसे में इसके संरक्षण के लिए कानून का बनना राजस्थान की पर्यावरणीय विरासत की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।


 
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