Panchayat Elections: अवमानना नोटिस के जवाब में आयोग ने की तैयारी, सरकार भी समय सीमा बढ़ाने जाएगी हाईकोर्ट
निकाय और पंचायत चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट के अवमानना नोटिस के बाद राज्य निर्वाचन आयोग जवाब की तैयारी में जुटा है। वहीं सरकार समयसीमा बढ़ाने के लिए इसी सप्ताह हाईकोर्ट में आवेदन दाखिल करने की तैयारी कर रही है।
विस्तार
पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव 15 अप्रैल तक नहीं कराने के मुद्दे पर हाईकोर्ट के अवमानना नोटिस के बाद राज्य निर्वाचन आयोग सक्रिय हो गया है। आयोग अब चुनाव कार्यक्रम में हुई देरी को लेकर अपना पक्ष तैयार कर रहा है। जानकारी के अनुसार आयोग अपने जवाब में राज्य सरकार के साथ हुए पत्राचार और समय पर जरूरी सूचना नहीं मिलने को प्रमुख कारण बताकर कोर्ट के समक्ष इसे अपने पक्ष के रूप में रखने की तैयारी कर रहा है। आयोग को हाईकोर्ट ने 4 सप्ताह के भीतर अपना जवाब पेश करने के लिए कहा है।
सूत्रों के अनुसार आयोग ने मार्च के पहले सप्ताह में ही चुनाव की घोषणा की पूरी तैयारी कर ली थी लेकिन राज्य सरकार से आवश्यक सूचनाएं नहीं मिलने के चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। वहीं एक अहम जानकारी यह भी आई है कि राज्य सरकार पंचायत व निकाय चुनाव की समय सीमा बढ़ाने के लिए इस सप्ताह हाईकोर्ट में आवेदन दाखिल करने की तैयारी कर चुकी है।
गौतरलब है कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लिखित पत्र दिया था कि राजस्थान में 15 अप्रैल तक निकाय चुनाव करवा लिए जाएंगे लेकिन अब इस समय सीमा में चुनाव होते संभव नहीं लग रहे हैं।
दूसरी तरफ राज्य निर्वाचन आयोग इस मामले में हाईकोर्ट की अवमानना में फंसा हुआ है। पंचायती राज संस्थाओं का परिसीमन 31 दिसंबर 2025 को पूरा होने के तुरंत बाद आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्यक्रम जारी किया था और 25 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई थी। इसके बाद राज्य सरकार को एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षण तय कर आयोग को सूचित करना था, ताकि चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जा सके लेकिन इसमें देरी के कारण पूरा शेड्यूल प्रभावित हुआ।
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नगरीय निकायों के मामले में स्थिति और जटिल रही। आयोग ने 19 और 24 दिसंबर, 2025 को पत्र लिखकर परिसीमन और चुनाव की स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अंततः 20 फरवरी 2026 को 196 निकायों के लिए एकतरफा मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम जारी करना पड़ा।
आयोग ने राज्य सरकार को कब-कब लिखे पत्र
पंचायती राज चुनाव:
- 31 दिसंबर, 2025: परिसीमन पूर्ण, मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम घोषित
- 25 फरवरी, 2026: अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित
- 9 मार्च, 2026: आयोग ने पंचायती राज सचिव को आरक्षण सूचना के लिए पत्र लिखा
- 31 मार्च, 2026: पंचायती राज विभाग का जवाब, प्रक्रिया जारी बताई
नगरीय निकाय चुनाव:
- 19 दिसंबर, 2025: स्वायत शासन विभाग को पहला पत्र परिसीमन की जानकारी के लिए
- 24 दिसंबर, 2025: दूसरा पत्र, स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह
- 31 दिसंबर, 2025: जवाब नहीं मिलने पर केवल पंचायतों का मतदाता सूची कार्यक्रम जारी
- 6 जनवरी, 2026: तीसरा पत्र
- 20 जनवरी, 2026: चौथा पत्र
- 27 जनवरी, 2026: पांचवां पत्र
- 3 फरवरी, 2026: छठा पत्र, तीन दिन में जवाब की चेतावनी
- 20 फरवरी, 2026: 196 निकायों के लिए एकतरफा पुनरीक्षण कार्यक्रम जारी
- 19 मार्च, 2026: 113 निकायों पर स्थिति स्पष्ट
- 24 मार्च, 2026: 113 निकायों के लिए अलग पुनरीक्षण कार्यक्रम जारी
गहलोत ने बताया संवैधानिक संकट
इधर कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर लगातार सरकार को घेर रही है। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने बुधवार को इस संबंध में बयान जारी किया। गहलोत ने कहा कि बीजेपी वन स्टेट, वन इलेक्शन जैसे बहानों के पीछे छिपकर चुनावों को टालने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की अलोकतांत्रिक सोच के कारण राजस्थान में संवैधानिक संकट गहराता जा रहा है। पंचायतों और नगरीय निकायों में एक वर्ष से अधिक समय से चुनाव नहीं कराए जाना और उनकी जगह सरकारी प्रशासकों की नियुक्ति, यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार है।
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