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Barmer News: सास-ससुर ने कहा- काम हम करेंगे, तुम पढ़ाई करो; बहू ने बनकर दिखा दिया जज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
Published by: बाड़मेर ब्यूरो
Updated Fri, 13 Mar 2026 07:48 PM IST
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सार
Barmer News: बाड़मेर के जालीपा गांव की बहू दीपू कंवर ने तीसरे प्रयास में गुजरात न्यायिक सेवा परीक्षा पास कर जज बनने का सपना पूरा किया। ससुराल वालों ने उन्हें घरेलू काम से दूर रखकर पढ़ाई के लिए पूरा सहयोग दिया।
दीपू कंवर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सपनों को सच करने के लिए परिवार का साथ कितना अहम होता है, इसका उदाहरण बाड़मेर जिले के जालीपा गांव में देखने को मिला। गुजरात के जामनगर की रहने वाली दीपू कंवर ने शादी के बाद भी अपने जज बनने के सपने को नहीं छोड़ा और ससुराल वालों के सहयोग से तीसरे प्रयास में गुजरात न्यायिक सेवा परीक्षा पास कर जज बनने का सपना साकार कर लिया।
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शादी के बाद भी जारी रखी पढ़ाई
दीपू कंवर की शादी करीब 7 साल पहले बाड़मेर जिले के जालीपा गांव निवासी लोकेंद्र सिंह के साथ हुई थी। बचपन से ही अधिकारी बनने का सपना देखने वाली दीपू ने एलएलबी की पढ़ाई के साथ-साथ न्यायिक सेवा की तैयारी भी जारी रखी और सीनियर एडवोकेट के साथ प्रैक्टिस कर अनुभव हासिल किया।
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ससुराल ने दिया पूरा साथ
दीपू बताती हैं कि शादी से 10 दिन पहले ही वे अपने गांव गई थीं और पीहर से ससुराल लॉ की किताबों और जज बनने के सपने के साथ आई थीं। ससुराल पहुंचने के आठ दिन बाद ही परीक्षा होने के कारण वे वापस जामनगर चली गईं। संयुक्त परिवार होने के बावजूद ससुराल वालों ने उन्हें घरेलू जिम्मेदारियों से दूर रखकर पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। परिवार ने घर में ही हॉस्टल की तरह एक अलग कमरा तैयार कर दिया, जहां वे पढ़ाई करती थीं। दीपू का कहना है कि जब भी वे घर के काम में हाथ बंटाना चाहती थीं तो ससुर उन्हें डांटकर कहते थे कि 'आप सिर्फ पढ़ाई करो, काम हम कर लेंगे।'
तीसरे प्रयास में मिली सफलता
दीपू कंवर ने बताया कि वे साल 2021 से कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं। 2022 में पहली बार परीक्षा दी, जिसमें प्री और मेन्स पास कर लिया लेकिन इंटरव्यू में रह गईं। 2023 में मेन्स में सफलता नहीं मिल पाई। इसके बाद 2025 में तीसरे प्रयास में 79वीं रैंक हासिल कर गुजरात न्यायिक सेवा में चयनित हो गईं।
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परिवार में खुशी का माहौल
दीपू ने बताया कि जज बनने का सपना अब पूरे परिवार का सपना बन गया था। जैसे ही परिणाम घोषित हुआ, वे जामनगर से रातों-रात अपने ससुराल जालीपा पहुंचीं और परिवार के साथ खुशी साझा की। दीपू ने अपनी सफलता का श्रेय पूरे परिवार, खासकर अपनी सास को दिया। वहीं उनकी सास ने कहा कि बहू को कभी घर का काम नहीं करने दिया और हमेशा पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। दीपू कंवर की इस सफलता से पूरे परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
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