जयपुर: अलका लांबा का अमित शाह पर आरोप, इंडिया गठबंधन की महारैली रोकने की रची जा रही साजिश
महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली में एक नवंबर को होने वाली इंडिया गठबंधन की महारैली को रोकने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने रैली में दस लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य बताया।
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दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को होने वाली इंडिया गठबंधन की महारैली को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रैली को असफल करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि रैली में दस लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा गया है और केंद्र सरकार दिल्ली आने वाले लोगों की भीड़ रोकने की कोशिश कर सकती है।
बुधवार को जयपुर दौरे पर आईं अलका लांबा ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में कहा कि अमित शाह हाल ही में दिल्ली पुलिस मुख्यालय गए थे और पुलिस आयुक्त सहित वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी। लांबा ने सवाल उठाया कि गृहमंत्री अधिकारियों को अपने पास बुलाने के बजाय खुद पुलिस मुख्यालय क्यों गए। उन्होंने आशंका जताई कि इस मुलाकात के दौरान दिल्ली आने वाली भीड़ को रोकने के निर्देश दिए गए होंगे। हालांकि, इस आरोप के समर्थन में उन्होंने कोई प्रत्यक्ष प्रमाण पेश नहीं किया।
12 अक्टूबर को भी साजिश रचने का आरोप
अलका लांबा ने आरोप लगाया कि 12 अक्टूबर को भी युवाओं के जंतर-मंतर पर आंदोलन के ऐलान के बाद दिल्ली में उन्हें रोकने के प्रयास किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि उस समय दिल्ली के 56 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए थे, सैकड़ों ट्रेनें रद्द हुई थीं और बाजार भी बंद रहे थे।
लांबा ने कहा कि बाजार बंद होने से व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने केंद्र सरकार से व्यापारियों को हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग की। उनका कहना था कि व्यापारी कांग्रेस की रैली के विरोध में नहीं हैं, बल्कि लाखों लोगों के दिल्ली पहुंचने से होटल, टैक्सी, ढाबे और दूसरे कारोबार को फायदा हो सकता है। उन्होंने बताया कि महिला कांग्रेस ने रैली में देशभर से 50 हजार कार्यकर्ताओं को लाने का लक्ष्य रखा है।
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मणिपुर और चीन के मुद्दे पर भी केंद्र को घेरा
अलका लांबा ने मणिपुर के हालात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मणिपुर में लंबे समय से हिंसा और तनाव के बावजूद केंद्र सरकार ने पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को वहां के हालात पर जवाब देना चाहिए।
लांबा ने चीन के साथ सीमा विवाद और केंद्र सरकार की व्यापार नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन मुद्दों पर जनता को संतोषजनक जवाब नहीं दे रही है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने की बात
महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि एक नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली महारैली में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। लांबा के मुताबिक, यदि 30 अक्टूबर तक उनका इस्तीफा हो जाता है तो कांग्रेस रैली नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर अपनी बात रखी है।
लांबा ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर देशभर में विरोध जारी रखेगी। उन्होंने जंतर-मंतर पर आंदोलन करने के अधिकार को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए।
2029 का लोकसभा चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग
अलका लांबा ने कांग्रेस की प्रमुख मांगों का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि ईवीएम को लेकर लोगों के मन में संदेह बढ़ रहा है और कांग्रेस चाहती है कि 2029 का लोकसभा चुनाव बैलेट पेपर से कराया जाए।
उन्होंने मध्य प्रदेश और हरियाणा के चुनावों का हवाला देते हुए दावा किया कि कुछ मतदाताओं ने कांग्रेस को वोट देने के बावजूद नतीजों पर सवाल उठाए थे। लांबा ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए बैलेट पेपर से मतदान पर विचार किया जाना चाहिए।
SIR को बताया वोट चोरी का माध्यम
लांबा ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस प्रक्रिया का विरोध जारी रखेगी। साथ ही उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में पहले की व्यवस्था बहाल करने की मांग की।
लांबा ने दावा किया कि चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर भी असहमति सामने आई है और इस संबंध में चुनाव आयुक्तों ने कई बार पत्र लिखे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और सहमति की अनदेखी की जा रही है।