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राजस्थान: राहुल गांधी की राजनीति पर राठौड़ का तंज, कहा- हर मुद्दे को सड़क पर ले जाना ठीक नहीं

Fri, 30 Oct 2026 03:12 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Fri, 30 Oct 2026 03:12 PM IST
सार

कैबिनेट मंत्री और पूर्व ओलंपियन कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने युवाओं, लोकतंत्र, सेना, राजनीति और खेल पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि युवाओं को तय करना होगा कि उनकी कहानी काली स्याही से लिखी जाएगी या सुनहरी स्याही से। राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने आंदोलन और राजनीतिक उद्देश्य से किए जाने वाले विरोध के बीच अंतर समझाया।
 

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Jaipur Dialogues: Rajyavardhan Rathore Targets Congress and Rahul Gandhi
कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री और पूर्व ओलंपियन कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ शुक्रवार को एक कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के उद्घाटन के बाद पूर्व आईएएस संजय दीक्षित के साथ चर्चा में उन्होंने कांग्रेस, राहुल गांधी, लोकतंत्र, SIR, सेना और खेल जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। युवाओं को संबोधित करते हुए राठौड़ ने कहा, ‘वह जवानी जवानी नहीं जिसकी कोई कहानी न हो।’ उन्होंने युवाओं से सवाल किया कि वे अपनी कहानी काली स्याही से लिखना चाहते हैं या सुनहरी स्याही से।
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आंदोलन और आंदोलन के धंधे में फर्क समझें युवा
राठौड़ ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और आंदोलन करने का अधिकार सभी को है। किसी वैध मुद्दे पर तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर किया गया आंदोलन लोकतंत्र को मजबूत करता है। हालांकि, उन्होंने आंदोलन और आंदोलन के नाम पर राजनीतिक गतिविधियों के बीच अंतर समझने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि युवाओं को यह पहचानना होगा कि किसी मुद्दे पर वास्तविक चिंता जताई जा रही है या किसी सुनियोजित मनोवैज्ञानिक अभियान के जरिए उन्हें प्रभावित करने की कोशिश हो रही है।
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सेना 140 करोड़ लोगों की सुरक्षा के लिए लड़ती है
सेना की भूमिका पर बात करते हुए राठौड़ ने कहा कि देश का सैनिक 140 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा के लिए सीमा पर तैनात रहता है और जरूरत पड़ने पर बलिदान देता है। ऐसे में उसकी अपेक्षा होती है कि देशवासी और विशेषकर राजनीतिक नेतृत्व उसके साथ खड़ा रहे।
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उन्होंने कहा कि कई बार कुर्सी की राजनीति इतनी हावी हो जाती है कि सभी सीमाएं पार होती दिखाई देती हैं। राठौड़ के मुताबिक, देश के करीब 40 करोड़ युवा अलग-अलग क्षेत्रों में भारत को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। इनमें सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सेवा देने वाले युवाओं के साथ स्टार्टअप, तकनीक और शोध जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले युवा भी शामिल हैं। उन्होंने इन्हें 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की महत्वपूर्ण ताकत बताया।

राहुल गांधी पर निशाना, संसद को बताया बहस का मंच
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए राठौड़ ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछे जाने चाहिए और सरकार जवाब देने के लिए तैयार है। लेकिन बहस का उचित मंच संसद है। उन्होंने कहा कि यदि संसद में चर्चा नहीं होगी और हर मुद्दे को सड़क पर ले जाने की राजनीति होगी तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

एसआईआर को लेकर कांग्रेस के विरोध पर उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदारी संवैधानिक रूप से चुनाव आयोग की है। राठौड़ ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम उसके पक्ष में आने पर चुनावी व्यवस्था ठीक लगती है, जबकि भाजपा के पक्ष में परिणाम आने पर उसी व्यवस्था और लोकतंत्र पर सवाल उठाए जाते हैं।

खेल से बनता है अनुशासन और संघर्ष का जज्बा
खेलों पर चर्चा करते हुए राठौड़ ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं है। इससे युवाओं में अनुशासन, धैर्य, संघर्ष और टीम भावना विकसित होती है। उन्होंने कहा कि भविष्य के ओलंपिक खिलाड़ियों की पहचान छोटी उम्र से ही करनी होगी। उनके अनुसार, पांच से 15 साल की उम्र के बच्चों की प्रतिभा और शारीरिक क्षमता पहचानकर उन्हें बेहतर डाइट, प्रशिक्षण, मेडिकल सपोर्ट और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए।

चार साल तक नहीं मिला पदक, फिर भी नहीं मानी हार
अपने शूटिंग करियर का अनुभव साझा करते हुए राठौड़ ने बताया कि सेना में रहते हुए उन्होंने शूटिंग शुरू की थी। शुरुआती चार वर्षों तक उन्हें कोई पदक नहीं मिला। कई प्रतियोगिताओं में वह 30वें और 40वें स्थान पर रहे, लेकिन उन्होंने प्रयास जारी रखा। उन्होंने युवाओं से कहा कि आलोचना से घबराने के बजाय उससे सीखना चाहिए और लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए। उनके मुताबिक, असफलता के बावजूद प्रयास जारी रखना ही आगे बढ़ने का रास्ता है।

सोशल मीडिया के दौर में सतर्क रहने की जरूरत
राठौड़ ने कहा कि आज मोबाइल और सोशल मीडिया के कारण युवाओं तक सूचनाएं तेजी से पहुंच रही हैं। ऐसे में उनके लिए यह समझना जरूरी है कि कौन उन्हें जानकारी दे रहा है और कौन किसी खास उद्देश्य से प्रभावित या मैन्युपुलेट करने की कोशिश कर रहा है।


उन्होंने कहा कि भारत की तरक्की किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे देश के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। युवाओं को सकारात्मक ऊर्जा के साथ राष्ट्र निर्माण में भागीदारी करनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि जवानी की पहचान केवल जोश से नहीं, बल्कि उस जोश से लिखी गई कहानी से होती है।
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