{"_id":"687efef9ae18456e790d4bdb","slug":"news-congress-furious-over-redrawing-of-boundaries-of-tiger-reserve-julie-submits-objection-letter-to-cec-2025-07-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jaipur News: टाइगर रिजर्व की सीमाओं के पुनर्निर्धारण पर भड़की कांग्रेस, जूली ने सीईसी को आपत्ति-पत्र सौंपा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jaipur News: टाइगर रिजर्व की सीमाओं के पुनर्निर्धारण पर भड़की कांग्रेस, जूली ने सीईसी को आपत्ति-पत्र सौंपा
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: सौरभ भट्ट
Updated Tue, 22 Jul 2025 09:24 AM IST
विज्ञापन
सार
News: सरिस्का की सीमाओं का पुनर्निधारण को लेकर राजस्थान में विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस इस मुद्दे पर बीजेपी घेर रही है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस मामले में सरकार पर कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए केंद्रीय सशक्त समिति(CEC) को पत्र लिखा है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली।
- फोटो : social media
विज्ञापन
विस्तार
राजस्थान के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व की सीमाओं के पुनर्निधारण को लेकर सरकार विवादों में आ गई है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार को घेर रही है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस मामले को लेकर अपना कड़ा विरोध दर्ज करवाया है। उन्होंने इसे बाघों के प्राकर्तिक आवास और संरक्षण के साथ अन्याय बताया है। जूली ने अपना विरोध जातते हुए केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) को आपत्ति पत्र भी लिखा है। हाल में वन विभाग सरिस्का की सीमाओं के रेशनलाइजेशन का प्रस्ताव तैयार किया है। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार ने इस प्रक्रिया में कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी की है।
जूली का आरोप सीमाओं में बदलाव खनन लॉबी के लिए
जूली ने आरोप लगाया कि सरिस्का की सीमाओं में यह बदलाव खनन और होटल लॉबी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। जूली ने बताया कि सरिस्का के टहला क्षेत्र में 3.7 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र में बाघिन ST-27 ने मई 2024 में दो शावकों को जन्म दिया था। उसे क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट से हटाकर बफर जोन में डाला जा रहा है। इससे इस क्षेत्र में खनन और होटल संचालन की अनुमति मिल सकती है, जो सीधे बाघों के जीवन पर खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि 2004 में जब सरिस्का में सिर्फ 492 वर्ग किमी क्षेत्र संरक्षित था। तब यहां से बाघ विलुप्त हो गए थे। इसके बाद 2007 में क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट जोड़े जाने के बाद पुनः बाघों की वापसी हुई। कांग्रेस पार्टी की सरकारों ने सरिस्का को पुनः आबाद करने के लिए स्पेशल प्रोजेक्ट चलाया और उसी का परिणाम है कि आज वहां 48 बाघ हैं। जहां कभी तीन बाघ ही बचे थे।
ये भी पढ़ें- सावन के दूसरे सोमवार को बाड़मेर के शिवालयों में उमड़े श्रद्धालु, हुआ सहस्त्रघट रुद्राभिषेक
“CTH की आड़ में बाघों की नर्सरी की बलि”
जूली ने आरोप लगाया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिए गए वचनों का उल्लंघन करते हुए CTH (Critical Tiger Habitat) का क्षेत्र घटाया है, जबकि आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 48 बाघों के लिए 1820.99 वर्ग किमी क्षेत्र की आवश्यकता है। इसके विपरीत, प्रस्ताव में मात्र 85 हेक्टेयर क्षेत्र ही जोड़ा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि 2004 में जब सरिस्का में सिर्फ 492 वर्ग किमी क्षेत्र संरक्षित था, तब यहां से बाघ विलुप्त हो गए थे, लेकिन 2007 में अतिरिक्त CTH जोड़े जाने के बाद पुनः बाघों की वापसी हुई। जूली ने कहा कि सरिस्का को आबाद रखने के लिए डॉ. मनमोहन सिंह सरकार ने टाइगर प्रोजेक्ट शुरू किया। जिस सरिस्का में मात्र 3 बाघ बचे थे, वहां कांग्रेस पार्टी की सरकारों ने सरिस्का को पुनः आबाद करने के लिए स्पेशल प्रोजेक्ट चलाया और उसी का परिणाम है कि आज वहां 48 बाघ हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार अब सरिस्का को बर्बाद करने पर आमदा है। उन्होंने कहा कि भिवाड़ी और बहरोड़ के अलग जिला बनने के बाद सरिस्का अलवर राजस्थान का मुख्य पर्यटन केन्द्र है, लेकिन राज्य सरकार बड़े लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए माइंस एरिया पर फोकस कर रही है, इसमें बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
मांगें और सुझाव समिति को सौंपे
जूली ने CEC को सौंपे प्रतिवेदन में CTH क्षेत्र वापस न लेने और उसे मजबूती देने की मांग रखी। वहीं ड्राफ्ट अधिसूचना सार्वजनिक रूप से जारी कर जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी जाने के लिए भी कहा। अभयारण्य की सीमा को CTH के साथ समान (coterminous) किए जाने की मांग रखी।
Trending Videos
जूली का आरोप सीमाओं में बदलाव खनन लॉबी के लिए
जूली ने आरोप लगाया कि सरिस्का की सीमाओं में यह बदलाव खनन और होटल लॉबी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। जूली ने बताया कि सरिस्का के टहला क्षेत्र में 3.7 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र में बाघिन ST-27 ने मई 2024 में दो शावकों को जन्म दिया था। उसे क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट से हटाकर बफर जोन में डाला जा रहा है। इससे इस क्षेत्र में खनन और होटल संचालन की अनुमति मिल सकती है, जो सीधे बाघों के जीवन पर खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि 2004 में जब सरिस्का में सिर्फ 492 वर्ग किमी क्षेत्र संरक्षित था। तब यहां से बाघ विलुप्त हो गए थे। इसके बाद 2007 में क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट जोड़े जाने के बाद पुनः बाघों की वापसी हुई। कांग्रेस पार्टी की सरकारों ने सरिस्का को पुनः आबाद करने के लिए स्पेशल प्रोजेक्ट चलाया और उसी का परिणाम है कि आज वहां 48 बाघ हैं। जहां कभी तीन बाघ ही बचे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- सावन के दूसरे सोमवार को बाड़मेर के शिवालयों में उमड़े श्रद्धालु, हुआ सहस्त्रघट रुद्राभिषेक
“CTH की आड़ में बाघों की नर्सरी की बलि”
जूली ने आरोप लगाया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिए गए वचनों का उल्लंघन करते हुए CTH (Critical Tiger Habitat) का क्षेत्र घटाया है, जबकि आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 48 बाघों के लिए 1820.99 वर्ग किमी क्षेत्र की आवश्यकता है। इसके विपरीत, प्रस्ताव में मात्र 85 हेक्टेयर क्षेत्र ही जोड़ा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि 2004 में जब सरिस्का में सिर्फ 492 वर्ग किमी क्षेत्र संरक्षित था, तब यहां से बाघ विलुप्त हो गए थे, लेकिन 2007 में अतिरिक्त CTH जोड़े जाने के बाद पुनः बाघों की वापसी हुई। जूली ने कहा कि सरिस्का को आबाद रखने के लिए डॉ. मनमोहन सिंह सरकार ने टाइगर प्रोजेक्ट शुरू किया। जिस सरिस्का में मात्र 3 बाघ बचे थे, वहां कांग्रेस पार्टी की सरकारों ने सरिस्का को पुनः आबाद करने के लिए स्पेशल प्रोजेक्ट चलाया और उसी का परिणाम है कि आज वहां 48 बाघ हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार अब सरिस्का को बर्बाद करने पर आमदा है। उन्होंने कहा कि भिवाड़ी और बहरोड़ के अलग जिला बनने के बाद सरिस्का अलवर राजस्थान का मुख्य पर्यटन केन्द्र है, लेकिन राज्य सरकार बड़े लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए माइंस एरिया पर फोकस कर रही है, इसमें बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
मांगें और सुझाव समिति को सौंपे
जूली ने CEC को सौंपे प्रतिवेदन में CTH क्षेत्र वापस न लेने और उसे मजबूती देने की मांग रखी। वहीं ड्राफ्ट अधिसूचना सार्वजनिक रूप से जारी कर जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी जाने के लिए भी कहा। अभयारण्य की सीमा को CTH के साथ समान (coterminous) किए जाने की मांग रखी।