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राजस्थान निकाय चुनाव: वार्डों के बाद मेयर-अध्यक्ष के नतीजों से तस्वीर साफ, भाजपा के 197 अध्यक्ष निर्वाचित
Mon, 21 Sep 2026 07:18 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Mon, 21 Sep 2026 07:18 PM IST
सार
राजस्थान के मौजूदा नगरीय निकाय चुनावों में अब तक घोषित 301 शीर्ष पदों में भाजपा ने 197, कांग्रेस ने 94, निर्दलीयों ने सात और आम आदमी पार्टी, माकपा व आरएलपी ने एक-एक पद जीता है। मेयर चुनावों में सात नगर निगमों में छह पद भाजपा और एक कांग्रेस के खाते में गया।
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राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में वार्डों के बाद अब मेयर, सभापति और अध्यक्ष पदों के नतीजों ने भी तस्वीर साफ कर दी है। अब तक तय 301 नगरीय निकायों में भाजपा ने 197 शीर्ष पद अपने नाम किए हैं, जबकि कांग्रेस को 94 पद मिले हैं। निर्दलीयों ने सात निकायों में शीर्ष पद हासिल किए। आम आदमी पार्टी, माकपा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को एक-एक निकाय में जीत मिली है। सोमवार को 273 नगरीय निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ। इससे पहले 32 निकायों में शीर्ष पद के लिए प्रत्याशी निर्विरोध चुने जा चुके थे। राज्य में मौजूदा चुनाव कार्यक्रम के तहत कुल 309 नगरीय निकाय हैं।
वार्ड चुनाव में भी भाजपा आगे, लेकिन निर्दलीयों का दबदबा
निकाय प्रमुखों के चुनाव में भाजपा की बढ़त उसके वार्ड प्रदर्शन से भी ज्यादा रही। 10,244 वार्डों के चुनाव में भाजपा ने 4,182 वार्ड, कांग्रेस ने 3,619 और निर्दलीयों ने 2,273 वार्ड जीते। हालांकि निर्दलीय पार्षदों की संख्या पांचवें हिस्से से ज्यादा रही और कई निकायों में बोर्ड बनाने के लिए उनका समर्थन महत्वपूर्ण रहा, लेकिन शीर्ष पदों में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ सात निकायों तक सीमित रही। धौलपुर, हनुमानगढ़ और सादुलशहर नगर परिषदों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने शीर्ष पद हासिल किए। सूरजगढ़, टोडाभीम, रियांबड़ी और फतेहनगर-सनवाड़ नगरपालिकाओं में भी निर्दलीय अध्यक्ष चुने गए।
सात नगर निगमों में छह भाजपा के पास
अब तक जिन सात नगर निगमों में मेयर चुने गए हैं, उनमें छह पर भाजपा और एक पर कांग्रेस का कब्जा हुआ है। भाजपा ने अजमेर, अलवर, भरतपुर, भीलवाड़ा, पाली और उदयपुर में मेयर पद जीता, जबकि बीकानेर में कांग्रेस का मेयर बना। अजमेर में कांग्रेस 37 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी। भाजपा के 32 और निर्दलीयों के 11 पार्षद थे। इसके बावजूद भाजपा की अनामिका शर्मा 43 वोट लेकर मेयर चुनी गईं। पाली में भी कांग्रेस 29 वार्डों के साथ सबसे बड़ी पार्टी रही, जबकि भाजपा के 21 और निर्दलीयों के 15 पार्षद थे। इसके बावजूद भाजपा की नमिता बुबकिया ने 33 वोट हासिल कर मेयर पद जीत लिया। अलवर में भाजपा ने 28 वार्ड जीते, कांग्रेस को 23 और निर्दलीयों को 13 सीटें मिलीं। भाजपा की सुमनलता अग्रवाल 42 वोट लेकर मेयर चुनी गईं।
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भरतपुर में निर्दलीयों के बहुमत के बावजूद भाजपा का मेयर
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में निर्दलीयों ने 65 में से 36 वार्ड जीतकर अपने दम पर बहुमत हासिल किया। भाजपा को 20 और कांग्रेस को सात सीटें मिलीं। बसपा और आरएलपी को एक-एक सीट मिली। इसके बावजूद भाजपा की अनुराधा सिंह निर्विरोध मेयर चुनी गईं। यह नतीजा बताता है कि वार्डों में सबसे बड़ा समूह होने और नगर निगम के शीर्ष पद पर पहुंचने के बीच चुनाव बाद के समीकरण कितना महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
ये भी पढ़ें- कांग्रेस के पास ज्यादा पार्षद, फिर भी भाजपा के मेयर: पाली-अजमेर में कैसे पलटा पूरा खेल? समझें आंकड़ों का गणित
विपक्ष ने लगाए दबाव बनाने के आरोप
निकाय प्रमुखों के चुनाव के दौरान कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर पुलिस और प्रशासन के जरिए अपने पार्षदों पर दबाव बनाने के आरोप लगाए। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने तिजारा, खैरथल और मालाखेड़ा सहित कुछ स्थानों पर कांग्रेस पार्षदों को कथित तौर पर दबाव में लेने के आरोप लगाए। श्रीविजयनगर में पुलिस और कांग्रेस समर्थकों के बीच टकराव की रिपोर्ट भी सामने आई। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी ने सत्ता का दुरुपयोग नहीं किया। उन्होंने भाजपा की जीत को भजनलाल सरकार के विकास कार्यों के प्रति जनता के समर्थन से जोड़ा।
जयपुर समेत चार निकायों का फैसला 25 सितंबर को
जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों में मेयर का चुनाव और सुकेत नगरपालिका में अध्यक्ष का चुनाव 25 सितंबर को होना है। इन चुनावों के बाद राज्य के मौजूदा निकाय चुनाव कार्यक्रम में सभी प्रमुख पदों की तस्वीर और स्पष्ट होगी। गौर करने वाली बात यह है कि पिछली बार नवंबर 2019 और फरवरी 2021 में हुए निकाय चुनावों के समय राजस्थान में 196 नगरीय निकाय थे। उस समय कांग्रेस ने 123, भाजपा ने 64 और निर्दलीय व अन्य दलों ने नौ निकायों में प्रमुख पद हासिल किए थे।
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वार्ड चुनाव में भी भाजपा आगे, लेकिन निर्दलीयों का दबदबा
निकाय प्रमुखों के चुनाव में भाजपा की बढ़त उसके वार्ड प्रदर्शन से भी ज्यादा रही। 10,244 वार्डों के चुनाव में भाजपा ने 4,182 वार्ड, कांग्रेस ने 3,619 और निर्दलीयों ने 2,273 वार्ड जीते। हालांकि निर्दलीय पार्षदों की संख्या पांचवें हिस्से से ज्यादा रही और कई निकायों में बोर्ड बनाने के लिए उनका समर्थन महत्वपूर्ण रहा, लेकिन शीर्ष पदों में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ सात निकायों तक सीमित रही। धौलपुर, हनुमानगढ़ और सादुलशहर नगर परिषदों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने शीर्ष पद हासिल किए। सूरजगढ़, टोडाभीम, रियांबड़ी और फतेहनगर-सनवाड़ नगरपालिकाओं में भी निर्दलीय अध्यक्ष चुने गए।
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सात नगर निगमों में छह भाजपा के पास
अब तक जिन सात नगर निगमों में मेयर चुने गए हैं, उनमें छह पर भाजपा और एक पर कांग्रेस का कब्जा हुआ है। भाजपा ने अजमेर, अलवर, भरतपुर, भीलवाड़ा, पाली और उदयपुर में मेयर पद जीता, जबकि बीकानेर में कांग्रेस का मेयर बना। अजमेर में कांग्रेस 37 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी। भाजपा के 32 और निर्दलीयों के 11 पार्षद थे। इसके बावजूद भाजपा की अनामिका शर्मा 43 वोट लेकर मेयर चुनी गईं। पाली में भी कांग्रेस 29 वार्डों के साथ सबसे बड़ी पार्टी रही, जबकि भाजपा के 21 और निर्दलीयों के 15 पार्षद थे। इसके बावजूद भाजपा की नमिता बुबकिया ने 33 वोट हासिल कर मेयर पद जीत लिया। अलवर में भाजपा ने 28 वार्ड जीते, कांग्रेस को 23 और निर्दलीयों को 13 सीटें मिलीं। भाजपा की सुमनलता अग्रवाल 42 वोट लेकर मेयर चुनी गईं।
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भरतपुर में निर्दलीयों के बहुमत के बावजूद भाजपा का मेयर
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में निर्दलीयों ने 65 में से 36 वार्ड जीतकर अपने दम पर बहुमत हासिल किया। भाजपा को 20 और कांग्रेस को सात सीटें मिलीं। बसपा और आरएलपी को एक-एक सीट मिली। इसके बावजूद भाजपा की अनुराधा सिंह निर्विरोध मेयर चुनी गईं। यह नतीजा बताता है कि वार्डों में सबसे बड़ा समूह होने और नगर निगम के शीर्ष पद पर पहुंचने के बीच चुनाव बाद के समीकरण कितना महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
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विपक्ष ने लगाए दबाव बनाने के आरोप
निकाय प्रमुखों के चुनाव के दौरान कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर पुलिस और प्रशासन के जरिए अपने पार्षदों पर दबाव बनाने के आरोप लगाए। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने तिजारा, खैरथल और मालाखेड़ा सहित कुछ स्थानों पर कांग्रेस पार्षदों को कथित तौर पर दबाव में लेने के आरोप लगाए। श्रीविजयनगर में पुलिस और कांग्रेस समर्थकों के बीच टकराव की रिपोर्ट भी सामने आई। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी ने सत्ता का दुरुपयोग नहीं किया। उन्होंने भाजपा की जीत को भजनलाल सरकार के विकास कार्यों के प्रति जनता के समर्थन से जोड़ा।
जयपुर समेत चार निकायों का फैसला 25 सितंबर को
जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों में मेयर का चुनाव और सुकेत नगरपालिका में अध्यक्ष का चुनाव 25 सितंबर को होना है। इन चुनावों के बाद राज्य के मौजूदा निकाय चुनाव कार्यक्रम में सभी प्रमुख पदों की तस्वीर और स्पष्ट होगी। गौर करने वाली बात यह है कि पिछली बार नवंबर 2019 और फरवरी 2021 में हुए निकाय चुनावों के समय राजस्थान में 196 नगरीय निकाय थे। उस समय कांग्रेस ने 123, भाजपा ने 64 और निर्दलीय व अन्य दलों ने नौ निकायों में प्रमुख पद हासिल किए थे।