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निकाय चुनाव: टिकट पर घमासान; बीजेपी में भरतपुर पर बवाल, कांग्रेस वॉर रूम में नेताओं के बीच भिड़ंत

Sat, 29 Aug 2026 07:23 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Sat, 29 Aug 2026 07:23 PM IST
सार

राजस्थान निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस टिकट वितरण में बगावत के डर से प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक करने से बच रही है। चयनित दावेदारों को फोन पर सूचना देकर नामांकन के निर्देश दिए जा रहे हैं। इधर टिकट बंटवारे को लेकर बीजेपी कांग्रेस में घमासान मच गया।

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Rajasthan Civic Polls: Ticket War Intensifies; Congress Informs Candidates Over Phone, Leaders Clash at Party
पीसीसी वॉर रूम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान के 309 नगर निकायों में चुनावी रण सज चुका है, लेकिन प्रत्याशी चयन ने कांग्रेस की टेंशन बढ़ा दी है। टिकट के लिए बड़ी संख्या में आए आवेदनों के बीच पार्टी को अब बगावत और भितरघात का डर सताने लगा है। यही वजह है कि कांग्रेस ने प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक करने के बजाय कई जगह चयनित उम्मीदवारों को फोन पर ही टिकट की जानकारी देने की रणनीति अपनाई है।

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पार्टी की ओर से चयनित दावेदारों को फोन कर चुनावी तैयारी शुरू करने और नामांकन दाखिल करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्हें मौखिक तौर पर बताया जा रहा है कि 31 अगस्त को चुनाव कार्यालय में पार्टी का सिंबल जमा कराया जाएगा।

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सूची जारी हुई तो खुल सकती है बगावत की राह

कांग्रेस नेताओं को आशंका है कि प्रत्याशियों की पूरी सूची सार्वजनिक होते ही टिकट से वंचित दावेदार खुलकर विरोध में उतर सकते हैं। कई जगह विरोध प्रदर्शन शुरू होने और दावेदारों के बीच आरोप-प्रत्यारोप सामने आने के बाद पार्टी नेतृत्व ने रणनीति बदलने का फैसला किया है।

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पार्टी के स्तर पर जिलाध्यक्षों और प्रमुख नेताओं को निर्देश दिए गए हैं कि जहां तक संभव हो, प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक करने से बचा जाए।
रणनीति यह है कि जिसे टिकट देना है, उसे सीधे फोन पर सूचना दी जाए और वह नामांकन की तैयारी करे। इससे टिकट कटने वाले दावेदारों को सामूहिक रूप से लामबंदी का समय नहीं मिलेगा।

31 अगस्त आखिरी तारीख, प्रत्याशियों के पास बेहद कम समय

नगर निकाय चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त है। ऐसे में पार्टी ने चयनित उम्मीदवारों को जल्द से जल्द नामांकन दाखिल करने के लिए कहा है।
शनिवार को भी नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे, जबकि रविवार को अवकाश रहेगा। सोमवार को दोपहर 3 बजे तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे।
यानी कांग्रेस के पास अब प्रत्याशी चयन, सूचना देने और नामांकन प्रक्रिया पूरी कराने के लिए बेहद सीमित समय है।

PCC वॉर रूम में टिकट को लेकर नेताओं में तीखी बहस

प्रत्याशी चयन को लेकर कांग्रेस के भीतर बढ़ते तनाव का असर प्रदेश कांग्रेस के वॉर रूम तक पहुंच गया। सूत्रों के मुताबिक शनिवार को पूर्व मंत्री रामलाल जाट और एआईसीसी के पूर्व सचिव एवं उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी धीरज गुर्जर के बीच टिकट वितरण को लेकर तीखी बहस हो गई।
बताया जा रहा है कि बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों नेताओं के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। इस दौरान दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया। स्थिति बिगड़ती देख नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को बीच-बचाव करना पड़ा। हालांकि इस घटनाक्रम को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। टिकट वितरण को लेकर वॉर रूम में हुआ यह विवाद बताता है कि वार्ड स्तर पर प्रत्याशी चयन कितना संवेदनशील हो चुका है।

भाजपा में भी भरतपुर की बैठक में बढ़ा तनाव

दूसरी तरफ भाजपा में भी टिकट वितरण को लेकर सब कुछ शांत नहीं है। सूत्रों के मुताबिक भरतपुर को लेकर हुई बैठक में जिला अध्यक्ष के नाराज होने की बात सामने आई है।
टिकटों को लेकर दोनों प्रमुख दलों में स्थानीय समीकरण, दावेदारों की संख्या और गुटबाजी पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बन रही है। निकाय चुनाव में वार्डवार समीकरण बेहद महत्वपूर्ण होने के कारण एक टिकट का फैसला भी कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को नाराज कर सकता है।

कांग्रेस अभी भाजपा की सूची का भी इंतजार कर रही

कांग्रेस के भीतर कुछ निकायों में भाजपा की सूची का भी इंतजार किया जा रहा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा है कि पार्टी कई जगह भाजपा के प्रत्याशियों की सूची का इंतजार कर रही है और उसके बाद अपने उम्मीदवार तय करेगी। उनका कहना है कि टिकट वितरण के बाद छोटे-मोटे विवाद स्वाभाविक हैं। टिकट नहीं मिलने वाले दावेदार नाराज हो सकते हैं, लेकिन पार्टी उनसे बातचीत कर उन्हें मनाने का प्रयास करेगी। कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश में उसके पक्ष में माहौल है और बड़ी संख्या में लोगों ने पार्टी का प्रत्याशी बनने के लिए आवेदन किया है।

200 विधानसभा क्षेत्रों की रिपोर्ट डोटासरा तक पहुंची

निकाय चुनाव की तैयारियों के लिए प्रदेश कांग्रेस ने सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों में पर्यवेक्षक नियुक्त किए थे। पर्यवेक्षकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में दावेदारों और स्थानीय नेताओं के साथ बैठकें कर रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को सौंप दी है।
रिपोर्ट में टिकट के दावेदारों के साथ-साथ विधानसभा क्षेत्र में पार्टी की तैयारियों, नेताओं की गुटबाजी, संगठन की एकजुटता और चुनावी माहौल का भी फीडबैक दिया गया है।


अब इन्हीं रिपोर्ट और स्थानीय समीकरणों के आधार पर अंतिम टिकट वितरण की कवायद चल रही है।

असली चुनौती: टिकट देना नहीं, बगावत रोकना

निकाय चुनाव में कांग्रेस के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती उम्मीदवार चुनने से ज्यादा टिकट कटने के बाद पैदा होने वाले असंतोष को संभालने की है। हजारों दावेदारों में से कुछ को टिकट मिलेगा और बड़ी संख्या में दावेदारों को निराश होना पड़ेगा। पार्टी को डर है कि यही नाराज दावेदार निर्दलीय बनकर मैदान में उतर गए तो सीधे कांग्रेस के वोटों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
 

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