राजस्थान के बदहाल सरकारी स्कूल: 611 बिना भवन के चल रहे; 1049 में बच्चों को नहीं मिलता पीने का पानी
राजस्थान के सरकारी स्कूलों की हालत बहुत खराब है। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार राज्य में 611 सरकारी स्कूलों के पास भवन नहीं हैं। 2,047 स्कूलों में शौचालय नहीं है। ऐसे भी स्कूल हैं जहां बच्चों को पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है। इन स्कूलों की संख्या करीब 1,049 है। सरकार ने जर्जर स्कूलों के सुधार के लिए 12,335 करोड़ रुपये का प्लान बनाया है।
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राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक है। विधानसभा में स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेश में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपना भवन नहीं है। वहीं, भवन वाले स्कूलों में भी 2,047 स्कूलों में बच्चों के लिए शौचालय नहीं हैं, जबकि 1,049 स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है।
यह जानकारी विधायक टीकाराम जूली के सवाल के जवाब में विधानसभा में स्कूल शिक्षा विभाग ने दी है। यू-डाइस डाटा 2025-26 के अनुसार समग्र शिक्षा योजना के तहत प्रदेश में 611 स्कूल भवनविहीन हैं। इनमें 10 बालिका स्कूल भी शामिल हैं। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया कि माध्यमिक शिक्षा के राजकीय उच्च माध्यमिक स्तर का कोई स्कूल भवनविहीन नहीं है।
झालावाड़ में सबसे ज्यादा भवनविहीन स्कूल
प्रदेश में भवनविहीन स्कूलों की संख्या के मामले में झालावाड़ प्रमुख जिलों में है। अकेले अकलेरा ब्लॉक में 23 स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपना भवन नहीं है। बांसवाड़ा, जोधपुर, फलोदी, बीकानेर, जैसलमेर और उदयपुर सहित कई अन्य जिलों में भी भवनविहीन स्कूल हैं।
विभाग के अनुसार प्रदेश में 64,484 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास भवन उपलब्ध है। लेकिन इनमें से भी 2,047 स्कूलों में बच्चों के लिए शौचालय की सुविधा नहीं है और 1,049 स्कूलों में पीने का पानी उपलब्ध नहीं है।
अलवर, बांसवाड़ा, बीकानेर, दौसा, डूंगरपुर, जयपुर, जैसलमेर, झालावाड़, कोटा और उदयपुर जैसे जिलों में शौचालय और पेयजल की सुविधा से वंचित स्कूलों की संख्या भी काफी है।
विभाग का कहना है कि जिन स्कूलों में स्थायी पेयजल व्यवस्था नहीं है, वहां फिलहाल वैकल्पिक माध्यमों से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी तरह शौचालय के लिए भी अस्थायी इंतजाम किए गए हैं।
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जर्जर स्कूलों पर हाईकोर्ट में सरकार का बड़ा प्लान
सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति के बीच जर्जर भवनों को लेकर राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट में पांच साल का एक्शन प्लान पेश किया है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवासन की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया है कि अगले पांच वर्षों में स्कूल भवनों, कक्षाओं और शौचालयों के निर्माण तथा मरम्मत पर 12,335 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
सरकार के प्लान के मुताबिक 3,587 जर्जर स्कूल भवनों की जगह नए भवन बनाए जाएंगे। इसके लिए 2,487 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं 22,589 स्कूल भवनों की बड़ी मरम्मत के लिए 1,129 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
इसके अलावा 83,783 जर्जर कक्षाओं की जगह नए कमरे बनाए जाएंगे। इस पर 8,378 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं 13,616 जर्जर शौचालयों के निर्माण और मरम्मत के लिए 340 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।
पांच साल में अलग-अलग चरणों में होगा काम
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में 20,830 इकाइयों पर 2,021 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है। इसके बाद 2027-28 में 22,917 इकाइयों पर 2,223 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
वित्त वर्ष 2028-29 में 7,626 इकाइयों के लिए 2,445 करोड़ रुपये, 2029-30 में 27,721 इकाइयों के लिए 2,956 करोड़ रुपये और 2030-31 में 30,481 इकाइयों के लिए 2,956 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है।
उदयपुर में सबसे ज्यादा नए स्कूल भवन
नए स्कूल भवनों के निर्माण में उदयपुर सबसे आगे है। यहां 158 नए स्कूल भवन प्रस्तावित हैं। इसके बाद प्रतापगढ़ में 63, बांसवाड़ा में 53, डूंगरपुर में 36 और डीग में 28 नए भवन बनाए जाने हैं। बड़े स्तर की मरम्मत के लिए जयपुर के सबसे ज्यादा 1,332 स्कूल चिह्नित किए गए हैं। इसके बाद जोधपुर में 1,091, भीलवाड़ा में 1,058 और नागौर में 1,036 स्कूलों में प्रमुख मरम्मत की जरूरत बताई गई है।
सर्वे में 5,667 स्कूल भवन जर्जर मिले
झालावाड़ में स्कूल भवन गिरने से बच्चों की मौत और इसके बाद अन्य घटनाओं को देखते हुए शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर में स्कूल भवनों का सर्वे कराया था। 22 अगस्त को जारी सर्वे रिपोर्ट में 5,667 स्कूल भवन जर्जर पाए गए। इनमें सबसे ज्यादा जर्जर भवन बांसवाड़ा, उदयपुर और झालावाड़ में मिले। सर्वे में यह भी सामने आया कि पहले से जर्जर घोषित 1,579 भवनों की मरम्मत का काम शुरू ही नहीं हुआ था। बांसवाड़ा में 605 और झालावाड़ में 448 जर्जर भवन चिह्नित किए गए। सर्वे में 17,109 स्कूल शौचालयों को पूरी तरह जर्जर बताया गया।
जर्जर स्कूलों को शिफ्ट किया गया
जर्जर भवनों में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए सरकार ने ऐसे स्कूलों को सील करने और विद्यार्थियों को नजदीक के सुरक्षित स्कूलों में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए थे। जहां आसपास स्कूल उपलब्ध नहीं थे, वहां सामुदायिक केंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र, पंचायत कार्यालय, धर्मशाला आदि में वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा गया। हालांकि, बाद में इन वैकल्पिक स्थानों पर भी कई समस्याएं सामने आईं। कई जगह बच्चों के लिए पर्याप्त कमरे, सुरक्षित भवन, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं।
इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को इन वैकल्पिक व्यवस्थाओं का भी सर्वे करने के निर्देश दिए। DLSA ने अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की, जिसके बाद अदालत ने सरकार को जर्जर स्कूलों की समस्या के समाधान के लिए तत्काल एक्शन प्लान तैयार करने को कहा।
12,335 करोड़ की व्यवस्था इन स्रोतों से होगी
सरकार के हलफनामे के अनुसार पांच साल के लिए प्रस्तावित 12,335 करोड़ रुपये की व्यवस्था विभिन्न स्रोतों से की जाएगी। इसमें समग्र शिक्षा से करीब 2,500 करोड़ रुपये, विश्व बैंक और नाबार्ड से 2,500 करोड़ रुपये, वीबी-जीराम-जी योजना से 2,000 करोड़ रुपये, राज्य बजट से 1,500 करोड़ रुपये, DMFT से 1,000 करोड़ रुपये और सांसद-विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से 1,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।
इसके अलावा डांग, मगरा, मेवात, जनजातीय क्षेत्र विकास, आकांक्षी जिलों और अन्य क्षेत्रीय योजनाओं से 500 करोड़ रुपये, SDRF से 750 करोड़ और CSR से 750 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है। सरकार ने विधानसभा में यह भी बताया था कि स्कूल भवनों की मरम्मत, निर्माण और रखरखाव के लिए अगले पांच वर्षों में हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। अलग-अलग विभागों और योजनाओं से राशि प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल की जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग की होगी।
विशेषज्ञ समिति के गठन पर विचार
हाईकोर्ट ने स्कूल भवनों के निर्माण और मरम्मत की गुणवत्ता तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञों की समिति या पैनल गठित करने का निर्देश भी दिया है। यह समिति निर्माण और मरम्मत कार्यों की निगरानी करने के साथ तय मानकों के अनुरूप प्रमाण-पत्र जारी करेगी। मुख्य सचिव ने हलफनामे में बताया कि विशेषज्ञ समिति के गठन पर सरकार विचार कर रही है। साथ ही केंद्र सरकार से अतिरिक्त वित्तीय सहायता लेने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इस पूरे मामले में अब चुनौती सिर्फ बजट जुटाने की नहीं, बल्कि तय समय में काम पूरा कराने और बच्चों को सुरक्षित तथा बुनियादी सुविधाओं से युक्त स्कूल उपलब्ध कराने की है।