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राजस्थान शिक्षक भर्ती: खेल कोटे का फर्जीवाड़ा, ताइक्वांडो प्रमाण-पत्र के लिए चार लाख देने का आरोप
Thu, 29 Oct 2026 04:40 PM IST
जालौर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालोर
Published by: जालौर ब्यूरो
Updated Thu, 29 Oct 2026 04:40 PM IST
सार
तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2022 में खेल कोटे से चयन के लिए कथित फर्जी ताइक्वांडो प्रमाण-पत्र बनवाने के मामले में जालोर जिले के रानीवाड़ा क्षेत्र के ढोलाराम समेत चार आरोपियों ने सरेंडर किया है। एसओजी के अनुसार, 26 अक्टूबर 2026 को सरेंडर करने वालों में नागौर के शारीरिक शिक्षक रामचंद्र बेनीवाल, बाड़मेर की देवी विश्नोई और बालोतरा के विकास कुमार भी शामिल हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान में तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2022 के खेल कोटे से चयन को लेकर कथित फर्जीवाड़े के मामले में एसओजी की कार्रवाई जारी है। इस मामले में जालोर जिले के रानीवाड़ा क्षेत्र के करवाड़ा निवासी ढोलाराम सहित चार आरोपियों ने 26 अक्टूबर 2026 को सरेंडर किया। अन्य आरोपियों में नागौर के शारीरिक शिक्षक रामचंद्र बेनीवाल, बाड़मेर की देवी विश्नोई और बालोतरा के विकास कुमार शामिल हैं। एसओजी अब आरोपियों से कथित फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार करवाने, पैसों के लेन-देन और भर्ती प्रक्रिया में उनकी भूमिका को लेकर पूछताछ कर रही है।
खेल कोटे से चयन के लिए प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, दुर्गापुरा जयपुर ने वर्ष 2022 में तृतीय श्रेणी अध्यापक लेवल-1 भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। भर्ती में खेल कोटे के तहत दो प्रतिशत अभ्यर्थियों का चयन किया जाना था। एसओजी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, ताइक्वांडो खेल प्रमाण-पत्रों के आधार पर 38 अभ्यर्थियों के नाम दो गुना चयन सूची में शामिल हुए थे। चयन प्रक्रिया के दौरान इन अभ्यर्थियों ने शिक्षा विभाग की चयन समिति के समक्ष राष्ट्रीय स्तर के ताइक्वांडो खेल प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए थे।
जांच में आरोप सामने आए कि कुछ अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर दलालों के माध्यम से फर्जी खेल प्रमाण-पत्र हासिल किए थे। इन प्रमाण-पत्रों के सत्यापन के लिए ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया, धनबाद के नाम से मिलती-जुलती फर्जी ई-मेल आईडी का इस्तेमाल कर प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर की नियुक्ति शाखा को सत्यापन रिपोर्ट भेजी गई थी।
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फर्जी ई-मेल से सत्यापन रिपोर्ट भेजने का आरोप
एसओजी ने इस मामले में वर्ष 2024 में मुकदमा दर्ज किया था। जांच के दौरान फर्जी ई-मेल के माध्यम से सत्यापन रिपोर्ट भेजने के आरोप में बिमलेन्दु कुमार झा और उसके साथी कमल सिंह को 7 मई 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद मार्च में राजस्थान पुलिस की मदद से 20 अभ्यर्थियों या आरोपियों, तीन सहयोगियों और एक दलाल को गिरफ्तार किया गया था। अब चार अन्य आरोपियों के सरेंडर के बाद जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
ढोलाराम पर प्रमाण-पत्र के लिए 4 लाख रुपए देने का आरोप
एसओजी की प्रारंभिक जांच के अनुसार, रानीवाड़ा तहसील के करड़ा थाना क्षेत्र के करवाड़ा निवासी ढोलाराम सहित तीन अभ्यर्थियों ने राष्ट्रीय स्तर का ताइक्वांडो प्रमाण-पत्र हासिल करने के लिए कथित तौर पर रकम दी थी। जांच में रोहतक, हरियाणा निवासी सतीश दूल के माध्यम से ढोलाराम, देवी विश्नोई और विकास कुमार को बैकडेट में प्रमाण-पत्र दिलाने के लिए प्रत्येक से चार लाख रुपए लेने का आरोप सामने आया है।
वहीं नागौर जिले के डेह निवासी रामचंद्र बेनीवाल (41), जो वर्तमान में ब्यावर के सिरमा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पदस्थापित हैं, की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि उन्होंने पहले गिरफ्तार किए गए अभ्यर्थियों में से प्रत्येक से पांच लाख रुपए लेकर बैकडेट में ताइक्वांडो खेल प्रमाण-पत्र उपलब्ध करवाए थे। जांच में यह बात भी सामने आई कि करीब तीन साल पहले खेल कोटे से नौकरी पाने के इच्छुक अभ्यर्थियों को प्रमाण-पत्र दिलाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 60 हजार रुपए देने की बात कही गई थी।
रामचंद्र बेनीवाल पुलिस रिमांड पर
एसओजी के अनुसार, चारों आरोपियों ने 26 अक्टूबर को सरेंडर किया था। रामचंद्र बेनीवाल को जयपुर महानगर-द्वितीय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें 28 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया। जांच एजेंसी कथित फर्जी प्रमाण-पत्रों की व्यवस्था, बिचौलियों की भूमिका, लेन-देन और भर्ती प्रक्रिया में अन्य लोगों की संलिप्तता की पड़ताल कर रही है। मामले में आरोपों की पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
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खेल कोटे से चयन के लिए प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, दुर्गापुरा जयपुर ने वर्ष 2022 में तृतीय श्रेणी अध्यापक लेवल-1 भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। भर्ती में खेल कोटे के तहत दो प्रतिशत अभ्यर्थियों का चयन किया जाना था। एसओजी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, ताइक्वांडो खेल प्रमाण-पत्रों के आधार पर 38 अभ्यर्थियों के नाम दो गुना चयन सूची में शामिल हुए थे। चयन प्रक्रिया के दौरान इन अभ्यर्थियों ने शिक्षा विभाग की चयन समिति के समक्ष राष्ट्रीय स्तर के ताइक्वांडो खेल प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए थे।
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जांच में आरोप सामने आए कि कुछ अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर दलालों के माध्यम से फर्जी खेल प्रमाण-पत्र हासिल किए थे। इन प्रमाण-पत्रों के सत्यापन के लिए ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया, धनबाद के नाम से मिलती-जुलती फर्जी ई-मेल आईडी का इस्तेमाल कर प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर की नियुक्ति शाखा को सत्यापन रिपोर्ट भेजी गई थी।
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फर्जी ई-मेल से सत्यापन रिपोर्ट भेजने का आरोप
एसओजी ने इस मामले में वर्ष 2024 में मुकदमा दर्ज किया था। जांच के दौरान फर्जी ई-मेल के माध्यम से सत्यापन रिपोर्ट भेजने के आरोप में बिमलेन्दु कुमार झा और उसके साथी कमल सिंह को 7 मई 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद मार्च में राजस्थान पुलिस की मदद से 20 अभ्यर्थियों या आरोपियों, तीन सहयोगियों और एक दलाल को गिरफ्तार किया गया था। अब चार अन्य आरोपियों के सरेंडर के बाद जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
ढोलाराम पर प्रमाण-पत्र के लिए 4 लाख रुपए देने का आरोप
एसओजी की प्रारंभिक जांच के अनुसार, रानीवाड़ा तहसील के करड़ा थाना क्षेत्र के करवाड़ा निवासी ढोलाराम सहित तीन अभ्यर्थियों ने राष्ट्रीय स्तर का ताइक्वांडो प्रमाण-पत्र हासिल करने के लिए कथित तौर पर रकम दी थी। जांच में रोहतक, हरियाणा निवासी सतीश दूल के माध्यम से ढोलाराम, देवी विश्नोई और विकास कुमार को बैकडेट में प्रमाण-पत्र दिलाने के लिए प्रत्येक से चार लाख रुपए लेने का आरोप सामने आया है।
वहीं नागौर जिले के डेह निवासी रामचंद्र बेनीवाल (41), जो वर्तमान में ब्यावर के सिरमा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पदस्थापित हैं, की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि उन्होंने पहले गिरफ्तार किए गए अभ्यर्थियों में से प्रत्येक से पांच लाख रुपए लेकर बैकडेट में ताइक्वांडो खेल प्रमाण-पत्र उपलब्ध करवाए थे। जांच में यह बात भी सामने आई कि करीब तीन साल पहले खेल कोटे से नौकरी पाने के इच्छुक अभ्यर्थियों को प्रमाण-पत्र दिलाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 60 हजार रुपए देने की बात कही गई थी।
रामचंद्र बेनीवाल पुलिस रिमांड पर
एसओजी के अनुसार, चारों आरोपियों ने 26 अक्टूबर को सरेंडर किया था। रामचंद्र बेनीवाल को जयपुर महानगर-द्वितीय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें 28 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया। जांच एजेंसी कथित फर्जी प्रमाण-पत्रों की व्यवस्था, बिचौलियों की भूमिका, लेन-देन और भर्ती प्रक्रिया में अन्य लोगों की संलिप्तता की पड़ताल कर रही है। मामले में आरोपों की पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।