जेडीए की बड़ी तैयारी: 13,254 बकायादार निशाने पर, जानिए 1006 करोड़ वसूलने के लिए क्या है बड़ा प्लान...
जेडीए ने लीज मनी बकायादारों पर सख्ती बढ़ाई है। 13,254 नोटिस जारी किए गए हैं। पुराना बकाया चुकाए बिना नए नक्शे मंजूर नहीं होंगे। 1006 करोड़ रुपए की वसूली बाकी है।
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जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की नजर अब उन बकायादारों पर है, जिन्होंने लीज मनी की रकम लंबे असरे से जमा नहीं करवाई है। जेडीए ने जोनवार बकायादारों का रिकॉर्ड खंगालकर वसूली तेज कर दी है। इस साल ही ऐसे बकाएदारों से 400 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसमें से 18 सितंबर तक 146.26 करोड़ रुपए वसूले जा चुके हैं। जेडीए के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि जिन लीज धारकों की राशि बकाया है उनकी नई प्रॉपर्टी के नक्शे तभी पास किए जाएंगे जब पुरानी बकाया लीज राशि जमा करवा दी जाएगी।
छोटे जोन ने लक्ष्य को पीछे छोड़ा, बड़े जोन पिछड़े
जेडीए ने लीज रकम वसूली के लिए जोनवार सूची तैयार की है। इनमें से कई जोन ऐसे हैं जहां वसूली की जाने वाली रकम बहुत ज्यादा है। जोन-8 को सिर्फ 4 करोड़ रुपए की वसूली का लक्ष्य मिला था, लेकिन यहां 33.43 करोड़ रुपए की वसूली हो चुकी है। यह लक्ष्य का 836 फीसदी है। जोन-22 ने 2 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 2.45 करोड़ और जोन-14 ने 2 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 4.125 करोड़ रुपए वसूल किए हैं।
इसके उलट बड़े जोनों में तस्वीर अलग है। जोन-ए के लिए 115 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक 34.54 करोड़ रुपए ही मिले हैं। जोन-बी में 60 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 5.49 करोड़ और जोन-सी में 105 करोड़ के मुकाबले 10.62 करोड़ रुपए की वसूली हुई है।
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94 हजार से ज्यादा लीज केस अभी लंबित
बकाया वसूली के लिए जेडीए ने अब तक 13,254 नोटिस जनरेट किए हैं। इनमें 5,830 पर ई-साइन हो चुका है, 2,635 नोटिस डिस्पैच किए गए हैं और 1,359 लीज नोटिस जारी हो चुके हैं। जेडीए क्षेत्र में अब तक 1,48,525 प्रॉपर्टी आवंटित हो चुकी हैं। इनमें से 54,160 प्रॉपर्टी को फ्री होल्ड/ओटीएलसी जारी किया जा चुका है, जबकि 94,365 लीज केस अभी लंबित हैं।जोन स्तर पर 54,313 प्रॉपर्टी की एंट्री पूरी हो चुकी है, लेकिन 40,052 प्रकरण अभी बाकी हैं। ऐसे में जेडीए के सामने सिर्फ पैसा वसूलने की चुनौती नहीं है, बल्कि लंबित लीज मामलों को निपटाने का भी दबाव है।
अकेले चार जोन में 500 करोड़ से ज्यादा बकाया
1006.75 करोड़ रुपए के कुल बकाये में सबसे बड़ी हिस्सेदारी जोन-ए की है। यहां करीब 211.98 करोड़ रुपए अटके हैं। जोन-22 में 107.98 करोड़, जोन-सी में 107.48 करोड़ और जोन-14 में 88.31 करोड़ रुपए बकाया हैं।
इन बकायों की वसूली के लिए जेडीए ने नोटिस प्रक्रिया भी तेज की है। अब तक 13,254 नोटिस जनरेट किए गए हैं। इनमें 5,830 पर ई-साइन हो चुके हैं, 2,635 नोटिस डिस्पैच किए गए हैं और 1,359 लीज नोटिस जारी हो चुके हैं।
करोड़ों की वसूली में ये प्रॉपर्टी सबसे आगे
इस साल की वसूली में जोन-8 सबसे आगे रहा है। मंगलम प्लस रियल्टी प्रा. लि. के वेस्ट वे हाइट्स स्थित प्लॉट से 15.64 करोड़ रुपए और वीआरबी ड्रीम होम्स से 14.04 करोड़ रुपए वसूले गए। जोन-ए में लाल कोठी स्थित स्टार कोमोसेल्स प्रा. लि. से 10 करोड़ रुपए और टोंक रोड स्थित कैलाश टावर से 2.40 करोड़ रुपए मिले। जोन-सी में पिनाकी बिल्डटेक से 4.11 करोड़ और मैजेस्टिक इंफ्राबिल्ड एलएलपी से 1.37 करोड़ रुपए की वसूली हुई।