राजस्थान पंचायत चुनाव: बेनीवाल परिवार की सियासी जंग, पैतृक गांव में सरपंच पद के लिए दो सगी बहनें आमने-सामने
नागौर के बरणगांव में सरपंच पद के चुनाव में हनुमान बेनीवाल के बड़े भाइयों की पत्नियां मीरा बेनीवाल और राजबाला बेनीवाल आमने-सामने हैं। सात महिला प्रत्याशियों के बीच मुकाबले में परिवार की 25 साल पुरानी राजनीतिक विरासत और पुराने मतभेद भी चर्चा में हैं।
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राजस्थान की सियासत में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल का पैतृक गांव बरणगांव एक बार फिर चर्चा में है। यहां पंचायत चुनाव में सरपंच पद के लिए दो सगी बहनें आमने-सामने हैं। मीरा बेनीवाल और राजबाला बेनीवाल के बीच मुकाबले ने गांव की सियासत को दिलचस्प बना दिया है। दोनों सांसद हनुमान बेनीवाल के बड़े भाइयों की पत्नियां हैं और अब सरपंच पद के लिए अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रही हैं।
बरणगांव, बूढ़ी और अर्जुनपुरा क्षेत्रों को मिलाकर कुल 2,970 मतदाता हैं। सरपंच पद के लिए सात महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा मीरा बेनीवाल और राजबाला बेनीवाल की हो रही है। मीरा बेनीवाल स्वर्गीय रामप्रसाद बेनीवाल की पत्नी हैं, जबकि राजबाला बेनीवाल प्रेमसुख बेनीवाल की पत्नी हैं।
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रामप्रसाद बेनीवाल गांव की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे थे और करीब 25 साल पहले सरपंच रह चुके थे। अब उनकी पत्नी मीरा बेनीवाल उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के दावे के साथ चुनाव लड़ रही हैं। वहीं, राजबाला बेनीवाल भी स्थानीय मुद्दों और विकास के एजेंडे के साथ मतदाताओं के बीच अपनी दावेदारी पेश कर रही हैं। ऐसे में दो सगी बहनों के बीच चुनावी मुकाबला गांव की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
पुराने पारिवारिक मतभेद भी चर्चा में
इस चुनाव के बीच बेनीवाल परिवार के पुराने राजनीतिक मतभेद भी फिर से चर्चा में हैं। मीरा बेनीवाल और सांसद हनुमान बेनीवाल के बीच लंबे समय से मतभेद होने की चर्चा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में मीरा बेनीवाल की बेटी डॉ. अनीता बेनीवाल ने हनुमान बेनीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
वहीं, खींवसर विधानसभा उपचुनाव में सांसद हनुमान बेनीवाल की पत्नी कनिका बेनीवाल को भी हार मिली थी। इन घटनाओं की पृष्ठभूमि में बरणगांव का सरपंच चुनाव एक बार फिर बेनीवाल परिवार के राजनीतिक समीकरणों और स्थानीय स्तर पर समर्थन को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सात महिला प्रत्याशियों के बीच होने वाले मुकाबले में गांव की जनता किसे सरपंच चुनती है।