Rajasthan: कैंसर के महंगे टीकों पर बड़ा सवाल, राजस्थान के चार जिलों में जांच दलों ने खंगाले रिकॉर्ड; जानें
राजस्थान में कैंसर मरीजों के महंगे टीकों की कालाबाजारी के मामले की जांच चार जिलों में शुरू हुई है। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर के मेडिकल कॉलेजों में टीकों के बैच नंबर, वितरण, खरीद आदेश और मरीजों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कैंसर मरीजों के लाखों रुपये कीमत वाले टीकों की कालाबाजारी के मामले की जांच अब राजस्थान के चार जिलों तक पहुंच गई है। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा से मिली सूचना के बाद राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम लिमिटेड ने छह मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े औषधि भंडारगृहों में जांच शुरू कर दी है। इसके लिए गठित विशेष जांच दल बीकानेर, जयपुर, जोधपुर और उदयपुर के चिकित्सा संस्थानों में टीकों से संबंधित रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं।
जांच के लिए तीन दल गठित
चिकित्सा विभाग ने जांच के लिए तीन दल गठित किए हैं। प्रत्येक दल में एक डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट को शामिल किया गया है। जयपुर स्थित एसएमएस मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर शिप्रा सिंह और फार्मासिस्ट मनीष मित्तल जांच कर रहे हैं। उदयपुर में डॉक्टर भवानी सिंह और फार्मासिस्ट अंकुर गोयल पड़ताल में जुटे हैं। वहीं बीकानेर और जोधपुर में डॉक्टर संदीप कुमार चौहान तथा फार्मासिस्ट देवेंद्र सैन रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं।
पढ़ें: नगर निकाय चुनाव का पूरा शेड्यूल जारी, 9 और 11 सितंबर को वोटिंग; जानें कब होगी मतगणना
जांच दल टीकों के बैच नंबर के आधार पर यह पता लगा रहे हैं कि संबंधित टीके कब अस्पताल पहुंचे और किन मरीजों को लगाए गए। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार टीके पहले भंडारगृह से उप-केंद्रों और फिर अस्पताल के वितरण केंद्र तक पहुंचते हैं। यहां उप-अधीक्षक और संबंधित डॉक्टर की स्वीकृति के बाद मरीज को टीका लगाया जाता है।
रिकॉर्ड और खरीद आदेश भी खंगाले जा रहे
जांच टीम इस आशंका की भी पड़ताल कर रही है कि टीके सीधे वितरण केंद्र से गायब किए गए या फिर असली दवा निकालकर मरीजों को फर्जी टीके लगाए गए। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने टीकों के खरीद आदेश की प्रति और विक्रेता-वितरक से संबंधित रिपोर्ट भी मांगी है।
बीकानेर के सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बीसी घीया को तीन दिन में जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद तथ्यात्मक रिपोर्ट राज्य सरकार को भी भेजी जाएगी।