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जयपुर: विभागीय जांच किए बिना सहायक अभियंता से वसूली पर उच्च न्यायालय की रोक

Tue, 20 Oct 2026 10:52 AM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रतीक पांडेय Updated Tue, 20 Oct 2026 10:52 AM IST
सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत बालाहेड़ा में वर्ष 2014 से 2018 के दौरान हुए विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं के मामले में सहायक अभियंता इंद्राज से की जा रही वित्तीय वसूली पर अंतरिम रोक लगाई है। अदालत ने विभागीय जांच और निर्धारित प्रक्रिया के पालन का मुद्दा उठाने वाली याचिका पर पंचायती राज विभाग के सचिव सहित संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।

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राजस्थान उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान उच्च न्यायालय ने विभागीय जांच किए बिना सहायक अभियंता से की जा रही वित्तीय वसूली की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले में संबंधित प्रशासनिक विभाग और अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। मामला वर्ष 2014 से 2018 के दौरान ग्राम पंचायत बालाहेड़ा में हुए विकास एवं निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
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विकास कार्यों में गड़बड़ी का हवाला देकर वसूली के निर्देश
न्यायाधीश अनूप कुमार की एकलपीठ ने बांदीकुई पंचायत समिति के तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता इंद्राज की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता वर्तमान में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों ने ग्राम पंचायत बालाहेड़ा में हुए विकास एवं निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए उनसे राशि वसूलने के निर्देश दिए थे। निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।
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विभागीय जांच के बिना वसूली शुरू करने पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने अदालत में दलील दी कि राजस्थान सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियम, 1958 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना ही वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी गई। याचिका में कहा गया कि विभागीय जांच किए बिना वित्तीय जिम्मेदारी तय करना नियमों के अनुरूप नहीं है।
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याचिका के अनुसार, करीब 10 साल बाद अचानक तत्कालीन सरपंच, पंचायत सचिव और कर्मचारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय कर दी गई, जबकि याचिकाकर्ता का दावा है कि निर्माण कार्यों में कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी।

प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी
अदालत ने माना कि किसी लोक सेवक पर वित्तीय देयता निर्धारित करने से पहले संबंधित सेवा नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन आवश्यक है। इसी आधार पर एकलपीठ ने याचिकाकर्ता से की जा रही वसूली की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी।


पंचायती राज विभाग के अधिकारियों से जवाब तलब
हाईकोर्ट ने मामले में पंचायती राज विभाग के सचिव, दौसा के जिला प्रमुख और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से जवाब मांगा है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित अधिकारियों के जवाब और अदालत में होने वाली सुनवाई के आधार पर तय होगी।
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