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राजस्थान: न्यायिक परिसरों में लागू किए कचरा प्रबंधन के नए नियम, सिंगल-यूज प्लास्टिक पर रोक
Sun, 18 Oct 2026 10:09 AM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Sun, 18 Oct 2026 10:09 AM IST
सार
राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी न्यायिक परिसरों और न्यायिक अधिकारियों की आवासीय कॉलोनियों के लिए ठोस कचरा प्रबंधन के नए नियम लागू किए हैं। नई व्यवस्था के तहत सिंगल यूज प्लास्टिक और डिस्पोजेबल प्लास्टिक पर प्रतिबंध रहेगा।
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राजस्थान हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी न्यायिक परिसरों तथा न्यायिक अधिकारियों की आवासीय कॉलोनियों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ठोस कचरा प्रबंधन के नए नियम लागू कर दिए हैं। उच्च न्यायालय ने इस संबंध में एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है। यह नई व्यवस्था 'राजस्थान हाईकोर्ट सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026' को लागू करने तथा उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जारी हुई है। इसके तहत सभी अदालती परिसरों में सिंगल यूज प्लास्टिक तथा डिस्पोजेबल प्लास्टिक के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।
कचरे का चार श्रेणियों में निस्तारण
नई मानक संचालन प्रक्रिया के अंतर्गत कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। प्रशासन परिसरों तथा कॉलोनियों में गीले, सूखे, सेनेटरी और विशेष कचरे को एकत्र करने के लिए रंग-आधारित कूड़ेदान लगाएगा। परिसरों में खुले स्थान पर कचरा फेंकने अथवा कचरे को जलाने जैसी गतिविधियों पर सख्त रोक रहेगी और ऐसा करने वाले कर्मचारियों पर प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा। इसके साथ ही कागजों की खपत कम करने के उद्देश्य से ई-फाइलिंग तथा डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को तेजी से बढ़ावा दिया जाएगा।
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निगरानी समितियां और विशेष प्रशिक्षण
इस पूरी व्यवस्था और नियमों का सही अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी समितियां बनाई गई हैं। ये समितियां हर तीन महीने में ठोस कचरा प्रबंधन के कार्यों की विस्तृत समीक्षा करेंगी। इसके साथ ही नियुक्त नोडल अधिकारी हर तीन महीने में अपनी प्रगति रिपोर्ट सौंपेंगे।
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इस नई व्यवस्था के अंतर्गत राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी सभी संबंधित न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कचरा प्रबंधन और स्वच्छता संबंधी नियमों का विशेष प्रशिक्षण प्रदान करेगी।
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कचरे का चार श्रेणियों में निस्तारण
नई मानक संचालन प्रक्रिया के अंतर्गत कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। प्रशासन परिसरों तथा कॉलोनियों में गीले, सूखे, सेनेटरी और विशेष कचरे को एकत्र करने के लिए रंग-आधारित कूड़ेदान लगाएगा। परिसरों में खुले स्थान पर कचरा फेंकने अथवा कचरे को जलाने जैसी गतिविधियों पर सख्त रोक रहेगी और ऐसा करने वाले कर्मचारियों पर प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा। इसके साथ ही कागजों की खपत कम करने के उद्देश्य से ई-फाइलिंग तथा डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को तेजी से बढ़ावा दिया जाएगा।
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निगरानी समितियां और विशेष प्रशिक्षण
इस पूरी व्यवस्था और नियमों का सही अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी समितियां बनाई गई हैं। ये समितियां हर तीन महीने में ठोस कचरा प्रबंधन के कार्यों की विस्तृत समीक्षा करेंगी। इसके साथ ही नियुक्त नोडल अधिकारी हर तीन महीने में अपनी प्रगति रिपोर्ट सौंपेंगे।
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इस नई व्यवस्था के अंतर्गत राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी सभी संबंधित न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कचरा प्रबंधन और स्वच्छता संबंधी नियमों का विशेष प्रशिक्षण प्रदान करेगी।