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Vandana Dhavate: दुनिया की सबसे कठिन साइकिल रेस में पहली बार क्वालिफाई हुई भारतीय महिला, जानें इनकी कहानी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिखर बरनवाल
Updated Sun, 22 Feb 2026 04:57 PM IST
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सार
First Indian Woman RAAM Qualifier: दुनिया की सबसे कठिन साइकिल रेस ''रेस अक्रॉस अमेरिका'' में पहली बार किसी भारतीय महिला ने क्वालीफाई किया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि उन्होंने साइकिलिंग लॉकडाउन के दौरान अपने मानसिक स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए शुरू किया था, और आज दुनिया भर में उनकी पहचान एक साइकिलिस्ट के तौर बन रही है।
वंदना धवते साइक्लिस्ट
- फोटो : Instagram/ @vandana_d29
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विस्तार
Vandana Dhavate Cyclist: साहस और संकल्प की कहानियां अक्सर विपरीत परिस्थितियों की कोख से ही जन्म लेती हैं। लॉकडाउन के समय में अपने मानसिक तनाव को दूर करने के लिए हैदराबाद की वंदना धवते में साइकिल चलाना शुरू किया और आज वो दुनिया की सबसे कठिन साइकिल रेस के लिए क्वालीफाई कर ली हैं। वंदना धवते 'रेस अक्रॉस अमेरिका' के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं।
यह रेस दुनिया की सबसे कठिन 'अल्ट्रा-एंड्योरेंस' साइकिलिंग प्रतियोगिताओं में से एक मानी जाती है, जिसमें लगभग 4,800 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। एक साधारण हॉर्टिकल्चरिस्ट (बागवानी विशेषज्ञ) से वैश्विक स्तर की एथलीट बनने तक का उनका यह सफर केवल शारीरिक क्षमता का नहीं, बल्कि अटूट मानसिक साहस और जुनून की एक जीवंत मिसाल है।
वंदना धवते के बारे में जानें--
बता दें कि वंदना मूल रूप से महाराष्ट्र की रहने वाली हैं, लेकिन वर्तमान में वह लंबे समय से हैदराबाद में बसी हुई हैं। 'रेस अक्रॉस अमेरिका' (RAAM) के लिए वे जून 2026 में अमेरिका जाएंगी। वंदना धवते पेशेवर रूप से एक हॉर्टीकल्चरिस्ट हैं। 48 वर्षीय वंदना के इस कठिन सफर में उनका परिवार उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
उनके परिवार में उनके पति, उनका 18 वर्षीय बेटा है, जो उनकी ट्रेनिंग और रेस के दौरान उनका पूरा सहयोग करते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वंदना अब तक कुल 78,772 किलोमीटर से अधिक की दूरी साइकिल से तय कर चुकी हैं। उन्होंने फ्रांस में होने वाली प्रतिष्ठित 'पेरिस-ब्रेस्ट-पेरिस' (1200 किमी) रेस भी 2023 में भी शामिल हो चुकी हैं।
लॉकडाउन का तनाव और साइकिलिंग की शुरुआत
वंदना का यह सफर किसी पेशेवर खिलाड़ी के रूप में नहीं, बल्कि एक थेरेपी के रूप में शुरू हुआ था। साल 2020 में लॉकडाउन के दौरान जब हर तरफ अनिश्चितता थी, तब मानसिक शांति की तलाश में उन्होंने घर से बाहर निकलकर साइकिल चलाना शुरू किया। शुरुआत में यह केवल कुछ किलोमीटर की सैर थी, लेकिन धीरे-धीरे पैडल मारते हुए उन्हें अपने भीतर एक नई ऊर्जा और साहस का अनुभव हुआ। उन्होंने महसूस किया कि हर चढ़ाई उन्हें और अधिक मजबूत बना रही है।
हॉर्टिकल्चरिस्ट से 'अल्ट्रा-साइक्लिस्ट' का सफर
पेशे से पौधों और प्रकृति के बीच रहने वाली वंदना के लिए खेल की दुनिया बिल्कुल नई थी। एक बागवानी विशेषज्ञ के रूप में दिन बिताने वाली वंदना ने रात के अंधेरे और सुबह की पहली किरण के साथ सड़कों पर पसीना बहाना शुरू किया। उनका समर्पण ऐसा था कि उन्होंने घंटों तक बिना सोए साइकिल चलाने का कठिन अभ्यास जारी रखा।
RAAM: दुनिया की सबसे कठिन रेस की चुनौती
वंदना ने जब 'रेस अक्रॉस अमेरिका' के लिए क्वालीफाई किया, तो उन्होंने इतिहास रच दिया। यह रेस अमेरिका के पश्चिमी तट से पूर्वी तट तक फैली है, जिसमें साइक्लिस्ट को ऊंचे पहाड़ों, तपते रेगिस्तानों और विपरीत मौसम का सामना करना पड़ता है। इसमें नींद की कमी और शारीरिक थकान के बावजूद साइकिल चलानी होती है। वंदना की यह उपलब्धि भारतीय महिलाओं के लिए एक नई प्रेरणा है, जो साबित करती है कि भारतीय महिलाएं वैश्विक खेलों में किसी से पीछे नहीं हैं। वंदना धवते की कहानी हमें सिखाती है कि बाधाएं केवल हमारे दिमाग में होती हैं। आज वह न केवल एक सफल साइक्लिस्ट हैं, बल्कि लाखों महिलाओं के लिए आशा की किरण भी हैं।
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यह रेस दुनिया की सबसे कठिन 'अल्ट्रा-एंड्योरेंस' साइकिलिंग प्रतियोगिताओं में से एक मानी जाती है, जिसमें लगभग 4,800 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। एक साधारण हॉर्टिकल्चरिस्ट (बागवानी विशेषज्ञ) से वैश्विक स्तर की एथलीट बनने तक का उनका यह सफर केवल शारीरिक क्षमता का नहीं, बल्कि अटूट मानसिक साहस और जुनून की एक जीवंत मिसाल है।
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वंदना धवते के बारे में जानें--
बता दें कि वंदना मूल रूप से महाराष्ट्र की रहने वाली हैं, लेकिन वर्तमान में वह लंबे समय से हैदराबाद में बसी हुई हैं। 'रेस अक्रॉस अमेरिका' (RAAM) के लिए वे जून 2026 में अमेरिका जाएंगी। वंदना धवते पेशेवर रूप से एक हॉर्टीकल्चरिस्ट हैं। 48 वर्षीय वंदना के इस कठिन सफर में उनका परिवार उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
उनके परिवार में उनके पति, उनका 18 वर्षीय बेटा है, जो उनकी ट्रेनिंग और रेस के दौरान उनका पूरा सहयोग करते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वंदना अब तक कुल 78,772 किलोमीटर से अधिक की दूरी साइकिल से तय कर चुकी हैं। उन्होंने फ्रांस में होने वाली प्रतिष्ठित 'पेरिस-ब्रेस्ट-पेरिस' (1200 किमी) रेस भी 2023 में भी शामिल हो चुकी हैं।
लॉकडाउन का तनाव और साइकिलिंग की शुरुआत
वंदना का यह सफर किसी पेशेवर खिलाड़ी के रूप में नहीं, बल्कि एक थेरेपी के रूप में शुरू हुआ था। साल 2020 में लॉकडाउन के दौरान जब हर तरफ अनिश्चितता थी, तब मानसिक शांति की तलाश में उन्होंने घर से बाहर निकलकर साइकिल चलाना शुरू किया। शुरुआत में यह केवल कुछ किलोमीटर की सैर थी, लेकिन धीरे-धीरे पैडल मारते हुए उन्हें अपने भीतर एक नई ऊर्जा और साहस का अनुभव हुआ। उन्होंने महसूस किया कि हर चढ़ाई उन्हें और अधिक मजबूत बना रही है।
हॉर्टिकल्चरिस्ट से 'अल्ट्रा-साइक्लिस्ट' का सफर
पेशे से पौधों और प्रकृति के बीच रहने वाली वंदना के लिए खेल की दुनिया बिल्कुल नई थी। एक बागवानी विशेषज्ञ के रूप में दिन बिताने वाली वंदना ने रात के अंधेरे और सुबह की पहली किरण के साथ सड़कों पर पसीना बहाना शुरू किया। उनका समर्पण ऐसा था कि उन्होंने घंटों तक बिना सोए साइकिल चलाने का कठिन अभ्यास जारी रखा।
RAAM: दुनिया की सबसे कठिन रेस की चुनौती
वंदना ने जब 'रेस अक्रॉस अमेरिका' के लिए क्वालीफाई किया, तो उन्होंने इतिहास रच दिया। यह रेस अमेरिका के पश्चिमी तट से पूर्वी तट तक फैली है, जिसमें साइक्लिस्ट को ऊंचे पहाड़ों, तपते रेगिस्तानों और विपरीत मौसम का सामना करना पड़ता है। इसमें नींद की कमी और शारीरिक थकान के बावजूद साइकिल चलानी होती है। वंदना की यह उपलब्धि भारतीय महिलाओं के लिए एक नई प्रेरणा है, जो साबित करती है कि भारतीय महिलाएं वैश्विक खेलों में किसी से पीछे नहीं हैं। वंदना धवते की कहानी हमें सिखाती है कि बाधाएं केवल हमारे दिमाग में होती हैं। आज वह न केवल एक सफल साइक्लिस्ट हैं, बल्कि लाखों महिलाओं के लिए आशा की किरण भी हैं।

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