Himachal Weather: हिमाचल में रफ्तार पकड़ेगा मानसून, चार दिन झमाझम बरसेंगे बादल, कई भागों के लिए ऑरेंज अलर्ट
राज्य के अधिकतर भागों में लगातार चार दिन झमाझम बारिश होने का पूर्वानुमान है। कई भागों में दो दिन भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
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हिमाचल प्रदेश में मानसून फिर रफ्तार पकड़ेगा। राज्य के अधिकतर भागों में लगातार चार दिन झमाझम बारिश होने का पूर्वानुमान है। कई भागों में दो दिन भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पिछले दो तीन दिनों से प्रदेश में मानसून कमजोर रहा है। इसके चलते उमस बढ़ गई है। शिमला में भी गर्मी से पसीने छूट रहे हैं। आज राजधानी सहित आसपास भागों में धूप खिलने के साथ हल्के बादल छाए हुए हैं।
21 जुलाई तक ऐसा रहेगा माैसम
माैसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 15 और 16 जुलाई को राज्य में छिटपुट जगहों पर हल्की बारिश और 17 जुलाई को कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। इसके बाद 18 से 21 जुलाई तक राज्य के ज्यादातर हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 18 और 19 जुलाई को कुछ जगहों पर भारी बारिश और 20 और 21 जुलाई को कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश होने होने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

तापमान में आएगा बदलाव
अगले 4-5 दिनों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। वहीं राज्य के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान 2-4 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। राज्य में कई जगहों पर अधिकतम तापमान सामान्य से 2-3 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था, जबकि कुछ जगहों पर यह सामान्य या सामान्य के आसपास था। ऊंचे पहाड़ी इलाकों में यह 21 से 28 डिग्री सेल्सियस, मध्यम पहाड़ी इलाकों में 25-34 डिग्री सेल्सियस और निचले पहाड़ी इलाकों या मैदानी इलाकों में 30-36 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा।
किन्नौर के याशंग गांव में भूस्खलन, खतों, बगीचों को नुकसान
किन्नौर जिले की चगांव पंचायत के याशंग गांव में बुधवार सुबह लौदांग पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा अचानक दरक गया। इस भूस्खलन से खेतों, बगीचों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। भूस्खलन से स्थानीय ग्रामीण विजय पाल के खेतों और बगीचों को भारी क्षति हुई है। गांव को जोड़ने वाली संपर्क सड़क मलबे से बंद हो गई है, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। पेयजल की मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से गांव में जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जलविद्युत परियोजना के कारण पहाड़ कमजोर हुए हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से भूस्खलन की विशेषज्ञों से वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है। प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिए जाना चाहिए। साथ ही, क्षेत्र की सुरक्षा के लिए स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई है।
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