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Jyeshtha Purnima 2026: आज पुरुषोत्तम मास पूर्णिमा पर इन स्थानों पर जरूर जलाएं दीप, खूब आएगी सुख-समृद्धि
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Vinod Shukla
Updated Sun, 31 May 2026 12:11 AM IST
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सार
Jyeshtha Purnima 2026: इस वर्ष अधिक मास पड़ने के कारण ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर कुछ उपाय करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा मिलती है।
हिंदू धर्म में पूर्णिमा का महत्व
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Jyeshtha Purnima 2026: सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास को अत्यंत पुण्यदायी और भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। इस मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन स्नान, दान, जप, तप और दीपदान करने से अनेक गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। पुराणों में वर्णित है कि पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर संध्या समय श्रद्धा और विधिपूर्वक दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है तथा मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
तुलसी के पौधे के पास जलाएं दीपक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी माता को भगवान विष्णु की प्रिय माना गया है। पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर संध्या के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक परेशानियां दूर होने लगती हैं। मान्यता है कि तुलसी के समीप किया गया दीपदान विशेष पुण्य प्रदान करता है।
घर के मुख्य द्वार पर
वास्तु और धार्मिक दृष्टि से घर का मुख्य द्वार ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। पुरुषोत्तम पूर्णिमा की शाम मुख्य द्वार के दोनों ओर दीपक जलाने से नकारात्मकता दूर होती है और मां लक्ष्मी का आगमन होता है। मान्यता है कि प्रकाश समृद्धि और शुभता का प्रतीक है, इसलिए मुख्य द्वार पर दीपक अवश्य जलाना चाहिए।
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पूजा घर में
इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के बाद पूजा स्थल में घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना गया है। दीपक की लौ को ज्ञान, पवित्रता और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। पुराणों के अनुसार भगवान के समक्ष दीप प्रज्वलित करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
धार्मिक ग्रंथों में पीपल वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना गया है। पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर संध्या समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल या घी का दीपक जलाने से विष्णु कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है और जीवन में आने वाली अनेक बाधाएं दूर होती हैं।
नदी, सरोवर या जलाशय के किनारे दीपदान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा तिथि पर नदी या किसी पवित्र जलाशय के किनारे दीपदान करना अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। यदि संभव हो तो संध्या समय किसी नदी, तालाब या सरोवर के तट पर दीपक जलाएं। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि बढ़ती है।
मंदिर में करें दीप अर्पित
पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर भगवान विष्णु या लक्ष्मी-नारायण मंदिर में दीपक अर्पित करना भी शुभ माना गया है। मान्यता है कि मंदिर में किया गया दीपदान व्यक्ति के संचित पापों को कम करने और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। साथ ही भगवान की कृपा से परिवार में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
तुलसी के पौधे के पास जलाएं दीपक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी माता को भगवान विष्णु की प्रिय माना गया है। पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर संध्या के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक परेशानियां दूर होने लगती हैं। मान्यता है कि तुलसी के समीप किया गया दीपदान विशेष पुण्य प्रदान करता है।
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घर के मुख्य द्वार पर
वास्तु और धार्मिक दृष्टि से घर का मुख्य द्वार ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। पुरुषोत्तम पूर्णिमा की शाम मुख्य द्वार के दोनों ओर दीपक जलाने से नकारात्मकता दूर होती है और मां लक्ष्मी का आगमन होता है। मान्यता है कि प्रकाश समृद्धि और शुभता का प्रतीक है, इसलिए मुख्य द्वार पर दीपक अवश्य जलाना चाहिए।
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पूजा घर में
इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के बाद पूजा स्थल में घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना गया है। दीपक की लौ को ज्ञान, पवित्रता और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। पुराणों के अनुसार भगवान के समक्ष दीप प्रज्वलित करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
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पीपल वृक्ष के नीचेधार्मिक ग्रंथों में पीपल वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना गया है। पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर संध्या समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल या घी का दीपक जलाने से विष्णु कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है और जीवन में आने वाली अनेक बाधाएं दूर होती हैं।
नदी, सरोवर या जलाशय के किनारे दीपदान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा तिथि पर नदी या किसी पवित्र जलाशय के किनारे दीपदान करना अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। यदि संभव हो तो संध्या समय किसी नदी, तालाब या सरोवर के तट पर दीपक जलाएं। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि बढ़ती है।
मंदिर में करें दीप अर्पित
पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर भगवान विष्णु या लक्ष्मी-नारायण मंदिर में दीपक अर्पित करना भी शुभ माना गया है। मान्यता है कि मंदिर में किया गया दीपदान व्यक्ति के संचित पापों को कम करने और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। साथ ही भगवान की कृपा से परिवार में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।