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कब है अजा एकादशी, जानिए तिथि, महत्व और पूजा का शुभ मुहूर्त

Mon, 31 Aug 2026 07:52 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 31 Aug 2026 07:52 PM IST
सार

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा बहुत ही लाभकारी मानी जाती है।

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aja ekadashi 2026 date tithi puja shubh muhurat importance significance
अजा एकादशी व्रत 2026 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। यह तिथि भगवान विष्णु की पूजा-आराधना के लिए बेहद ही खास मानी जाती है। साल भर में कुल 24 एकादशी आती हैं। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अजा एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने और व्रत रखने से पापों का नाश होता है, साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि आती  है। आइए जानते हैं कब है अजा एकादशी तिथि, महत्व और पूजा शुभ मुहूर्त। 
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अजा एकादशी तिथि 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, अजा एकादशी तिथि की शुरुआत 6 सितंबर को शाम 7 बजकर 29 मिनट से होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 7 सितंबर को शाम 5 बजकर 3 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा। 
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एकादशी व्रत पारण 
अजा एकादशी व्रत का पारण का समय 8 सितंबर को सुबह 6 बजकर 82 मिनट से लेकर 8 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।

अजा एकादशी पूजा-विधि
- इस एकादशी पर सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- स्नाने के बाद साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर सूर्यदेव को अर्घ्य देते हुए भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- फिर पूजा स्थल पर चौकी रखें और भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करें। 
- इसके बाद भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले वस्त्र, चंदन, अक्षत, तुलसी दल, फल और नैवेद्य अर्पित करें। 
- फिर दीपक जलाकर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें और विष्णु सहस्त्रनाम मंत्र का पाठ करें। 
- अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और अगले दिन द्वादशी तिथि पर व्रत का पालन करें। 

अजा एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अजा एकादशी पर व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को पूर्व जन्मों और पाप कर्मों से मुक्ति मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और पाठ करने से जीवन में सुख-समृद्दि की प्राप्ति होती है। 
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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