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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Chaitra Navratri 2026 Day 7 Maa Kalratri katha in hindi

Maa Kalratri Katha In Hindi: नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की कथा का करें पाठ, दूर होंगी समस्याएं

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Megha Kumari Updated Wed, 25 Mar 2026 05:29 AM IST
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सार

Maa Kalratri Katha In Hindi: नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि के इस दिव्य स्वरूप की पूजा की जाती है। इसके प्रभाव से साधक को सभी नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती हैं।

Chaitra Navratri 2026 Day 7 Maa Kalratri katha in hindi
Maa Kalratri Katha In Hindi - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

Maa Kalratri Katha In Hindi: आज, चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन है। सप्तमी तिथि पर देवी दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि का संबंध शनि ग्रह से भी माना जाता है। इसलिए देवी की उपासना करने से शनि के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं और जीवन में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि की सप्तमी पर मां कालरात्रि को गुड़ और हलवे का भोग लगाने से जीवन में समृद्धि और संतोष का भाव बढ़ता है। साथ ही मां शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं। आइए देवी से जुड़ी कथा को जानते हैं।

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मां कालरात्रि की पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज जैसे अत्याचारी राक्षसों ने तीनों लोकों में आतंक मचा रखा था, तब देवी ने कालरात्रि का रूप धारण किया था। कहते हैं कि, देवी का यह स्वरूप इतना प्रचंड था कि उनके प्रकोप से दुष्ट शक्तियां कांप उठीं। वहीं रक्तबीज नामक राक्षस की विशेषता यह थी कि उसके रक्त की हर बूंद से एक नया राक्षस उत्पन्न हो जाता था। ऐसे में मां कालरात्रि ने अपनी शक्ति से उसका संहार किया और उसके रक्त को धरती पर गिरने से रोक दिया। इस प्रकार उन्होंने न केवल देवताओं की रक्षा की, बल्कि पूरे संसार को भय और अधर्म से मुक्त किया। कहते हैं कि, अगर सच्चे भाव से देवी की पूजा-अर्चना की जाए, तो साधक को सभी नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती हैं।
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मां कालरात्रि की आरती 

कालरात्रि जय-जय-महाकाली ।
काल के मुह से बचाने वाली ॥

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा ।
महाचंडी तेरा अवतार ॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा ।
महाकाली है तेरा पसारा ॥

खडग खप्पर रखने वाली ।
दुष्टों का लहू चखने वाली ॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा ।
सब जगह देखूं तेरा नजारा ॥

सभी देवता सब नर-नारी ।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी ॥

रक्तदंता और अन्नपूर्णा ।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना ॥

ना कोई चिंता रहे बीमारी ।
ना कोई गम ना संकट भारी ॥

उस पर कभी कष्ट ना आवें ।
महाकाली मां जिसे बचाबे ॥

तू भी भक्त प्रेम से कह ।
कालरात्रि मां तेरी जय ॥

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

 

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