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Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू, चार माह तक नहीं हो सकेंगे कोई भी शुभ काम
Mon, 06 Jul 2026 02:23 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 06 Jul 2026 02:23 PM IST
सार
Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं, जिससे चार महीनों तक किसी भी तरह का शुभ कार्य करना वर्जित हो जाता है।
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Chaturmas 2026: देवशयनी एकादशी पर शुरू होगा चातुर्मास
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Devshayani Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में हर एक पक्ष में आने वाला एकादशी का विशेष महत्व होता है। सालभर में कुल 24 एकादशी का व्रत रखा जाता है और एकादशी का अपना महत्व और कथा होती है। सभी एकादशी तिथियों में आषाढ़ माह में आने वाली एकादशी का विशेष महत्व होता है। इस एकादशी को देवशयनी और हरिशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु को विशेष रूप से पूजा होती है। देवशयनी एकादशी पर सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं, फिर ये कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन जागते हैं। इन चार महीनों के दौरान भगवान विष्णु मां लक्ष्मी संग योगनिद्रा में होने के कारण सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव के कंधों में होता है। आइए जानते हैं देशशयनी एकादशी तिथि, पूजा मुहूर्त, धार्मिक महत्व और शुभ योगों के बारे में विस्तार से।
देवशयनी एकादशी तिथि 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की देवशयनी एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जुलाई को सुबह 09 बजकर 14 मिनट से हो जाती है और तिथि का समापन 25 जुलाई को सुबह 11 बजकर 36 मिनट तक रहती है। आषाढ़ माह की देवशयनी एकादशी का पारण मुहूर्त 26 जुलाई को सुबह 05 बजकर 38 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 22 मिनट तक रहेगा।
देवशयनी एकादशी 2026 दुर्लभ योग
उदयातिथि के आधार पर इस वर्ष देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को है और इस दिन कई तरह के शुभ योगों का निर्माण होने वाला है। पंचांग के अनुसार, देवशयनी एकादशी पर कई तरह के शुभ और मंगलकारी योग बन रहे हैं, जिसमें ब्रह्रा और इंद्र योग है। इस एकादशी पर इसके अलावा शिववास योग भी बनेगा, जिसे भगवान विष्णु की पूजा का महत्व काफी बढ़ गया है। इससे जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।
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चातुर्मास 2026
हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व होता है। चातुर्मास की शुरुआत देवशयनी एकादशी से होती है, जो देवउठनी एकादशी पर समाप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास में किसी भी तरह का शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मंडन, सगाई और नए कार्य का शुंभारंभ वर्जित होता है। इस वर्ष चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई 2026 से होगी जो, 20 नवंबर तक चलेगा। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने पर फिर से शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं।
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देवशयनी एकादशी तिथि 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की देवशयनी एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जुलाई को सुबह 09 बजकर 14 मिनट से हो जाती है और तिथि का समापन 25 जुलाई को सुबह 11 बजकर 36 मिनट तक रहती है। आषाढ़ माह की देवशयनी एकादशी का पारण मुहूर्त 26 जुलाई को सुबह 05 बजकर 38 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 22 मिनट तक रहेगा।
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देवशयनी एकादशी 2026 दुर्लभ योग
उदयातिथि के आधार पर इस वर्ष देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को है और इस दिन कई तरह के शुभ योगों का निर्माण होने वाला है। पंचांग के अनुसार, देवशयनी एकादशी पर कई तरह के शुभ और मंगलकारी योग बन रहे हैं, जिसमें ब्रह्रा और इंद्र योग है। इस एकादशी पर इसके अलावा शिववास योग भी बनेगा, जिसे भगवान विष्णु की पूजा का महत्व काफी बढ़ गया है। इससे जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।
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चातुर्मास 2026
हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व होता है। चातुर्मास की शुरुआत देवशयनी एकादशी से होती है, जो देवउठनी एकादशी पर समाप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास में किसी भी तरह का शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मंडन, सगाई और नए कार्य का शुंभारंभ वर्जित होता है। इस वर्ष चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई 2026 से होगी जो, 20 नवंबर तक चलेगा। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने पर फिर से शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं।