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हरतालिका तीज 2026: इस एक उपाय से पूरी होंगी मनोकामनाएं, भाग्य का भी खुलेगा द्वार

Tue, 08 Sep 2026 10:31 AM IST
मेघा कुमारी ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: मेघा कुमारी Updated Tue, 08 Sep 2026 10:31 AM IST
सार

Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर उपासना उपवास करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती हैं। साथ ही संतान सुख से लेकर प्रेम जीवन मधुरमय बनता है। आइए इस दिन के महत्व और सरल उपाय को जानते हैं।
 

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हरतालिका तीज व्रत 2026 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Hartalika Teej 2026: इस साल हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन चित्रा नक्षत्र और ब्रह्म योग का शुभ संयोग बना रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज का दिन भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। इस दिन पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य बढ़ता है। वहीं, इस शुभ मौके पर पूजा के अलावा महिलाओं को शिव चालीसा का पाठ भी जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि शिव चालीसा के पाठ से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सुख बढ़ता है। साथ ही भगवान शिव अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। आइए जानते हैं शिव चालीसा के पाठ से जुड़े लाभ और नियम।

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शिव चालीसा के लाभ और नियम
हरतालिका तीज के दिन सुबह भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। इसके बाद शिवलिंग का अभिषेक करने के बाद शिव चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और संतान सुख की कामना भी पूरी हो सकती है। कहते हैं कि, इस दिन किए गए पाठ से घर में सुख-शांति बनी रहती है और सकारात्मकता का संचार होता है। साथ ही मानसिक तनाव कम होने और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ने की भी मान्यता है। 
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शिव चालीसा पाठ

।।दोहा।।

श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
  
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला॥
भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुंडल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुंडमाल तन छार लगाये॥
वस्त्र खाल बाघंबर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥
मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नंदि गणेश सोहै तहं कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महं मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ह दया तहं करी सहाई। नीलकंठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शंभु सहाई॥
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पंडित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥
कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥
 
॥दोहा॥
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमंत ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥ 

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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