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Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या आज, जानिए मौन व्रत का महत्व और आध्यात्मिक लाभ

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 18 Jan 2026 01:04 AM IST
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सार

Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करने का खास महत्व होता है। साथ ही इस दिन मौन व्रत रखा जाता है। आइए जानते हैं मौन व्रत रखने के लाभ।

Mauni Amavasya Kab Hai Date 18 January Significance of Maun Vrat and Spiritual Benefits
मौनी अमावस्या का महत्व - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Mauni Amavasya 2026: सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। वर्ष 2026 में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह तिथि केवल स्नान, दान और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि मौन, संयम और आत्मचिंतन की साधना से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन मन, वाणी और कर्म- तीनों की शुद्धि का श्रेष्ठ अवसर माना गया है।
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क्या है मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व
  • मौनी अमावस्या माघ मास की अमावस्या तिथि को आती है। शास्त्रों में इस दिन पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा, यमुना और संगम में स्नान का अत्यंत पुण्यदायी फल बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन किया गया स्नान व्यक्ति को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्त करता है और मोक्ष की ओर अग्रसर करता है।
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  • पुराणों के अनुसार, पितृ तर्पण और दान-पुण्य के लिए भी यह तिथि विशेष फलदायी मानी गई है। अन्न, वस्त्र, तिल, घी और धन का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
मौनी अमावस्या पर क्यों रखते हैं मौन ?
  • ‘मौनी’ शब्द का अर्थ है मौन धारण करने वाला। वैदिक काल से ही ऋषि-मुनि मौन रहकर तप और साधना किया करते थे। ऋग्वेद और उपनिषदों में मौन को आत्मज्ञान का मार्ग बताया गया है। मान्यता है कि भगवान मनु ने मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखकर सृष्टि की रक्षा का संकल्प लिया था, इसी कारण यह तिथि ‘मौनी’ कहलायी। मौन को वाणी की तपस्या माना गया है, जिससे मन की चंचलता शांत होती है और आत्मा परम चेतना से जुड़ती है।
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मौन रहने के क्या होते हैं आध्यात्मिक और मानसिक लाभ
  • मौनी अमावस्या पर मौन धारण करने से व्यक्ति बाहरी संसार से हटकर अपने भीतर झांकता है। शास्त्रों के अनुसार, मौन से मन के विकार, क्रोध, अहंकार और अशांति का शमन होता है। आज के भागदौड़ भरे जीवन में मौन मानसिक तनाव को कम करता है, एकाग्रता बढ़ाता है और निर्णय क्षमता को मजबूत करता है। धार्मिक मान्यता है कि मौन से वाणी दोष शांत होते हैं और कुंडली के ग्रह दोषों में भी कमी आती है।

मौनी अमावस्या के दिन क्या करें
  • मौनी अमावस्या के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें, यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें। स्नान के बाद मौन व्रत का संकल्प लें, भगवान विष्णु और शिव की पूजा करें। पितरों का स्मरण कर तर्पण करें और जरूरतमंदों को दान दें। दिनभर संयम, सात्त्विक आहार और ध्यान में समय व्यतीत करना विशेष फलदायी माना गया है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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