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आश्विन पूर्णिमा 2026: शुभ योग में शरद पूर्णिमा कल, जानिए पूजा शुभ मुहूर्त, मंत्र और चांद निकलने का समय

Sat, 24 Oct 2026 07:58 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 24 Oct 2026 07:58 PM IST
सार

25 अक्तूबर को शरद पूर्णिमा है। इस दिन चांद अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। आइए जानते हैं खुले आसमान में खीर रखने की परंपरा और चांद निकलने का समय।

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कब है शरद पूर्णिमा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कल शरद पूर्णिमा का पर्व है। हिंदू धर्म में हर वर्ष आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है। सभी पूर्णिमा में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस दिन खुले आसमान के नीचे खीर रखने की परंपरा होती है। वहीं शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं। ऐसे में रात्रि में जागरण करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस बार शरद पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का निर्माण हो रहा है। आइए जानते शरद पूर्णिमा शुभ मुहूर्त, पूजा विधि समेत सभी जानकारी। 
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कब है शरद पूर्णिमा 2026
द्रिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट से शुरू हो चुकी है, जिसका समापन 26 अक्टूबर को सुबह 09 बजकर 41 मिनट पर खत्म होगी। ऐसे में शरद पूर्णिमा 25 को मनाई जाएगी और पूर्णिमा स्नान और दान 26 अक्टूबर को होगा। 
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शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय का समय 
शरद पूर्णिमा पर चंद्रोदय का समय - 25 अक्टूबर को शामम 05 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। 

शरद पूर्णिमा 2026 में खीर रखने का शुभ समय
द्रिक पंचांग के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर खीर रखने का शुभ समय 25 अक्टूबर को रात 08 बजकर 30 मिनट से लेकर मध्यरात्रि 11 बजकर 30 मिनट के बीच रख सकते हैं। 

शरद पूर्णिमा पूजा विधि
  • शरद पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद सूर्यदेव और चंद्रदेव का स्मरण कर पूजा-अर्चना करें। कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर की कामना से भी पूजा करती हैं।
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  • रात में मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा में फूल, दीपक, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए श्री सूक्त, कनकधारा स्तोत्र और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना शुभ माना जाता है।
  • शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि चंद्रमा की किरणों से खीर अमृततुल्य हो जाती है।
  • रातभर चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर को अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। मान्यता है कि इससे सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
चंद्रदेव के प्रमुख मंत्र
  • ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः॥
  • ॐ सोम सोमाय नमः॥
मां लक्ष्मी के मंत्र
  • ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
  • ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
  • ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे, विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥
  • ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः॥
  • नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
  • शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते॥
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