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भौम प्रदोष व्रत कथा: जानिए हनुमान जी ने कैसे ली वृद्ध महिला की भक्ति की परीक्षा

Tue, 08 Sep 2026 06:42 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 08 Sep 2026 06:42 AM IST
सार

8 सितंबर 2026 को मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत रखा जाएगा, इसलिए इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। भगवान शिव को समर्पित इस व्रत से जुड़ी एक रोचक कथा भी प्रचलित है, जिसमें भोलेनाथ की कृपा से भक्त के जीवन के संकट दूर होने की मान्यता है।

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Bhaum Pradosh Vrat Katha: How Lord Hanuman Tested His Devotee’s Faith in hindi
Bhaum Pradosh Vrat Katha - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

8 सितंबर 2026, मंगलवार को सितंबर महीने का पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा। मंगलवार के दिन पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन पुष्य नक्षत्र का भी संयोग बन रहा है, जिससे धार्मिक दृष्टि से दिन का महत्व और बढ़ जाता है। मान्यता है कि भौम प्रदोष व्रत श्रद्धा से करने पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की परेशानियों से मुक्ति का मार्ग खुलता है। इस व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा भी बेहद रोचक है, जिसमें भगवान शिव की भक्ति से एक गरीब ब्राह्मण के जीवन में सुख-समृद्धि आने का वर्णन मिलता है। आइए जानते हैं भौम प्रदोष व्रत की कथा और इससे जुड़ी मान्यताएं।

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भौम प्रदोष व्रत कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक समय एक गरीब ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर रहा था। आर्थिक तंगी के कारण परिवार के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया था। लगातार परेशानियों से ब्राह्मण काफी चिंतित रहने लगा।

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अपनी समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए उसने भगवान शिव की आराधना शुरू की और प्रदोष व्रत का संकल्प लिया। वह पूरी श्रद्धा और नियम के साथ भगवान शिव की पूजा करने लगा। उसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव उसके सामने प्रकट हुए और उसकी परेशानी का कारण पूछा।

ब्राह्मण ने भगवान शिव से अपने जीवन के कष्ट दूर करने और परिवार में सुख-समृद्धि आने की प्रार्थना की। तब भगवान शिव ने उसे भौम प्रदोष व्रत करने का महत्व बताया और विधिपूर्वक व्रत रखने का आशीर्वाद दिया।

ब्राह्मण ने भगवान शिव की आज्ञा का पालन करते हुए श्रद्धापूर्वक भौम प्रदोष व्रत रखना शुरू किया। कुछ समय बाद उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगे। आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे कम हुईं और उसे धन-संपत्ति प्राप्त होने लगी। परिवार में सुख-शांति लौटी और उसका जीवन पहले की तुलना में खुशहाल हो गया।

धार्मिक मान्यता है कि मंगलवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत भौम प्रदोष कहलाता है। इसे मंगल ग्रह से जुड़ी परेशानियों को दूर करने वाला भी माना जाता है। मान्यता के अनुसार, इस व्रत और भगवान शिव की पूजा से आर्थिक समस्याओं के साथ वैवाहिक जीवन की परेशानियां, स्वास्थ्य संबंधी कष्ट और दुर्घटना आदि से जुड़ी चिंताओं से राहत मिल सकती है।

भौम प्रदोष व्रत की कथा श्रद्धालुओं को विश्वास, धैर्य और भक्ति का संदेश देती है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करता है और श्रद्धापूर्वक व्रत रखता है, उस पर भोलेनाथ की कृपा बनी रहती है और जीवन के संकटों से उबरने का मार्ग मिलता है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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