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एशियाड: चांदी जीतकर भावुक हुईं मीराबाई चानू, भारत सरकार से की अर्जुन अवॉर्ड की मांग; कहा- मैं सम्मान की हकदार
Wed, 23 Sep 2026 03:48 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Wed, 23 Sep 2026 03:48 PM IST
सार
मीराबाई चानू ने एशियन गेम्स के महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में 198 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक जीता और वर्षों पुराना अपना सपना पूरा किया। पदक जीतने के बाद भावुक मीराबाई ने कहा कि वह लंबे समय से इस पल का इंतजार कर रही थीं और अब उन्हें खुद पर गर्व है।
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मीराबाई चानू
- फोटो : IANS
विस्तार
भारत की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने आखिरकार एशियन गेम्स में पदक जीतने का अपना वर्षों पुराना सपना पूरा कर लिया। बुधवार को महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में मीराबाई ने रजत पदक अपने नाम किया। ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद वह भावुक नजर आईं और उन्होंने कहा कि इस पदक का उन्हें लंबे समय से इंतजार था। पोडियम फिनिश के बाद आईएएनएस से बातचीत में मीराबाई ने कहा, 'आखिरकार मैंने पदक जीत लिया। मैं बहुत खुश हूं कि मुझे रजत मिला है। मैं कई वर्षों से इसका इंतजार कर रही थी। जब से मैंने वेटलिफ्टिंग शुरू की थी, तभी से यह मेरा सपना था। आज आखिरकार मेरा सपना पूरा हो गया।'
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We are so proud of our @mirabai_chanu who is making India proud time and again in Weightlifting events 🇮🇳 https://t.co/Ujl2DnqNkX pic.twitter.com/VPkVYxW7h6
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) September 23, 2026विज्ञापन
मीराबाई चानू
- फोटो : PTI
198 किग्रा वजन उठाकर जीता रजत
32 वर्षीय मीराबाई ने प्रतियोगिता में कुल 198 किग्रा वजन उठाया। उन्होंने स्नैच में 87 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 111 किग्रा का वजन उठाया। उत्तर कोरिया की री सॉन्ग-गुम ने 210 किग्रा के कुल वजन के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि इंडोनेशिया की विजयाना लुलुक दियानी त्रि ने 191 किग्रा के साथ कांस्य पदक हासिल किया।
मीराबाई के लिए यह पदक इसलिए भी खास है क्योंकि एशियन गेम्स में पदक जीतने के लिए उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। वह 2018 एशियन गेम्स में चोट के कारण हिस्सा नहीं ले सकी थीं। इसके बाद 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में भी वह पदक के बेहद करीब पहुंचकर चौथे स्थान पर रही थीं। उस प्रतियोगिता में जांघ की चोट ने उनके क्लीन एंड जर्क के प्रयासों को प्रभावित किया था।
32 वर्षीय मीराबाई ने प्रतियोगिता में कुल 198 किग्रा वजन उठाया। उन्होंने स्नैच में 87 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 111 किग्रा का वजन उठाया। उत्तर कोरिया की री सॉन्ग-गुम ने 210 किग्रा के कुल वजन के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि इंडोनेशिया की विजयाना लुलुक दियानी त्रि ने 191 किग्रा के साथ कांस्य पदक हासिल किया।
मीराबाई के लिए यह पदक इसलिए भी खास है क्योंकि एशियन गेम्स में पदक जीतने के लिए उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। वह 2018 एशियन गेम्स में चोट के कारण हिस्सा नहीं ले सकी थीं। इसके बाद 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में भी वह पदक के बेहद करीब पहुंचकर चौथे स्थान पर रही थीं। उस प्रतियोगिता में जांघ की चोट ने उनके क्लीन एंड जर्क के प्रयासों को प्रभावित किया था।
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मीराबाई चानू
- फोटो : PTI
'आंखों में खुशी के आंसू थे'
एशियन गेम्स का पदक जीतने के बाद अपने भावुक पलों को याद करते हुए मीराबाई ने कहा कि उन्हें अपने करियर के एक और यादगार पल की याद आ गई। उन्होंने कहा, 'हां, मैं ग्लासगो में बहुत भावुक हुई थी। वे खुशी के आंसू थे। आज भी मुझे रोने जैसा महसूस हुआ। खुशी के कारण मेरी आंखों में आंसू थे, लेकिन मैं रोई नहीं। मैं बहुत खुश थी। मुझे वह मिल गया जो मैं चाहती थी।'
मीराबाई ने आगे कहा कि वह कई वर्षों से एशियन गेम्स में पदक जीतने का सपना देख रही थीं और अब इस उपलब्धि पर उन्हें खुद पर गर्व है। उन्होंने आगे कहा, 'आज मेरा सपना पूरा हो गया। मैं इस पदक से बहुत खुश हूं। मैं कई वर्षों से एशियन गेम्स में पदक जीतने का सपना देख रही थी। आज मेरा सपना पूरा हो गया। मुझे खुद पर बहुत गर्व है। मैंने कई वर्षों बाद देश के लिए वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल जीता है।'
एशियन गेम्स का पदक जीतने के बाद अपने भावुक पलों को याद करते हुए मीराबाई ने कहा कि उन्हें अपने करियर के एक और यादगार पल की याद आ गई। उन्होंने कहा, 'हां, मैं ग्लासगो में बहुत भावुक हुई थी। वे खुशी के आंसू थे। आज भी मुझे रोने जैसा महसूस हुआ। खुशी के कारण मेरी आंखों में आंसू थे, लेकिन मैं रोई नहीं। मैं बहुत खुश थी। मुझे वह मिल गया जो मैं चाहती थी।'
मीराबाई ने आगे कहा कि वह कई वर्षों से एशियन गेम्स में पदक जीतने का सपना देख रही थीं और अब इस उपलब्धि पर उन्हें खुद पर गर्व है। उन्होंने आगे कहा, 'आज मेरा सपना पूरा हो गया। मैं इस पदक से बहुत खुश हूं। मैं कई वर्षों से एशियन गेम्स में पदक जीतने का सपना देख रही थी। आज मेरा सपना पूरा हो गया। मुझे खुद पर बहुत गर्व है। मैंने कई वर्षों बाद देश के लिए वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल जीता है।'
मीराबाई चानू
- फोटो : PTI
28 साल बाद भारत को मिला एशियन गेम्स में वेटलिफ्टिंग पदक
मीराबाई चानू के सिल्वर मेडल के साथ भारत को एशियन गेम्स में वेटलिफ्टिंग का पदक लंबे अंतराल के बाद मिला है। वह कर्णम मल्लेश्वरी के 1998 बैंकॉक एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने के 28 साल बाद भारत के लिए इस खेल में पदक जीतने वाली खिलाड़ी बनी हैं। ओलंपिक में सिल्वर मेडल, वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब और कॉमनवेल्थ गेम्स में कई गोल्ड मेडल जीत चुकीं मीराबाई के पदक संग्रह में अब एशियन गेम्स का सिल्वर भी शामिल हो गया है।
मीराबाई चानू के सिल्वर मेडल के साथ भारत को एशियन गेम्स में वेटलिफ्टिंग का पदक लंबे अंतराल के बाद मिला है। वह कर्णम मल्लेश्वरी के 1998 बैंकॉक एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने के 28 साल बाद भारत के लिए इस खेल में पदक जीतने वाली खिलाड़ी बनी हैं। ओलंपिक में सिल्वर मेडल, वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब और कॉमनवेल्थ गेम्स में कई गोल्ड मेडल जीत चुकीं मीराबाई के पदक संग्रह में अब एशियन गेम्स का सिल्वर भी शामिल हो गया है।
मीराबाई चानू
- फोटो : PTI
मीराबाई ने सरकार से की अर्जुन अवॉर्ड देने की मांग
ऐतिहासिक पदक जीतने के बाद मीराबाई ने सरकार से अर्जुन अवॉर्ड दिए जाने की इच्छा भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह सम्मान अभी तक उन्हें नहीं मिला है और वह चाहती हैं कि उनकी उपलब्धियों को देखते हुए सरकार उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित करे।
मीराबाई ने कहा, 'मैं सरकार से अर्जुन अवॉर्ड देने का अनुरोध करना चाहूंगी। मुझे बहुत खुशी होगी। अर्जुन अवॉर्ड सबसे बड़ा पुरस्कार है। मेरे पास यह नहीं है। मैं इसे चाहती हूं। अगर सरकार मेरी उपलब्धियों को देखते हुए मुझे यह पुरस्कार देती है तो मुझे बहुत खुशी होगी।' मीराबाई के लिए यह रजत सिर्फ एक और पदक नहीं, बल्कि चोट, निराशा और कई वर्षों के इंतजार के बाद पूरा हुआ वह सपना है, जिसे उन्होंने वेटलिफ्टिंग शुरू करने के समय देखा था।
ऐतिहासिक पदक जीतने के बाद मीराबाई ने सरकार से अर्जुन अवॉर्ड दिए जाने की इच्छा भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह सम्मान अभी तक उन्हें नहीं मिला है और वह चाहती हैं कि उनकी उपलब्धियों को देखते हुए सरकार उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित करे।
मीराबाई ने कहा, 'मैं सरकार से अर्जुन अवॉर्ड देने का अनुरोध करना चाहूंगी। मुझे बहुत खुशी होगी। अर्जुन अवॉर्ड सबसे बड़ा पुरस्कार है। मेरे पास यह नहीं है। मैं इसे चाहती हूं। अगर सरकार मेरी उपलब्धियों को देखते हुए मुझे यह पुरस्कार देती है तो मुझे बहुत खुशी होगी।' मीराबाई के लिए यह रजत सिर्फ एक और पदक नहीं, बल्कि चोट, निराशा और कई वर्षों के इंतजार के बाद पूरा हुआ वह सपना है, जिसे उन्होंने वेटलिफ्टिंग शुरू करने के समय देखा था।