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जंतर-मंतर विवाद: PM मोदी पर अभद्र टिप्पणी पर बाइचुंग भूटिया की दो टूक, बोले- इससे देश की छवि खराब होती है
Tue, 04 Aug 2026 05:33 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Tue, 04 Aug 2026 05:33 PM IST
सार
पूर्व भारतीय फुटबॉल कप्तान बाइचुंग भूटिया ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल व्यक्ति, समाज और देश की छवि के लिए उचित नहीं है। उन्होंने युवाओं से विरोध के दौरान भी भाषा की मर्यादा बनाए रखने की अपील की, वहीं इससे पहले निशानेबाज मनु भाकर भी सम्मानजनक भाषा के इस्तेमाल की नसीहत दे चुकी हैं।
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बाइचुंग भूटिया
- फोटो : IANS
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विस्तार
भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने कहा है कि देश के हर नागरिक को संविधान के तहत अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है, लेकिन विरोध के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना न तो व्यक्ति के लिए, न समाज के लिए और न ही देश की छवि के लिए उचित है। भूटिया की यह प्रतिक्रिया हाल ही में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान सामने आए उन वीडियो के बाद आई है, जिनमें कुछ प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाते दिखाई दिए थे।
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विरोध का अधिकार, लेकिन मर्यादा भी जरूरी
बाइचुंग भूटिया ने कहा, 'भारत के किसी भी हिस्से में हर व्यक्ति को विरोध करने और अपनी बात रखने का अधिकार है। हर कोई अपने विचार व्यक्त कर सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री को निशाना बनाकर अनुचित भाषा का इस्तेमाल करना किसी व्यक्ति, समाज या पूरे देश के लिए अच्छी बात नहीं है। विरोध करते समय भी भाषा की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि उनका उद्देश्य प्रधानमंत्री और सरकार के साथ मिलकर देश के युवाओं को खेलों से जोड़ना और उन्हें अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।
बाइचुंग भूटिया ने कहा, 'भारत के किसी भी हिस्से में हर व्यक्ति को विरोध करने और अपनी बात रखने का अधिकार है। हर कोई अपने विचार व्यक्त कर सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री को निशाना बनाकर अनुचित भाषा का इस्तेमाल करना किसी व्यक्ति, समाज या पूरे देश के लिए अच्छी बात नहीं है। विरोध करते समय भी भाषा की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि उनका उद्देश्य प्रधानमंत्री और सरकार के साथ मिलकर देश के युवाओं को खेलों से जोड़ना और उन्हें अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।
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मनु भाकर ने भी दी थी नसीहत
इससे पहले दो बार की ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर ने भी युवाओं से अपील की थी कि वे अभद्र भाषा का प्रयोग न करें। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि, 'हमारी भाषा हमारे व्यक्तित्व को दर्शाती है। सोच-समझकर शब्दों का चयन करें, क्योंकि समय के साथ हम वही बन जाते हैं जो सोचते हैं, बोलते हैं और करते हैं। गाली देना या खराब भाषा का इस्तेमाल करना 'कूल' नहीं है।' मनु ने कहा कि वास्तव में 'कूल' होने का मतलब मेहनती, दयालु, सम्मानजनक और ईमानदारी के साथ सफलता हासिल करना है, जिससे परिवार और देश को गर्व महसूस हो।
इससे पहले दो बार की ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर ने भी युवाओं से अपील की थी कि वे अभद्र भाषा का प्रयोग न करें। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि, 'हमारी भाषा हमारे व्यक्तित्व को दर्शाती है। सोच-समझकर शब्दों का चयन करें, क्योंकि समय के साथ हम वही बन जाते हैं जो सोचते हैं, बोलते हैं और करते हैं। गाली देना या खराब भाषा का इस्तेमाल करना 'कूल' नहीं है।' मनु ने कहा कि वास्तव में 'कूल' होने का मतलब मेहनती, दयालु, सम्मानजनक और ईमानदारी के साथ सफलता हासिल करना है, जिससे परिवार और देश को गर्व महसूस हो।
प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से की अपील
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि वह नहीं चाहते कि इन युवाओं को दंडित किया जाए, बल्कि उन्हें अपनी गलती से सीखने का अवसर मिलना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा, 'जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, उसे पूरे देश और दुनिया ने देखा। कुछ भटके हुए युवाओं ने बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने मुझे ही नहीं, मेरी दिवंगत मां तक को अपशब्द कहे।' उन्होंने आगे कहा, 'युवावस्था में गलतियां हो जाती हैं, लेकिन यही समय उन गलतियों से सीखने का भी होता है। मेरी उम्मीद है कि ये युवा अपनी भूल को समझेंगे और भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराएंगे।'
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि वह नहीं चाहते कि इन युवाओं को दंडित किया जाए, बल्कि उन्हें अपनी गलती से सीखने का अवसर मिलना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा, 'जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, उसे पूरे देश और दुनिया ने देखा। कुछ भटके हुए युवाओं ने बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने मुझे ही नहीं, मेरी दिवंगत मां तक को अपशब्द कहे।' उन्होंने आगे कहा, 'युवावस्था में गलतियां हो जाती हैं, लेकिन यही समय उन गलतियों से सीखने का भी होता है। मेरी उम्मीद है कि ये युवा अपनी भूल को समझेंगे और भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराएंगे।'