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हॉकी विश्वकप में भारत का क्यों खराब रहा प्रदर्शन?: छह बड़ी वजहों ने बढ़ाई मुश्किलें, अब एशियाई खेलों की चुनौती

Sat, 29 Aug 2026 01:28 PM IST
स्वप्निल शशांक अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Sat, 29 Aug 2026 01:28 PM IST
सार

भारतीय पुरुष हॉकी टीम का विश्व कप अभियान आठवें स्थान के साथ खत्म हुआ। बेल्जियम के खिलाफ शूटआउट में मिली हार ने निराशा बढ़ा दी। सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर होने के बाद टीम के प्रदर्शन ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अपनी ही डी में घबराहट, कमजोर फॉरवर्ड लाइन, मिडफील्ड का पीछे हटना और सुस्त शुरुआत भारत की प्रमुख परेशानियां रहीं।

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Why Did India Struggle at the Hockey World Cup? Six Major Issues That Hurt Their Campaign
भारतीय पुरुष हॉकी टीम - फोटो : PTI

विस्तार

भारतीय पुरुष हॉकी टीम का विश्व कप अभियान एक और निराशाजनक नतीजे के साथ खत्म हुआ। बेल्जियम के वावरे स्थित ब्लेफियस हॉकी अरीना में सातवें-आठवें स्थान के प्लेऑफ में भारत ने मेजबान टीम को कड़ी टक्कर दी। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने दो पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला और आखिरी क्षणों में भारत को मुकाबले में वापस ला दिया, लेकिन शूटआउट में बेल्जियम ने 4-3 से बाजी मार ली। भारत आठवें स्थान पर रहा।
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हालांकि टीम ने 2023 विश्व कप की नौवीं रैंकिंग से एक स्थान ऊपर छलांग लगाई, लेकिन यह प्रदर्शन उस टीम की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा जो लगातार दो ओलंपिक कांस्य पदक जीत चुकी है। सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पाने के बाद अब भारतीय टीम के सामने एशियाई खेलों की चुनौती है। वहां भारत गत चैंपियन है और 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफिकेशन हासिल करने के लिए स्वर्ण पदक बचाना उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
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Why Did India Struggle at the Hockey World Cup? Six Major Issues That Hurt Their Campaign
भारतीय पुरुष हॉकी टीम - फोटो : PTI
1. अपनी ही डी में डिफेंडरों की घबराहट बनी बड़ी समस्या
 
  • भारत की सबसे बड़ी परेशानियों में अपनी ही डी के अंदर डिफेंडरों का दबाव में आ जाना रहा। विश्व कप के दौरान भारतीय डिफेंस कई मौकों पर अपनी संरचना बनाए रखने में नाकाम रहा।
  • बेल्जियम के खिलाफ प्ले-ऑफ मुकाबले में भी भारत ने तीन गोल गंवाए। खास तौर पर जब विपक्षी टीम ने लगातार दबाव बनाया तो भारतीय डिफेंस पर अतिरिक्त भार दिखाई दिया।
  • यह समस्या पूरे अभियान में भारत के प्रदर्शन पर असर डालती रही और टीम को कई मुकाबलों में गोल गंवाने पड़े।

2. कमजोर फॉरवर्ड लाइन ने मौके गंवाए
 
  • भारतीय टीम के सामने दूसरी बड़ी चुनौती विपक्षी डी में अपने मौकों को गोल में बदलने की रही। विश्व कप से बाहर होने के बाद टीम के सामने शकी स्ट्राइकर्स की समस्या भी प्रमुख रूप से सामने आई।
  • बेल्जियम के खिलाफ मुकाबले में भारत की ओर से अभिषेक ने एक फील्ड गोल किया, जबकि हरमनप्रीत ने पेनल्टी कॉर्नर से दो गोल दागे। इसके बावजूद टीम को निर्धारित समय में जीत नहीं मिल सकी।
  • भारत को आक्रमण में निरंतरता और मौकों का फायदा उठाने की जरूरत थी, लेकिन अभियान के दौरान यह उसकी मजबूत कड़ी नहीं बन सकी।

3. मिडफील्ड के पीछे हटने से डिफेंस पर बढ़ा दबाव
 
  • भारतीय टीम की एक और बड़ी समस्या मिडफील्ड से जुड़ी रही। मैच के दौरान मिडफील्ड के बार-बार पीछे हटने से डिफेंस पर जरूरत से ज्यादा दबाव बनता रहा।
  • इससे भारतीय रक्षापंक्ति की संरचना प्रभावित हुई और विपक्षी टीम को आक्रमण करने के ज्यादा मौके मिले। जब डिफेंस पर लगातार दबाव आया तो वह कई बार अपना संगठन बनाए रखने में असफल रहा।
  • यही कारण रहा कि भारत को मुकाबलों में गोल रोकने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ा।

4. मैच की शुरुआत में सुस्ती ने नुकसान पहुंचाया
 
  • भारत के प्रदर्शन में एक और चिंता की बात मैचों की शुरुआत रही। टीम कई मौकों पर सुस्त शुरुआत करती दिखाई दी और इसका खामियाजा उसे शुरुआती गोल गंवाकर भुगतना पड़ा।
  • विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में शुरुआती मिनटों में विपक्षी को दबाव बनाने का मौका देना महंगा साबित हो सकता है। भारत के मामले में भी ऐसा ही हुआ।
  • टीम की शुरुआत में दिखाई देने वाली यह सुस्ती उसके अभियान के दौरान बार-बार सवाल खड़े करती रही।

5. लंबे समय तक लो ब्लॉक में खेलने से दबाव बढ़ा
 
  • भारतीय टीम के प्रदर्शन में लंबे समय तक पीछे रहकर खेलने की प्रवृत्ति भी समस्या बनी। टीम कई हिस्सों में काफी नीचे जाकर खेलती रही।
  • इससे विपक्षी टीम को लगातार आक्रमण करने और भारतीय डी के आसपास दबाव बनाने का मौका मिला। इसके बाद भारतीय डिफेंस पर दबाव बढ़ा और उसकी संरचना टूटती गई।
  • विश्व कप जैसे स्तर पर केवल दबाव झेलने के बजाय भारत को मुकाबले में अपनी पकड़ बनाए रखने की जरूरत थी, लेकिन कई मौकों पर टीम लंबे समय तक पीछे खेलती रही।

6. विपक्षी के हिसाब से खास रणनीति का असर नहीं दिखा
 
  • मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने विश्व कप के लिए एक खास योजना का वादा किया था। इसका मतलब था कि टूर्नामेंट आगे बढ़ने के साथ हर मुकाबले के लिए विपक्षी के हिसाब से अलग रणनीति तैयार की जाएगी।
  • हालांकि, भारतीय टीम के प्रदर्शन में ऐसी स्पष्ट विपक्षी-विशेष रणनीति नजर नहीं आई। इसके बजाय कई मुकाबलों में शुरुआत में लापरवाही और लंबे समय तक पीछे रहकर खेलने की प्रवृत्ति दिखाई दी।
  • सुस्त शुरुआत के कारण भारत ने एक से अधिक मुकाबलों में आसान गोल गंवाए। यह प्रदर्शन उस गंभीरता को नहीं दिखा सका जिसकी विश्व कप जैसे टूर्नामेंट में अपेक्षा की जाती है।

Why Did India Struggle at the Hockey World Cup? Six Major Issues That Hurt Their Campaign
भारतीय पुरुष हॉकी टीम - फोटो : PTI
बेल्जियम के खिलाफ आखिरी दम तक लड़ी टीम
बेल्जियम के खिलाफ आखिरी मुकाबले में हालांकि भारतीय टीम ने हार नहीं मानी। बेल्जियम 3-2 से आगे था, लेकिन आखिरी 25 सेकंड में मिले पेनल्टी कॉर्नर को हरमनप्रीत ने गोल में बदल दिया। भारत ने मैच को 3-3 से बराबर कर शूटआउट तक पहुंचाया। शूटआउट में भारत के लिए तीन गोल हुए, लेकिन हरमनप्रीत और सुखजीत सिंह अपने प्रयासों को गोल में नहीं बदल सके। बेल्जियम ने 4-3 से मुकाबला जीत लिया। इस हार के साथ भारत आठवें स्थान पर रहा।
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भारतीय हॉकी टीम - फोटो : IANS
अब एशियाई खेलों में सुधार का मौका
विश्व कप की निराशा के तुरंत बाद भारत के सामने एशियाई खेलों की चुनौती होगी। नागोया में होने वाले खेलों में भारत गत चैंपियन के रूप में उतरेगा। टीम को यह भी पता है कि स्वर्ण पदक उसे 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए सीधे प्रवेश दिला सकता है। विश्व कप के प्रदर्शन ने टीम के सामने कई सवाल छोड़े हैं। अपनी डी में घबराहट, कमजोर स्ट्राइकिंग, मिडफील्ड का पीछे हटना, सुस्त शुरुआत, लंबे समय तक पीछे खेलना और विपक्षी के हिसाब से रणनीति का स्पष्ट असर नहीं दिखना, इन सभी समस्याओं का समाधान भारत के लिए अब बेहद जरूरी होगा।

भारत की पुरुष टीम के लिए विश्व कप का नतीजा इसलिए भी ज्यादा निराशाजनक रहा क्योंकि इससे एक दिन पहले भारतीय महिला टीम ने जर्मनी को 3-1 से हराकर पांचवां स्थान हासिल किया था। यह महिला टीम का 1974 के उद्घाटन विश्व कप में चौथे स्थान के बाद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। अब पुरुष टीम के पास अपनी कमियों को सुधारने और एशियाई खेलों में जवाब देने के लिए बहुत कम समय है।
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