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मां की छाया और मजबूत इरादे: वैशाली इतिहास रचने वाली पहली भारतीय महिला, आत्मविश्वास से जीता कैंडिडेट्स खिताब
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mayank Tripathi
Updated Thu, 16 Apr 2026 03:23 PM IST
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सार
आर वैशाली ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फिडे महिला कैंडिडेट्स शतरंज टूर्नामेंट 2026 जीतकर इतिहास रच दिया और अब वह जू वेनजुन को विश्व चैंपियनशिप में चुनौती देंगी। शांत स्वभाव, मजबूत आत्मविश्वास और मां के साथ ने उन्हें मुश्किल हालात में भी केंद्रित रखा और जीत तक पहुंचाया।
आर वैशाली-आर प्रज्ञानंदा
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारतीय शतरंज जगत में एक नया अध्याय लिखते हुए आर वैशाली ने अपनी शांत दृढ़ता, आत्मविश्वास और पारिवारिक समर्थन के दम पर फिडे महिला कैंडिडेट्स शतरंज टूर्नामेंट 2026 का खिताब जीत लिया है। यह उपलब्धि उन्हें इतिहास में पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनाती है जिसने यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट जीता।
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आत्मविश्वास और मां का साथ बना सबसे बड़ी ताकत
वैशाली की सफलता की कहानी सिर्फ उनके खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व और पारिवारिक माहौल में भी गहराई से जुड़ी हुई है। अपने शांत स्वभाव और मजबूत मानसिकता के लिए जानी जाने वाली वैशाली अक्सर अपनी मां के साथ नजर आती हैं। उनकी मां की खामोश मौजूदगी उन्हें हर कठिन परिस्थिति में स्थिर और केंद्रित बनाए रखती है। साइप्रस के पाफोस में खेले गए इस टूर्नामेंट में वैशाली आठ खिलाड़ियों में सबसे कम रेटिंग वाली प्रतिभागी थीं, लेकिन उन्होंने अपने संयम और आत्मविश्वास से सभी को चौंका दिया। निर्णायक मुकाबले में उन्होंने कैटेरीना लैग्नो को हराकर 8.5 अंकों के साथ खिताब अपने नाम किया।
वैशाली की सफलता की कहानी सिर्फ उनके खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व और पारिवारिक माहौल में भी गहराई से जुड़ी हुई है। अपने शांत स्वभाव और मजबूत मानसिकता के लिए जानी जाने वाली वैशाली अक्सर अपनी मां के साथ नजर आती हैं। उनकी मां की खामोश मौजूदगी उन्हें हर कठिन परिस्थिति में स्थिर और केंद्रित बनाए रखती है। साइप्रस के पाफोस में खेले गए इस टूर्नामेंट में वैशाली आठ खिलाड़ियों में सबसे कम रेटिंग वाली प्रतिभागी थीं, लेकिन उन्होंने अपने संयम और आत्मविश्वास से सभी को चौंका दिया। निर्णायक मुकाबले में उन्होंने कैटेरीना लैग्नो को हराकर 8.5 अंकों के साथ खिताब अपने नाम किया।
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भाई की छाया से निकलकर खुद बनाई पहचान
वैशाली लंबे समय तक अपने भाई आर प्रज्ञानंदा की उपलब्धियों की छाया में रहीं। हालांकि इस टूर्नामेंट में प्रज्ञानंदा भी पुरुष वर्ग में शामिल थे, लेकिन वह शुरुआती दौर में ही बाहर हो गए। इसके बावजूद वैशाली ने बिना किसी अतिरिक्त दबाव के अपने खेल पर ध्यान केंद्रित रखा और शानदार प्रदर्शन किया। उनकी इस सफलता के बाद प्रज्ञानंदा ने भी उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह देखना प्रेरणादायक है कि उन्होंने टूर्नामेंट के महत्वपूर्ण क्षणों को कितनी मजबूती से संभाला।
वैशाली लंबे समय तक अपने भाई आर प्रज्ञानंदा की उपलब्धियों की छाया में रहीं। हालांकि इस टूर्नामेंट में प्रज्ञानंदा भी पुरुष वर्ग में शामिल थे, लेकिन वह शुरुआती दौर में ही बाहर हो गए। इसके बावजूद वैशाली ने बिना किसी अतिरिक्त दबाव के अपने खेल पर ध्यान केंद्रित रखा और शानदार प्रदर्शन किया। उनकी इस सफलता के बाद प्रज्ञानंदा ने भी उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह देखना प्रेरणादायक है कि उन्होंने टूर्नामेंट के महत्वपूर्ण क्षणों को कितनी मजबूती से संभाला।
Congrats to Vaishali akka! 🔥🔥Proud of what you have achieved! Inspiring to see how you handled the critical moments in the tournament! Happy to see the results for all the hard work! pic.twitter.com/YHPyU8DfGO
— Praggnanandhaa (@rpraggnachess) April 16, 2026
वैशाली
- फोटो : IANS
मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि
मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली वैशाली के पिता बैंक मैनेजर रहे हैं और उनकी मां गृहिणी हैं। पूरा परिवार शतरंज के प्रति समर्पित है। यही सादगी और अनुशासन उनके खेल में भी झलकता है। दिसंबर 2023 में वह कोनेरू हम्पी और डी हरिका के बाद भारत की तीसरी महिला ग्रैंडमास्टर बनीं। इससे पहले वह 2021 में इंटरनेशनल मास्टर का खिताब हासिल कर चुकी थीं और 2022 शतरंज ओलंपियाड में व्यक्तिगत और टीम दोनों वर्गों में कांस्य पदक जीत चुकी थीं।
मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली वैशाली के पिता बैंक मैनेजर रहे हैं और उनकी मां गृहिणी हैं। पूरा परिवार शतरंज के प्रति समर्पित है। यही सादगी और अनुशासन उनके खेल में भी झलकता है। दिसंबर 2023 में वह कोनेरू हम्पी और डी हरिका के बाद भारत की तीसरी महिला ग्रैंडमास्टर बनीं। इससे पहले वह 2021 में इंटरनेशनल मास्टर का खिताब हासिल कर चुकी थीं और 2022 शतरंज ओलंपियाड में व्यक्तिगत और टीम दोनों वर्गों में कांस्य पदक जीत चुकी थीं।
दिग्गज खिलाड़ियों के बीच बनाई पहचान
इस टूर्नामेंट में एलेक्जेंड्रा गोरियाचकिना, बिबिसारा असाउबायेवा, झू जिनर और टैन झोंगयी जैसी दिग्गज खिलाड़ियों की मौजूदगी में वैशाली को प्रबल दावेदार नहीं माना जा रहा था। यहां तक कि भारत की दिव्या देशमुख को उनसे ज्यादा मजबूत माना जा रहा था। लेकिन वैशाली ने इन सभी धारणाओं को गलत साबित किया।
इस टूर्नामेंट में एलेक्जेंड्रा गोरियाचकिना, बिबिसारा असाउबायेवा, झू जिनर और टैन झोंगयी जैसी दिग्गज खिलाड़ियों की मौजूदगी में वैशाली को प्रबल दावेदार नहीं माना जा रहा था। यहां तक कि भारत की दिव्या देशमुख को उनसे ज्यादा मजबूत माना जा रहा था। लेकिन वैशाली ने इन सभी धारणाओं को गलत साबित किया।
वैशाली
- फोटो : IANS
अब विश्व चैंपियनशिप पर नजर
इस जीत के साथ वैशाली अब चीन की जू वेनजुन को महिला विश्व शतरंज चैंपियनशिप में चुनौती देंगी। उन्होंने खुद इस जीत को “सपने के सच होने” जैसा बताया और कहा कि कठिन क्षणों में भी फोकस बनाए रखना उनकी सफलता की कुंजी रहा। वैशाली की कहानी यह साबित करती है कि आत्मविश्वास, निरंतर मेहनत और परिवार का साथ किसी भी खिलाड़ी को शिखर तक पहुंचा सकता है। अब पूरी दुनिया की नजर उनके अगले बड़े मुकाबले पर टिकी है, जहां एक बार फिर उनकी शांत ताकत और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा होगी।
इस जीत के साथ वैशाली अब चीन की जू वेनजुन को महिला विश्व शतरंज चैंपियनशिप में चुनौती देंगी। उन्होंने खुद इस जीत को “सपने के सच होने” जैसा बताया और कहा कि कठिन क्षणों में भी फोकस बनाए रखना उनकी सफलता की कुंजी रहा। वैशाली की कहानी यह साबित करती है कि आत्मविश्वास, निरंतर मेहनत और परिवार का साथ किसी भी खिलाड़ी को शिखर तक पहुंचा सकता है। अब पूरी दुनिया की नजर उनके अगले बड़े मुकाबले पर टिकी है, जहां एक बार फिर उनकी शांत ताकत और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा होगी।
