{"_id":"adfa84f8-7db4-11e2-9052-d4ae52bc57c2","slug":"cathedral-church","type":"story","status":"publish","title_hn":"वास्तुकला का नायाब नमूना है पत्थर गिरजाघर"}
वास्तुकला का नायाब नमूना है पत्थर गिरजाघर
इलाहाबाद
Updated Mon, 25 Feb 2013 01:03 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यह शानदार गिरजाघर 1870 में सर विलियम एमर्सन द्वारा डिजाइन किया गया और सन् 1887 में निर्मित किया गया। इस गिरजाघर की खूबसूरती प्रत्येक आगंतुक को प्रभावित करती है।
विज्ञापन
इस गिरजाघर परिसर में बने उद्यान की हरियाली बहुत सुखद अनुभव देती है। इसके पत्थरों में आकर्षक नक्काशी, जगह-जगह लगे शीशों में उकेरा गया प्रभु यीशु का जीवनवृत आकर्षित करता है। शहर के हृदयस्थल सिविल लाइंस के बीचों-बीच स्थित पत्थर गिरजाघर की सुंदरता व कलाकारी का हर कोई कायल है। मसीही समुदाय का यह प्रार्थना स्थल वास्तुकला का नायाब नमूना है। इसकी गिनती देश के चुनिंदा चर्चों में होती है।
विज्ञापन
इस चर्च के बाहर दो खम्भे आज भी अधूरे हैं। इसे उन संतों की याद में बनाया गया था जिन्होंने अपना जीवन मानव सेवा में लगाया था। इससे चर्च का नाम 'आल सेंट कैथेड्रिल' चर्च रखा गया। चर्च के अंदर लगे विशाल शीशे हर किसी के आकर्षण का केंद्र हैं। इसमें प्रभु यीशु के जन्म से लेकर उनके द्वारा किए गए हर कार्य को आकर्षक तरीके से दर्शाया गया है जो सूर्य की रोशनी में अनोखी चमक बिखेरता है। यहां हर रविवार को आयोजित होने वाली प्रार्थना सभा में हर जाति धर्म के लोग शामिल होते हैं।
विज्ञापन