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यूजर्स के हाथ में होगा सोशल मीडिया का कंट्रोल: ऑस्ट्रेलिया सरकार लाई 'माई फीड, माई वे' कानून; क्या है यह नियम?

Tue, 08 Sep 2026 01:05 PM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति शुक्ला Updated Tue, 08 Sep 2026 01:05 PM IST
सार

बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने के बाद ऑस्ट्रेलिया सरकार ने ऑनलाइन सुरक्षा सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। एंथनी अल्बानीज सरकार ने माई फीड, माई वे पहल के तहत नए ड्राफ्ट बिल का एलान किया है। जिससे अब यूजर्स खुद तय कर सकेंगे कि वह अपने फीड पर क्या देखना चाहते हैं। तो क्या अब सोशल मीडिया कंपनियां अपने फीड पर यूजर्स को पूरा नियंत्रण देंगी? आइए जानते हैं ऑस्ट्रेलिया सोशल मीडिया फीड को लेकर नया नियम क्या है? नियमों का उल्लंघन करने वालों पर क्या होगा और ई-सेफ्टी रेगुलेटर को मिलने वाले अधिकारों के बारे में क्या कहा गया है।
 

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Australia Gives Users More Control Over Social Media Feeds, Algorithmic Recommendations Optional
ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया का नया नियम - फोटो : amarujala.com

विस्तार

बच्चों के लिए दुनिया का पहला सोशल मीडिया बैन लागू करने के बाद ऑस्ट्रेलिया की मध्य-वामपंथी लेबर सरकार ने ऑनलाइन सुरक्षा बढ़ाने के लिए अगला बड़ा कदम उठाया है। सरकार की ओर से प्रस्तावित नए ड्राफ्ट कानूनों के तहत, टेक कंपनियों को अब यूजर्स को उनकी मुख्य फीड पर मिलने वाली सामग्री चुनने का अधिकार देना होगा। 'माई फीड, माई वे' (My Feed, My Way) नाम से शुरू की जा रही इस पहल के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अब यूजर्स को वह विकल्प देने होंगे, जिसमें वे वह यह तय कर सकेंगे कि वह अपनी टाइमलाइन पर किस प्रकार के कंटेंट देखना चाहते हैं। वह तय कर सकेंगे कि उन्हें एल्गोरिदम वाली पोस्ट दिखें या सिर्फ फॉलो किए लोगों की।
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 आइए जानते हैं ऑस्ट्रेलिया के इस नए ड्राफ्ट बिल की मुख्य बातें और टेक कंपनियों पर इसका क्या असर पड़ेगा...

यूजर्स खुद चुन सकेंगे अपनी फीड
ऑस्ट्रेलिया सरकार की माई फीड, माई वे पहल के तहत अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स को उनके डिफॉल्ट फीड के बारे में विकल्प देना होगा। यूजर्स चाहें तो एल्गोरिदम की ओर से सजेस्ट किए गए पर्सनलाइज्ड कंटेंट वाला फीड चुन सकते हैं। नहीं तो उनके पास दूसरा विकल्प भी होगा, जिसमें वे एल्गोरिदम आधारित कंटेंट से हटकर केवल उन्हीं दोस्तों और क्रिएटर्स की पोस्ट देख सकेंगे, जिन्हें वे खुद फॉलो करते हैं। प्रस्ताव के तहत 16 साल से अधिक उम्र के यूजर्स को यह विकल्प देने की बात कही गई है।
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सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
इस फैसले पर सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया यूजर्स को अपने ऑनलाइन अनुभव पर ज्यादा कंट्रोल मिलना चाहिए। दुनियाभर में सोशल मीडिया कंपनियों के एल्गोरिदम को सवाल उठते रहें हैं। आरोप है कि कुछ एल्गोरिदम यूजर्स को ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए उनकी पंसद से ही मिलता-जुलता कंटेंट दिखाते हैं। इससे उनका समय भी बर्बाद होता है। इसलिए सरकार ऐसा प्रस्ताव लाई है। ऐसे प्रस्ताव से सोशल मीडिया एडिक्शन के जोखिम कम हो सकेंगे और यूजर्स को अपनी पसंद के मुताबिक फीड चुनने का अधिकार भी मिल सकेगा।
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प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
  • ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा कि यह सरकार को नियंत्रण देने की कोशिश नहीं है, बल्कि लोगों को नियंत्रण देने की पहल है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य यूजर्स को ऑनलाइन अपनी पसंद के अनुसार कंटेंट देखने का विकल्प देना और बड़ी टेक कंपनियों को जिम्मेदार बनाना है।
  • प्रस्तावित डिजिटल ड्यूटी ऑफ केयर के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ऑस्ट्रेलियाई यूजर्स के लिए पहचाने गए नुकसान के जोखिमों से निपटने के लिए उठाए गए कदमों का दस्तावेज तैयार करना होगा।
  • उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि समय के साथ ये उपाय प्रभावी बने रहें। यानी सिर्फ नियम बना देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्लेटफॉर्म्स को यह भी दिखाना होगा कि वे ऑनलाइन नुकसान के जोखिम को कम करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

नियम तोड़ने पर क्या होगा?
अगर कोई इस प्रस्तावित नियमों का पालन नहीं करता है, तो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिकतम 10.92 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। नियमों के अनुपालन और इन्हें लागू कराने की जिम्मेदारी ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेट सेफ्टी रेगुलेटर ई-सेफ्टी कमिश्नर की होगी।

हानिकारक कंटेंट हटाने का भी अधिकार
इतना ही नहीं प्रस्तावित कानून के तहत  ई-सेफ्टीको हानिकारक और अवैध ऑनलाइन सामग्री को तेजी से हटाने के लिए नोटिस जारी करने की अतिरिक्त शक्तियां भी दी जाएंगी। सरकार के मुताबिक,  ई-सेफ्टी को न्यूडिफाई एप्स या वेबसाइट्स से जुड़े कंटेंट को हटाने के लिए भी नोटिस जारी करने का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा बच्चों को साइबरबुलिंग और वयस्कों को ऑनलाइन दुर्व्यवहार से बचाने के मौजूदा सिस्टम को भी ज्यादा प्रभावी बनाने का प्रस्ताव है।

बच्चों के लिए भी सख्त नियम
  • साथ ही, ऑस्ट्रेलिया सरकार बच्चों को ऑनलाइन नुकसान से बचाने के लिए भी सख्त नियम ला रही है। हालांकि सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव से बच्चों को बचाने को लेकर सरकार पहले से ही सख्त रुख अपनाती रही है। यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश बना, जहां बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन लागू किया गया।
  • अब प्रस्तावित डिजिटल ड्यूटी ऑफ केयर सिर्फ सोशल मीडिया फीड तक सीमित नहीं रहेगा। इसके तहत ऑनलाइन गेम्स, एप्स और एआई चैटबॉट्स जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी 18 साल से कम उम्र के यूजर्स को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट और डिजाइन फीचर्स से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे।
  • इसमें ईटिंग डिसऑर्डर को बढ़ावा देने वाला कंटेंट, महिलाओं के खिलाफ शत्रुतापूर्ण विचार, अपराध या जानलेवा स्टंट को बढ़ावा देने वाली सामग्री और ऐसा कंटेंट शामिल है, जिससे बच्चों को गंभीर मानसिक परेशानी हो सकती है।

यूरोप के नियमों से कितना अलग?
  • ऑस्ट्रेलिया का प्रस्ताव यूरोपीय संघ के डिजिटल सर्विस एक्ट से मिलता-जुलता है, जहां यूजर्स को एल्गोरिदम आधारित पर्सनलाइजेशन से बाहर निकलने का विकल्प दिया गया है।
  • हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई सरकार का कहना है कि वह इस व्यवस्था को ज्यादा आसान और स्पष्ट बनाना चाहती है। यूजर्स को सीधे यह विकल्प दिया जाएगा कि वे एल्गोरिदम वाला फीड चाहते हैं या केवल उन अकाउंट्स का फीड देखना चाहते हैं, जिन्हें उन्होंने खुद फॉलो किया है।

फ्री स्पीच को लेकर भी सवाल
  • प्रस्तावित कानून को लेकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं। आलोचकों को आशंका है कि हानिकारक कंटेंट को हटाने की बढ़ती शक्तियां कहीं सेंसरशिप का कारण न बन जाएं।
  • वहीं, दूसरी ओर सरकार का कहना है कि इसका मकसद इंटरनेट पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाना नहीं, बल्कि यूजर्स को ज्यादा विकल्प देना और टेक कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर होने वाले नुकसान के लिए जवाबदेह बनाना है।

आगे क्या होगा?
  • ऑस्ट्रेलिया सरकार ने ड्राफ्ट कानून पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, इंडस्ट्री संगठनों, नागरिक समाज समूहों और अन्य संबंधित पक्षों से प्रतिक्रिया मांगी है। सरकार की योजना इस साल कानून को संसद में पेश करने की है।
  • एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर यह प्रस्ताव कानून बनता है, तो ऑस्ट्रेलियाई सोशल मीडिया यूजर्स के पास अपने फीड को लेकर पहले से ज्यादा नियंत्रण होगा। सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि यूजर्स को सिर्फ एल्गोरिदम की ओर से चुना गया कंटेंट देखने के बजाय यह तय करने का विकल्प मिलेगा कि वे पर्सनलाइज्ड फीड चाहते हैं या केवल अपने चुने हुए अकाउंट्स की पोस्ट देखना चाहते हैं।
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