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नया दांव: आईफोन 18 नहीं, सीधे आईफोन 18 प्रो; एपल की बदलती बिजनेस स्ट्रैटजी के पीछे क्या है वजह?
Tue, 08 Sep 2026 08:25 AM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 08 Sep 2026 08:25 AM IST
सार
एपल अपनी पुरानी लॉन्च रणनीति को बदलते हुए सितंबर इवेंट में स्टैंडर्ड आईफोन 18 के बजाय सिर्फ आईफोन 18 प्रो सीरीज और फोल्डेबल डिवाइस पेश कर सकता है। जबकि स्टैंडर्ड मॉडल्स को 2027 की शुरुआत में लॉन्च करने की चर्चा है। आखिर क्यों इस बार एपल अपनी वर्षों पुरानी लॉन्च परंपरा को तोड़कर सिर्फ प्रो मॉडल्स पर फोकस करना चाहता है। आइए एपल की इस नई रणनीति को समझते हैं।
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इस बार आईफोन 18 प्रो मॉडलों पर होगा कंपनी का फोकस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हर साल सितंबर का महीना टेक जगत के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता है, क्योंकि इसी समय दिग्गज टेक कंपनी एपल अपने नए आईफोन लाइनअप से पूरी दुनिया का पर्दा उठाती है। लेकिन इस साल 9 सितंबर को होने वाले एपल के "सरप्राइज एंड शाइन" इवेंट में कुछ ऐसा होने जा रहा है जो कंपनी के लंबे इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया।
एपल के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जॉन टर्नस के नेतृत्व में कंपनी अपनी दशकों पुरानी लॉन्च रणनीति को पूरी तरह से बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। अब तक हम सभी देखते आए हैं कि एपल अपने स्टैंडर्ड बेस मॉडल और प्रीमियम प्रो मॉडल को एक साथ एक ही इवेंट में बड़े धूमधाम से लॉन्च करती थी। लेकिन इस बार सितंबर के इवेंट में स्टैंडर्ड आईफोन 18 को पेश नहीं किया जाएगा। इसके बजाय कंपनी अपना पूरा ध्यान सिर्फ आईफोन 18 प्रो, आईफोन 18 प्रो मैक्स और अपने पहले बहुप्रतीक्षित फोल्डेबल आईफोन पर केंद्रित कर रही है। वहीं स्टैंडर्ड आईफोन 18 के लॉन्च को अगले साल (2027) की शुरुआत तक टाला जा सकता है। इसे कोई साधारण बदलाव या आपूर्ति की कमी का नतीजा नहीं, बल्कि यह एपल की एक बेहद सोची-समझी और आक्रामक व्यावसायिक रणनीति का अहम हिस्सा बताया जा रहा है।
प्रीमियम मार्केट और मुनाफे पर फोकस बढ़ा रही कंपनी
प्रो मॉडल्स को पहले लॉन्च करने का एक और फायदा
क्या यह रणनीति ग्राहकों के लिए अच्छी होगी?
क्या एपल हमेशा के लिए लॉन्च स्ट्रैटजी बदल रहा है?
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एपल के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जॉन टर्नस के नेतृत्व में कंपनी अपनी दशकों पुरानी लॉन्च रणनीति को पूरी तरह से बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। अब तक हम सभी देखते आए हैं कि एपल अपने स्टैंडर्ड बेस मॉडल और प्रीमियम प्रो मॉडल को एक साथ एक ही इवेंट में बड़े धूमधाम से लॉन्च करती थी। लेकिन इस बार सितंबर के इवेंट में स्टैंडर्ड आईफोन 18 को पेश नहीं किया जाएगा। इसके बजाय कंपनी अपना पूरा ध्यान सिर्फ आईफोन 18 प्रो, आईफोन 18 प्रो मैक्स और अपने पहले बहुप्रतीक्षित फोल्डेबल आईफोन पर केंद्रित कर रही है। वहीं स्टैंडर्ड आईफोन 18 के लॉन्च को अगले साल (2027) की शुरुआत तक टाला जा सकता है। इसे कोई साधारण बदलाव या आपूर्ति की कमी का नतीजा नहीं, बल्कि यह एपल की एक बेहद सोची-समझी और आक्रामक व्यावसायिक रणनीति का अहम हिस्सा बताया जा रहा है।
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प्रीमियम मार्केट और मुनाफे पर फोकस बढ़ा रही कंपनी
- एपल का यह रणनीतिक कदम स्पष्ट रूप से यह संकेत देता है कि कंपनी अब पूरी तरह से प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट से होने वाले मुनाफे को अधिकतम स्तर तक ले जाना चाहती है। टेक इंडस्ट्री में यह बात किसी से छिपी नहीं है कि एपल की सबसे ज्यादा कमाई और लाभ मार्जिन उसके प्रो और प्रो मैक्स मॉडल से ही आता है। जब भी कोई नया आईफोन लाइनअप बाजार में दस्तक देता है, तो शुरुआती महीनों में सबसे ज्यादा मांग इन्हीं प्रीमियम प्रो मॉडल्स की होती है।
- हॉलिडे सीजन यानी त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ता अक्सर महंगे और फ्लैगशिप डिवाइस खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसे में सितंबर के इस मेगा इवेंट को पूरी तरह से प्रो लाइनअप और बिल्कुल नए फोल्डेबल आईफोन के लिए आरक्षित करके, एपल यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ग्राहकों का ध्यान किसी भी कीमत पर सस्ते बेस मॉडल की तरफ न भटके।
- फोल्डेबल आईफोन, जिसे संभावित रूप से आईफोन अल्ट्रा भी कहा जा रहा है, एक बेहद प्रीमियम उत्पाद होगा जिसकी कीमत काफी अधिक होने का अनुमान है। केवल प्रो और अल्ट्रा मॉडल्स को एक साथ बाजार में उतारकर कंपनी अपनी एवरेज सेलिंग प्राइस यानी प्रति डिवाइस औसत बिक्री मूल्य को एक नए रिकॉर्ड स्तर पर ले जाने की पूरी तैयारी कर चुकी है।
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प्रो मॉडल्स को पहले लॉन्च करने का एक और फायदा
- आमतौर पर देखा गया है कि नए साल की शुरुआत यानी स्प्रिंग सीजन में आईफोन की बिक्री का ग्राफ नीचे गिरने लगता है। इस मंदी से निपटने के लिए ही एपल ने अपनी वार्षिक रिलीज साइकिल को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटने का साहसिक कदम उठाया है।
- अब कंपनी की रणनीति स्टैंडर्ड आईफोन 18, आईफोन 18ई और बहुचर्चित स्लिम डिजाइन वाले आईफोन एयर के नए संस्करण को 2027 की शुरुआत (फरवरी या मार्च) में बाजार में उतारने की है।
- यह बड़ा कदम कंपनी को साल के उन महीनों में भी भारी बिक्री, ग्राहकों का ध्यान और मीडिया कवरेज दिलाएगा जब स्मार्टफोन बाजार आमतौर पर शांत रहता है। इससे बजट के प्रति सचेत ग्राहकों को भी बेहतर विकल्प मिल सकेंगे।
क्या यह रणनीति ग्राहकों के लिए अच्छी होगी?
- ग्राहकों के नजरिए से तस्वीर थोड़ी अलग हो सकती है। जो लोग हर साल नया स्टैंडर्ड आईफोन खरीदना चाहते हैं, उन्हें इस बार इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, प्रीमियम फोन खरीदने वाले ग्राहकों के लिए सितंबर में ही नई तकनीक उपलब्ध हो सकती है।
- इसके अलावा, सप्लाई चेन और कंपोनेंट लागत बढ़ने के कारण आने वाले आईफोन मॉडल की कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में कीमत बढ़ने की संभावना जताई गई है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नए सीईओ जॉन टर्नस इस नई प्रीमियम रणनीति को कैसे पेश करते हैं और दुनिया भर के उपभोक्ता कंपनी के इस ऐतिहासिक बदलाव को किस रूप में स्वीकार करते हैं।
क्या एपल हमेशा के लिए लॉन्च स्ट्रैटजी बदल रहा है?
- फिलहाल इसे एपल की स्थायी रणनीति मानना जल्दबाजी होगी। कंपनी अगर 2026-27 में सफलतापूर्वक दो अलग-अलग लॉन्च विंडो के जरिए आईफोन बेचती है तो यह मॉडल आगे भी जारी रह सकता है। लेकिन अगर इससे ग्राहकों में भ्रम पैदा होता है या स्टैंडर्ड मॉडल की बिक्री प्रभावित होती है, तो एपल अपनी पुरानी रणनीति पर वापस भी लौट सकता है।
- अगर रिपोर्ट्स सही साबित होती हैं तो सितंबर 2026 का आईफोन लॉन्च सिर्फ नए फोन पेश करने वाला इवेंट नहीं होगा, बल्कि यह एपल की पूरी आईफोन बिजनेस स्ट्रैटजी में एक बड़े बदलाव की शुरुआत भी साबित हो सकता है।