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भारत में एप स्टोर्स से हटा बिटचैट: सरकार ने कानून-व्यवस्था के लिए बताया खतरा, जानें क्या है पूरा मामला
Tue, 06 Oct 2026 05:26 PM IST
जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति शुक्ला
Updated Tue, 06 Oct 2026 05:26 PM IST
सार
बिना इंटरनेट के ब्लूटूथ से काम करने वाले मैसेजिंग एप बिटचैट को भारत में गूगल प्ले स्टोर और एपल एप स्टोर से हटा दिया गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय एजेंसियों ने इस एप को देश की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा माना है।
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एप स्टोर से हटाया गया बिटचैट एप
- फोटो : amarujala.com
विस्तार
भारत सरकार ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के हवाले से ब्लूटूथ-बेस्ड मैसेजिंग एप बिटचैट के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस एप को गूगल प्ले स्टोर और एपल एप स्टोर दोनों जगह से हटा दिया गया है।
सरकारी सूत्रों का साफ कहना है कि देश में कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा बनाए रखना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है और इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
बिटचैट क्या है?
बिटचैट (Bitchat) एक मैसेजिंग एप है, जो पारंपरिक इंटरनेट आधारित मैसेजिंग से अलग तरीके से काम करता है। यह ब्लूटूथ जैसी वायरलेस तकनीक का इस्तेमाल करके आसपास मौजूद डिवाइस के बीच मैसेज भेजने की सुविधा देता है।
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इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल खास तौर पर उन परिस्थितियों में किया जा सकता है, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं हो या उस पर निर्भरता कम करनी हो।
कैसे काम करता है बिटचैट?
बिटचैट इंटरनेट के बिना आसपास के डिवाइसों के बीच मैसेज भेजने के लिए ब्लूटूथ बेस्ड मेश नेटवर्क (Bluetooth-based mesh network) का इस्तेमाल करता है। यह इस तरह काम करता है...
सरकार को किस बात की चिंता?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बिटचैट को कानून-व्यवस्था के नजरिए से संभावित जोखिम के तौर पर देखा गया है। ऐसे एप्स में इंटरनेट नेटवर्क पर निर्भरता कम होने के कारण पारंपरिक ऑनलाइन कम्युनिकेशन सिस्टम से अलग तरीके से संदेशों का आदान-प्रदान हो सकता है। इसी वजह से सरकार की चिंता सिर्फ एप की तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके संभावित इस्तेमाल और उससे पैदा होने वाली कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को लेकर भी है।
इंटरनेट के बिना मैसेजिंग क्यों चर्चा में?
बिटचैट जैसे एप की खासियत इसका ब्लूटूथ-बेस्ट कम्यूनिकेशन माना जाता है। सामान्य मैसेजिंग एप्स के लिए इंटरनेट कनेक्शन जरूरी होता है, जबकि ब्लूटूथ आधारित मैसेजिंग आसपास मौजूद डिवाइसों के बीच सीधे संचार की सुविधा दे सकती है। यही तकनीकी खूबी ऐसे एप्स को अलग बनाती है, लेकिन यही वजह कानून-व्यवस्था और निगरानी के लिहाज से सवाल भी खड़े करती है।
केंद्र सरकार की जिम्मेदारी पर जोर
सरकारी सूत्रों ने साफ तौर पर कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना केंद्र की जिम्मेदारी है। ऐसे में सरकार उन तकनीकी प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल को लेकर भी सतर्क रहती है, जिनसे सार्वजनिक व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका हो।
फिलहाल बिटचैट को भारत में एप स्टोर से हटाए जाने को लेकर सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। एप की उपलब्धता और सरकार की आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है।
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सरकारी सूत्रों का साफ कहना है कि देश में कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा बनाए रखना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है और इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
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बिटचैट क्या है?
बिटचैट (Bitchat) एक मैसेजिंग एप है, जो पारंपरिक इंटरनेट आधारित मैसेजिंग से अलग तरीके से काम करता है। यह ब्लूटूथ जैसी वायरलेस तकनीक का इस्तेमाल करके आसपास मौजूद डिवाइस के बीच मैसेज भेजने की सुविधा देता है।
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इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल खास तौर पर उन परिस्थितियों में किया जा सकता है, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं हो या उस पर निर्भरता कम करनी हो।
कैसे काम करता है बिटचैट?
बिटचैट इंटरनेट के बिना आसपास के डिवाइसों के बीच मैसेज भेजने के लिए ब्लूटूथ बेस्ड मेश नेटवर्क (Bluetooth-based mesh network) का इस्तेमाल करता है। यह इस तरह काम करता है...
- ब्लूटूथ से कनेक्शन: सबसे पहले आसपास के बिटचैट यूजर्स के फोन एक-दूसरे से ब्लूटूथ के जरिए जुड़ते हैं।
- इंटरनेट की जरूरत नहीं: इसमें मैसेज भेजने के लिए मोबाइल डेटा या किसी वाई-फाई जरूरी नहीं होती है।
- Mesh नेटवर्क बनता है: अब आसपास के कई फोन आपस में जुड़कर एक नेटवर्क बना सकते हैं।
- मैसेज आगे बढ़ता है: यहां जरूरत पड़ने पर एक फोन दूसरे फोन के जरिए मैसेज को आगे पहुंचा सकता है।
- दूरी बढ़ाने में मदद: साथ ही आसपास मौजूद ज्यादा डिवाइस होने पर मैसेज कई डिवाइसों के जरिए आगे तक पहुंच सकता है। यानी बिटचैट में आसपास के फोन ही नेटवर्क की तरह काम करते हैं।
सरकार को किस बात की चिंता?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बिटचैट को कानून-व्यवस्था के नजरिए से संभावित जोखिम के तौर पर देखा गया है। ऐसे एप्स में इंटरनेट नेटवर्क पर निर्भरता कम होने के कारण पारंपरिक ऑनलाइन कम्युनिकेशन सिस्टम से अलग तरीके से संदेशों का आदान-प्रदान हो सकता है। इसी वजह से सरकार की चिंता सिर्फ एप की तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके संभावित इस्तेमाल और उससे पैदा होने वाली कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को लेकर भी है।
इंटरनेट के बिना मैसेजिंग क्यों चर्चा में?
बिटचैट जैसे एप की खासियत इसका ब्लूटूथ-बेस्ट कम्यूनिकेशन माना जाता है। सामान्य मैसेजिंग एप्स के लिए इंटरनेट कनेक्शन जरूरी होता है, जबकि ब्लूटूथ आधारित मैसेजिंग आसपास मौजूद डिवाइसों के बीच सीधे संचार की सुविधा दे सकती है। यही तकनीकी खूबी ऐसे एप्स को अलग बनाती है, लेकिन यही वजह कानून-व्यवस्था और निगरानी के लिहाज से सवाल भी खड़े करती है।
केंद्र सरकार की जिम्मेदारी पर जोर
सरकारी सूत्रों ने साफ तौर पर कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना केंद्र की जिम्मेदारी है। ऐसे में सरकार उन तकनीकी प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल को लेकर भी सतर्क रहती है, जिनसे सार्वजनिक व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका हो।
फिलहाल बिटचैट को भारत में एप स्टोर से हटाए जाने को लेकर सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। एप की उपलब्धता और सरकार की आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है।