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अब AI-जनरेटेड कंटेंट की पहचान होगी आसान: Claude के हर आउटपुट में छिपा होगा इनविजिबल मार्क, ऐसे करेगा काम

Tue, 11 Aug 2026 12:59 PM IST
जागृति शुक्ला टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति शुक्ला Updated Tue, 11 Aug 2026 12:59 PM IST
सार

Claude watermark: आजकल एआई जनरेटेड कंटेंट की पहचान करना बेहद मुश्किल होता जा रहा है। कोई टेक्स्ट या फाइल किसी इंसान ने तैयार की है या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने, यह देखकर आसानी से समझ ही नहीं आता। इसी समस्या को दूर करने के लिए एंथ्रॉपिक ने अपने एआई कंटेंट की पहचान को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। आइए जानते हैं कि यह नया बदलाव क्या है और इसकी मदद से अब आप एआई कंटेंट को कैसे आसानी से पहचान सकेंगे।
 

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Claude Adds Invisible Watermarks AI-Generated Text, Files, Even After Copy-Paste
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

Anthropic Claude watermark: एआई टूल जैसे चैटजीपीटी और क्लाउड के बाद इंटरनेट पर तमाम तरीकों के एआई कंटेंट सामने आने लगे। इससे यह पहचानना मुश्किल हो गया कि  टेक्स्ट या फाइल इंसान ने तैयारी की है या एआई ने। इसी समस्या को  दूर करने और पारदर्शिता लाने के लिए एआई कंपनी ने अपने सपोर्ट पेज को अपडेट करते हुए जानकारी दी है कि वह यूरोपीय संघ के ईयू एआई एक्ट के आर्टिकल के पारदर्शिता नियमों का पालन करने के लिए क्लाउड के आउटपुट में मशीन-रीडेबल मार्क्स जोड़ रही है। यानी अब क्लाउड की ओर से जनरेट या प्रोसेस की गई हर सामग्री में AI-जनरेटेड होने की पहचान दर्ज होगी। 
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क्लाउड के कंटेंट में क्यों लगाया जा रहा है वॉटरमार्क?
  • इंटरनेट पर एआई स्लॉप यानी कम गुणवत्ता वाले एआई जनरेटेड कंटेंट को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही यह पता लगाना भी मुश्किल है कि कोई कंटेंट एआई से तैयार हुआ है या नहीं।
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  • एंथ्रोपिक ने एआई-जनरेटेड कंटेंट को मार्क करने से जुड़ी अपनी जानकारी अपडेट की है। कंपनी के अनुसार, क्लाउड मॉडल से तैयार कंटेंट में मशीन-रीडेबल मार्क जोड़े जा रहे हैं। यह कदम यूरोपीय संघ के AI Act के अनुच्छेद 50 के तहत आने वाली पारदर्शिता आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में उठाया गया है।
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टेक्स्ट में कैसे काम करेगा अदृश्य वॉटरमार्क?
  • जानकारी के अनुसार क्लाउड मॉडल से तैयार टेक्स्ट में सीधे एक अदृश्य वॉरमार्क एंबेड किया जाएगा। सामान्य देखने पर यह नहीं दिखाई देगा।
  • लेकिन इसकी खासियत यह है कि टेक्स्ट को किसी दूसरे डॉक्यूमेंट में कॉपी-पेस्ट करने पर भी मार्क बना रह सकता है। एडेटिंग से भी इसे हटना मुश्किल हो सकता है। एंथ्रोपिक का कहना है कि इस मार्किंग से Claude के जवाब के अर्थ या गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

तस्वीर और दूसरी फाइलों में अलग होगा सिस्टम
  • टेक्स्ट के अलावा क्लाउड से तैयार की गई फाइल्स में यह तरीका थोड़ा अलग हो सकता है। या अलग तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। सीवीजी, पीएनजी और जेपीजी जैसी फाइल्स में एंथ्रोपिक साइन किए गए प्रोवेनेंस मेटाडेटा को अटैच करेगा।
  • यह मेटाडेटा कंटेंट प्रोवेनेंस और ऑथेंटिसिटी के लिए गठबंधन यानी C2PA के ओपन स्टैंडर्ड का पालन करता है। यह स्टैंडर्ड कंटेंट की उत्पत्ति यानी उसकी प्रोवेनेंस से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड करने के लिए इस्तेमाल होता है।
  • साइन किया गया मेटाडेटा यह भी संकेत दे सकता है कि इन फाइल्स को क्लाउड ने प्रोसेस किया है। इसके अलावा इससे यह भी पता चल सकता है कि फाइल के साथ बाद में किसी तरह की छेड़छाड़ हुई है या नहीं।

वॉटरमार्क को लेकर यूजर्स की क्या प्रतिक्रिया है?
  •  इस बदलाव की जानकारी के बाद यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ लोग Claude के हर आउटपुट में वॉटरमार्क जोड़ने के फैसले से खुश नहीं हैं। तो कुछ ऑनलाइन यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं रहीं। वहीं, कुछ यूजर्स ने यहां तक कहा कि वे इस बदलाव के बाद अपना क्लाउड सब्सक्रिप्शन रद्द करने पर विचार कर रहे हैं। कुछ लोगों ने इसे कंपनी का अब तक का सबसे खराब फैसला भी बताया।
  • हालांकि, दूसरी तरफ कुछ यूजर्स ने इस बदलाव का समर्थन किया। उन्होंने उन लोगों पर तंज भी कसा जो अपने कंटेंट में AI के इस्तेमाल का खुलासा नहीं करते।

वॉटरमार्क कैसे पता चलेगा?
  • एंथ्रोपिक का इसपर कहना है कि वह यूजर्स और थर्ड पार्टी को क्लाउड के एंबेडेड वॉटरमार्क और प्रोवेनेंस मेटाडेटा की जांच करने की सुविधा देने पर काम कर रही है।
  • डिटेक्शन सिस्टम यह जांच सकेगा कि किसी टेक्स्ट या फाइल में समर्थित क्लाउड मार्क मौजूद है या नहीं। कंपनी ने कहा है कि वह जल्द ही इस डिटेक्शन मैकेनिज्म से जुड़ी और जानकारी साझा करेगी।

क्या इसकी कुछ सीमाएं भी हो सकती हैं?
  • हां...कंपनी ने साफ कहा है कि वॉटरमार्क का मिलना अपने आप में इस बात का निर्णायक सबूत नहीं होगा कि पूरा कंटेंट क्लाउड ने ही बनाया है।
  • ऐसा इसलिए क्योंकि यूजर क्लाउड का इस्तेमाल केवल कंटेंट बनाने के लिए नहीं, बल्कि प्रूफरीडिंग, ट्रांसलेशन, समरी या फाइल कन्वर्जन जैसे कामों के लिए भी कर सकते हैं।
  • जैसे मान लीजिए आपने कोई कंटेंटे लिखा और उस टेक्स्ट को क्लाउड पर सिर्फ प्रूफरीड के लिए डाला, तो रिजल्ट में भी क्लाउड का मार्क आ सकात है। इसी तरह क्लाउड से प्रोसेस किए गए कंटेंट को बाद में एडिट, एक्सट्रैक्ट या दूसरे मटेरियल के साथ मिलाया जा सकता है।
  • इसलिए वॉटरमार्क केवल यह संकेत दे सकता है कि कंटेंट क्लाउड की ओर प्रोसेस किया गया हो सकता है, यह जरूरी नहीं कि मूल लेखक क्लाउड ही हो।

किन Claude मॉडल और सेवाओं पर लागू होगा?
  • कंपनी के अनुसार, यह मार्किंग दुनिया भर में उन जगहों पर समर्थित क्लाउड मॉडल के आउटपुट पर लागू होगी जहां क्लाउड  उपलब्ध है।
  • इसमेंक्लाउड प्लेटफॉर्म, क्लाउड, क्लाउड कोड, क्लाउड कोवर्क और क्लाउड टैग शामिल हैं। इसके अलावा एडब्ल्यूएस, गूगल क्लाउड और माइक्रोसॉफ्ट फाउंड्री जैसे क्लाउड पार्टनर्स के जरिए उपलब्ध Claude सेवाओं पर भी यह सिस्टम लागू होगा।
  • वहीं, 2 अगस्त 2026 से पहले लॉन्च किए गए मौजूदा मॉडल के लिए मार्किंग सपोर्ट अभी प्रगति में है। , कानून में पुराने मॉडल्स के लिए ट्रांजिशन पीरियड शामिल है और कंपनी उनमें भी मार्किंग सपोर्ट जोड़ने पर काम कर रही है।
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