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'Telegram नया डार्क वेब बनता जा रहा है': दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र का दावा; कोर्ट ने मांगी लिखित दलीलें

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Thu, 18 Jun 2026 04:30 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट में टेलीग्राम को लेकर केंद्र सरकार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पेपर लीक, साइबर ठगी, ड्रग तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए बढ़ता जा रहा है। वहीं, अदालत ने टेलीग्राम से पूछा है कि वह रियल-टाइम में ऐसे कंटेंट को रोकने के लिए क्या व्यवस्था रखता है।

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delhi high court seeks telegram response on paper leak monitoring and dark web allegations
टेलीग्राम मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में आज हुई सुनवाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को टेलीग्राम की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें मैसेजिंग ऐप ने 21 जून को होने वाली NEET-UG री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार द्वारा उस पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति तेजस करिया की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ ने टेलीग्राम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता तथा केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को शाम 7 बजे तक अपनी लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश दिया। पीठ केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ टेलीग्राम द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
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कोर्ट ने टेलीग्राम के किया सवाल

टेलीग्राम पर जारी विवाद के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म से एक अहम सवाल पूछा है। अदालत जानना चाहती है कि परीक्षा के पेपर लीक जैसे संवेदनशील मामलों में अवैध सामग्री को तुरंत फैलने से रोकने के लिए टेलीग्राम के पास रियल-टाइम मॉनिटरिंग और निगरानी की क्या व्यवस्था है।
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मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने भी टेलीग्राम के कामकाज को लेकर गंभीर चिंताएं जताईं। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) से मिले इनपुट यह संकेत देते हैं कि प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े पैटर्न का हिस्सा बन चुका है।

टेलीग्राम की संरचना पर प्रश्न

तुषार मेहता ने कहा कि टेलीग्राम का तकनीकी ढांचा अन्य सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स से काफी अलग है। उनके मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में बॉट्स बनाए जा सकते हैं और उनके जरिए किसी भी कंटेंट को तेजी से फैलाया जा सकता है। यही कारण है कि गलत सूचनाओं और गैरकानूनी सामग्री पर नियंत्रण करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि नियमों का पालन न करने के कारण कई देशों ने टेलीग्राम के खिलाफ कार्रवाई की है।

केंद्र ने हलफनामे में लगाए गंभीर आरोप

  • दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने दावा किया है कि टेलीग्राम का इस्तेमाल कई तरह की अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। इनमें परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक करना, साइबर ठगी, ड्रग तस्करी, कट्टरपंथी सामग्री का प्रसार, आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियां, बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री, कॉपीराइट उल्लंघन और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे मामले शामिल हैं।
  • सरकार ने टेलीग्राम को "नया डार्क वेब" तक करार दिया है। उसका कहना है कि प्लेटफॉर्म की गोपनीयता संबंधी सुविधाएं जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों की पहचान करना मुश्किल बना देती हैं।
  • हलफनामे में यह भी आरोप लगाया गया है कि टेलीग्राम का इस्तेमाल मालवेयर फैलाने, साइबर हमलों को बढ़ावा देने, चोरी किए गए डेटा को साझा करने, मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क चलाने और बॉट्स व चैनलों के जरिए लोगों की निजी जानकारी तक अनधिकृत पहुंच उपलब्ध कराने के लिए भी किया जा रहा है।

पहले बातचीत की, फिर उठाए कदम

  • केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि उसने शुरुआत में टेलीग्राम पर सीधे प्रतिबंध लगाने का फैसला नहीं किया था। अधिकारियों ने पहले कम हस्तक्षेप वाली रणनीति अपनाई और कंपनी को अपनी व्यवस्था सुधारने का अवसर दिया।
  • इसी के तहत 3 जून 2026 को टेलीग्राम के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए बुलाया गया। इस बैठक में सरकार ने चिंता जताई कि प्लेटफॉर्म परीक्षा प्रश्नपत्र लीक से जुड़े चैनलों की पहचान कर उन्हें सक्रिय रूप से रोकने में सक्षम नहीं है।
  • सरकार के अनुसार, टेलीग्राम ने स्वीकार किया था कि ऐसे कंटेंट की पहले से पहचान करने की उसकी क्षमता सीमित है। कंपनी ने यह भी कहा था कि रिपोर्ट किए गए चैनलों पर उसके मॉडरेटर कार्रवाई कर रहे हैं।

टेलीग्राम ने आदेश पर उठाए सवाल

  • सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक समीक्षा समिति ने टेलीग्राम के अधिकारियों की दलीलें भी सुनी थीं और उनका रिकॉर्ड तैयार किया था।
  • टेलीग्राम की ओर से तर्क दिया गया कि कानून इस तरह के विभाजन या अलग-अलग श्रेणियों के आधार पर कार्रवाई की अनुमति नहीं देता। कंपनी का कहना है कि यदि आदेश का मूल आधार ही गलत साबित होता है, तो पूरा आदेश टिक नहीं सकता। अदालत ने टेलीग्राम के इस तर्क को रिकॉर्ड पर लिया और कहा कि मामले के दोनों पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
  • टेलीग्राम ने केंद्र सरकार के आदेश में कानूनी खामियों का भी आरोप लगाया है। हालांकि, दूसरी ओर समीक्षा समिति ने सर्वसम्मति से अंतरिम निर्देशों को बरकरार रखने की सिफारिश की थी।
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