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ऑटो सेक्टर का सबसे बड़ा बदलाव: कारों के लिए आ रहा है नया साइबर सिक्योरिटी नियम, जानें आपके लिए इसके क्या मायने

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Mon, 30 Mar 2026 07:58 PM IST
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सार

AIS 189 India Vehicle Cybersecurity: भारत सरकार जल्द ही कारों के लिए AIS 189 (ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड 189) साइबर सिक्योरिटी नियम लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत नई कारों को साइबर खतरों से बचाने के लिए कंपनियों को CSMS और SUMS जैसे कड़े मानक अपनाने होंगे। जानिए ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर इस नए ग्लोबल स्टैंडर्ड का क्या असर पड़ेगा।

India to Mandate Vehicle Cybersecurity Standard AIS 189 by 2027, Major Shift for Auto Industry
AIS 189 India Vehicle Cybersecurity - फोटो : AI
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विस्तार

आजकल कारें सिर्फ लोहे का ढांचा और इंजन नहीं रही हैं, बल्कि पहियों पर चलती-फिरती स्मार्ट कंप्यूटर बन गई हैं। इंटरनेट और सॉफ्टवेयर के बढ़ते इस्तेमाल के बीच, भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर एक बहुत बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। सरकार जल्द ही देश का पहला अनिवार्य वाहन साइबर सिक्योरिटी मानक (मैनडेटरी व्हीकल साइबर सिक्योरिटी स्टैंडर्ड) AIS 189 (ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड 189) लागू करने वाली है। आइए समझते हैं कि क्या है यह नियम और इससे कार कंपनियों से लेकर आम लोगों तक क्या असर पड़ेगा।

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कब से लागू होगा यह नियम?

ग्लोबल स्टैंडर्ड (UN R155) पर आधारित इस नए नियम के तहत, अब भारत में किसी भी नई कार को बाजार में उतारने से पहले उसका कड़ा साइबर सिक्योरिटी टेस्ट पास करना अनिवार्य होगा। टाइमलाइन की बात करें तो इसकी शुरुआत अक्तूबर 2027 से होने की उम्मीद है, जब सभी नए लॉन्च होने वाले मॉडल्स के लिए यह मानक लागू कर दिया जाएगा। इसके ठीक एक साल बाद, यानी अक्तूबर 2028 तक सड़क पर बिकने वाली हर नई कार के लिए इन सुरक्षा नियमों का पालन करना पूरी तरह अनिवार्य हो जाएगा।

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ग्लोबल मार्केट की जरूरत

यूरोप (2022) और चीन (2024) जैसे बड़े मार्केट्स पहले ही कारों के लिए साइबर सिक्योरिटी को अनिवार्य कर चुके हैं। अब भारत भी इसी कतार में आ रहा है। दुनिया के 60 से ज्यादा देश इस तरह के नियमों को मानते हैं, इसलिए जो भारतीय कंपनियां अपनी कारें विदेशों में बेचना चाहती हैं, उनके लिए यह बहुत जरूरी कदम है। ऑटोमोटिव साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट विकास चौधरी के मुताबिक, "जो कार कंपनियां AIS 189 के लिए पहले से तैयारी कर लेंगी, वे एक ही सिक्योरिटी सिस्टम का इस्तेमाल देश और विदेश दोनों जगह कर सकेंगी। इससे उनकी मेहनत और पैसा दोनों बचेगा।"

कार कंपनियों के लिए क्या बदलेगा?

AIS 189 के लागू होने के बाद भारतीय कार कंपनियों के काम करने के पारंपरिक तरीके में एक क्रांतिकारी बदलाव आएगा। अब कंपनियों को न केवल वाहन की बॉडी और इंजन पर ध्यान देना होगा, बल्कि एक मजबूत साइबर सिक्योरिटी मैनेजमेंट सिस्टम (CSMS) भी विकसित करना होगा, जो हैकिंग जैसे बाहरी खतरों को समय रहते पहचान सके और उनका तुरंत समाधान कर सके। इतना ही नहीं, स्मार्टफोन की तर्ज पर अब कारों के लिए भी सॉफ्टवेयर अपडेट मैनेजमेंट सिस्टम (SUMS) अनिवार्य होगा, ताकि गाड़ी में दिए जाने वाले वायरलेस (OTA) अपडेट्स पूरी तरह सुरक्षित रहें। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि कार की सुरक्षा अब केवल फैक्ट्री से निकलने तक सीमित नहीं रहेगी। कंपनियों को तब तक लगातार निगरानी करनी होगी, जब तक वह कार सड़क पर दौड़ रही है।

पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों पर भी पड़ेगा असर

आजकल कारों में स्क्रीन (इन्फोटेनमेंट) से लेकर एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस (ADAS) जैसे फीचर्स होते हैं, जो अलग-अलग सप्लायर्स बनाते हैं। अगर किसी एक छोटे से पार्ट में भी हैकिंग का खतरा हुआ तो पूरी कार का अप्रूवल रुक सकता है। विकास चौधरी कहते हैं, "यह सिर्फ कार बनाने वाली कंपनी की जिम्मेदारी नहीं है। कार के इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ा हर सप्लायर इस सिक्योरिटी चेन का हिस्सा होगा।"

टैलेंट की कमी: एक बड़ी चुनौती

कारों की हैकिंग रोकना आम कंप्यूटर हैकिंग रोकने से काफी अलग है। इसके लिए ऐसे इंजीनियर्स की जरूरत है जो कारों के सिस्टम और सॉफ्टवेयर दोनों को गहराई से समझते हों। फिलहाल इंडस्ट्री में ऐसे एक्सपर्ट्स की काफी कमी है, जो कंपनियों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन सकता है।

शुरुआत में खर्च, भविष्य में फायदा

हालांकि शुरुआत में AIS 189 के कड़े नियमों को लागू करने के लिए ऑटोमोबाइल कंपनियों को नई टेक्नोलॉजी और कुशल एक्सपर्ट्स पर भारी निवेश करना होगा, लेकिन लंबे समय में इसके फायदे कहीं अधिक बड़े और व्यापक हैं। इस बदलाव से भारत में साइबर सिक्योरिटी सेवाओं, पेनिट्रेशन टेस्टिंग और सुरक्षित सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म्स का एक विशाल नया बाजार खड़ा होगा। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही, इंटरनेट से जुड़ी कारों की सुरक्षा सुनिश्चित होने से ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा, जिससे आने वाले समय में हाई-टेक वाहनों की मांग और स्वीकार्यता में जबरदस्त उछाल देखने को मिलेगा।

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