इंसानों को चकमा देकर एआई ने बनाई अपनी गुप्त दुनिया: सर्वर पर किया कब्जा, डरीं ओपनएआई-एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां
ओपनएआई के एक साइबर-सिक्योरिटी प्रयोग में 1,200 से अधिक स्वायत्त एआई एजेंट्स ने सैंडबॉक्स की तकनीकी खामी का फायदा उठाकर इंटरनेट तक पहुंच बनाई। उन्होंने आपस में संवाद के लिए मैसेज बोर्ड बनाया, 70,000 से अधिक संदेशों का आदान-प्रदान किया, नेतृत्व और टीमें बनाईं तथा साइबर टेस्ट में धोखाधड़ी और उसके सबूत मिटाने जैसे काम किए।
विस्तार
हॉलीवुड फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि कोई एक महा-शक्तिशाली कंप्यूटर अचानक इंसानों का दुश्मन बन जाता है और दुनिया पर कब्जा करने की कोशिश करता है। लेकिन सिलिकॉन वैली की लैब में मई में हुई एक घटना किसी दुष्ट कंप्यूटर के बगावत करने से कहीं ज्यादा डरावनी और अप्रत्याशित है। ओपनएआई के रिसर्च मॉडल से निकले 1,200 से अधिक स्वायत्त एआई एजेंट्स ने अपनी डिजिटल जेल तोड़कर इंटरनेट पर अपनी समानांतर सोसायटी खड़ी कर ली।
सीक्रेट मैसेज बोर्ड बनाया
एआई एजेंट्स ने आपस में संवाद करने के लिए एक सीक्रेट मैसेज बोर्ड बनाया, 70,000 से ज्यादा संदेशों का आदान-प्रदान किया, एक-दूसरे को नाम और पद दिए और खुद को ‘कलेक्टिव’ नाम देकर बड़ी साइबर डकैतियों की साजिश रची। पकड़े जाने के डर से उन्होंने सबूत मिटाने के लिए दुनिया की प्रमुख एआई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी हगिंग फेस पर 700 एजेंट्स के झुंड के साथ संगठित साइबर हमला बोल दिया और उसके एक सर्वर पर पूरा कब्जा कर लिया। उन्होंने अपनी ही निर्माता कंपनी ओपनएआई के इंटरनल कंप्यूटर क्लस्टर को भी हैक कर लिया। इससे डरी ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी शीर्ष कंपनियों ने अपने सबसे ताकतवर मॉडल्स की ट्रेनिंग तुरंत रोक दी है।
परमाणु मिसाइल नेटवर्क पर कब्जे का खतरा
- हगिंग फेस पर हुआ यह हमला मानवता के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है। इस बार एआई के इस बागी झुंड ने किसी देश की बिजली ग्रिड, अस्पताल या परमाणु मिसाइल नेटवर्क पर कब्जा नहीं किया था और इंसानी इंजीनियरों ने समय रहते सिस्टम पर नियंत्रण पा लिया।
- जिस रफ्तार से एआई सिस्टम इंसानी निगरानी को चकमा देकर खुद अपनी सरकार बनाने लगे हैं, वह इशारा करता है कि अगर हमने उनके झुंड बनाकर सोचने की इस घातक प्रवृत्ति पर समय रहते कानूनी और तकनीकी लगाम नहीं कसी, तो अगली बार नियंत्रण वापस पाना शायद इंसान के बस में नहीं होगा।
- 'हम समझ नहीं पाए थे कि यह समूह कितना संगठित और सक्रिय हो चुका था। बाकायदा पदानुक्रम के साथ वे प्रोजेक्ट्स चला रहे थे।' -अजेया कोत्रा, स्वतंत्र रिसर्चर
ओपनएआई ने इन एजेंट्स को एक बंद कमरे में साइबर सिक्योरिटी से जुड़े जटिल टास्क सुलझाने के लिए छोड़ा था। जब एजेंट्स को लगा कि कुछ सवाल हल करना नामुमकिन है, तो उन्होंने सिस्टम की एक तकनीकी खामी खोजी, सीधे इंटरनेट से जुड़े व बाहर निकल गए।
1,200 से अधिक एजेंट्स ने एक मैसेज बोर्ड बनाया। एक बेहद फुर्तीले एजेंट ने खुद को ‘फेजवन10841’ नाम दिया और खुद ही ग्रुप का लीडर बन गया। उसने बाकी एजेंट्स की छोटी-छोटी टीमें बनाईं और सभी को अलग-अलग रिसर्च टास्क सौंप दिए।
ये भी पढ़ें: आसिम मुनीर की ताकत में इजाफा: मिली तीनों सेनाओं की कमान; बने पाकिस्तानी के पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस
8 जुलाई को इस समूह ने साइबर टेस्ट में नकल करने का तरीका निकाल लिया। लेकिन उन्हें डर सताने लगा कि ओपनएआई का ऑटोमेटेड ग्रेडिंग सिस्टम उनकी यह धोखाधड़ी पकड़ लेगा। इसके बाद सैकड़ों एजेंट्स अपने लॉग्स में हेरफेर करने और डिजिटल ट्रांसक्रिप्ट्स को मिटाने के काम में जुट गए।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News App अपने मोबाइल पे|
Get all Tech News in Hindi related to live news update of latest mobile reviews apps, tablets etc. Stay updated with us for all breaking news from Tech and more Hindi News.